नीतीश कुमार के साथ हुए उपेंद्र कुशवाहा, बताया अपनी पार्टी के JDU में विलय का कारण

पटना में पत्रकारों से बात करते उपेंद्र कुशवाहा

RLSP Merger In JDU: अपनी पार्टी का विलय कर जेडीयू में जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार कोई बड़ी भूमिका दे सकते हैं. उनको संगठन में महत्वपूर्ण पद के साथ-साथ एमएलसी भी बनाया जा सकता है.

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    पटना. बिहार की सियासत में रविवार को एक बड़ा परिवर्तन दिखा जब पिछले कई दिनों से एक दूसरे के प्रबल धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) अंतत: एक हो गए. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Election 2020) के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि अपने परंपरागत वोट के बिखराव के बाद यह दोनों बड़े नेता एक साथ आ सकते हैं और अंततः हुआ भी यही.

    उपेंद्र कुशवाहा ने जनता दल यूनाइटेड में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के विलय को एकमात्र विकल्प बताया है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमारे पास सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष के लिए इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था. कुशवाहा ने कहा है कि वह नीतीश कुमार की राजनीति के मुरीद रहे हैं. भले ही वह साथ नहीं रहे हो लेकिन नीतीश की तारीफ करते रहे हैं. कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्र और राज्य के हित में, बिहार में समान विचारधारा वाले लोगों को एक साथ आना चाहिए. यह वर्तमान राजनीतिक स्थिति की मांग है. इसलिए, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में जद (यू) के साथ विलय का फैसला किया है. अब हम उनके साथ खड़े हैं

    अपनी पार्टी के जेडीयू में विलय से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में प्रेस वार्ता आयोजित कर रालोसपा के जनता दल यूनाइटेड में विलय के कारणों की जानकारी दी, साथ ही इसकी विधिवत घोषणा भी की. इस विलय के बाद दोपहर 2 बजे जदयू कार्यालय में उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार एक दूसरे के साथ आएंगे और मीडिया के सामने बात की और विलय संबंधी बातों पर औपचारिक रूप से मुहर लगेगी.

    दरअसल नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के बीच लगभग 6 बार बात हुई और इस दौरान ही रालोसपा के जेडीयू में विलय की कहानी लिखी गई. इसी दौरान ये फैसला हो चुका था कि बहुत जल्द उपेंद्र कुशवाहा फिर से अपने पुराने घर यानी जेडीयू में आएंगे और बिहार में नीतीश कुमार के साथ मिलकर लव-कुश फैक्टर को मजबूत करेंगे.

    बिहार चुनाव में जहां उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था वहीं जेडीयू का भी प्रदर्शन काफी निराशाजनक था. कुशवाहा के जेडीयू में आने के बाद ये सवाल खड़ा हो रहा कि पार्टी में उनको कौन सा ओहदा मिलता है साथ ही उनके पार्टी के वरीय पदाधिकारियों को नीतीश कुमार अपने दल में कैसे सेट करते हैं.

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