उपेंद्र कुशवाहा ने CM नीतीश को लिखी चिट्ठी, गरीब, मजदूर और किसानों समेत हर तबके के लिए मांगी मदद
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उपेंद्र कुशवाहा ने CM नीतीश को लिखी चिट्ठी, गरीब, मजदूर और किसानों समेत हर तबके के लिए मांगी मदद
आरएलएसपी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा. (फाइल फोटो)

Lockdown In Bihar : आरएलएसपी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को चिट्टी लिखकर गरीबों और किसानों को हो रही समस्या की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की है.

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पटना. आरएलएसपी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को चिट्टी लिखकर गरीबों और किसानों को हो रही समस्या की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की है. अपने पत्र में कुशवाहा ने कहा है कि राज्य में 22 मार्च 2020 से लॉकडाउन (Lockdown) है. इस दौरान राज्य की तमाम आर्थिक गतिविधियां बंद पड़ी हुई हैं और देश भर से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस आ रहे हैं. कोविड-19 और लॉकडाउन की वजह से यहां के किसान, मजदूर, दुकानदार और छोटे-मोटे काम करने वाले लोगों पर बड़ी मार पड़ी है, साथ ही एमएसएमई और दूसरे बड़े उद्यम चलाने वाले भी बहुत संकट में हैं. लिहाजा उनके लिए सरकार की तरफ से मदद दी जाए. जबकि उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पत्र के जरिए मुख्यमंत्री और बिहार सरकार से जरूरी कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई है.

पार्टी महासचिव ने कही ये बात
उपेंद्र कुशवाहा के पत्र के बारे में पार्टी के प्रधान महासचिव माधव आनंद कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष की तरफ से की गई 18 सूत्री मांग बिहारवासियों के हित में हैं. इसलिए हम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हैं कि इन सभी मांगों को मानें, जिससे बिहार के लोगों का हित होगा. इससे बाहर से आए मजदूरों और कामगारों की परेशानियों का भी समाधान हो जाएगा.

उपेंद्र कुशवाहा की हैं ये 18 मांग
1. राज्य के धोबी,लुहार,बढ़ई,दर्जी,रेहड़ी-पटरीऔर नाई का काम करने वाले परिवारों को पांच-पांच हजार रुपए दिए जाएं.


2. सब्जी और फूल उत्पादकों को प्रति एकड़ 5,000 रुपए की राहत दी जाए.
3. रोजाना हाट-बाजारों में सब्जी, फल,फूल,चूड़ी-लहठीऔर अन्य सामानों को बेचकर अपने परिवार का भरण- पोषण करने वालों को 5000 रुपए प्रतिपरिवार दिया जाए.
4. ऑटो-टैक्सी एवं ठेला-रिक्शा चलाकर गुजारा करने वाले परिवारों को भी 5,000 रुपए मुआवजा दिया जाए.
5. संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले कामगारों, कुशल और अकुशल मजदूरों तथा खेतिहर मजदूरों को 5,000 रुपए की मदद दी जाए.
6. हलवाई, कुम्हार, जुलाहा, बुनकर,बीड़ी बनाने वाले, ताड़ी बेचने वाले, सड़क किनारे जूता-चप्पल सिलने वाले, पान और चाय दुकान चलाने वाले प्रत्येक परिवार को भी पांच-पांच हजार रुपए दिए जाएं.
7. कोविड-19 के दौरान कई अफवाह सोशल मीडिया पर फैला, इससे पॉल्ट्री फर्म चलाने वाले लोगों को बहुत नुकसान हुआ. कई जगहों पर उनको जिंदा मुर्गियों को जमीन में दफन करना पड़ा. छोटे-छोटे फर्म को भी लाखों में नुकसान हुआ. इन मुर्गी पालकों को कारोबार फिर से शुरू करने के लिए सब्सिडी के साथ वर्किंग कैपिटल लोन मुहैया कराया जाए.
8. सोशल मीडिया में चले अफवाहों के कारण मछुआरों, मत्स्य पालकों, भेड़-बकरी पालकों और इनसे जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है. इसीलिए इनके परिवारों को भी पांच-पांच हजार रुपये दिए जाएं.
9. राज्य भर में काम करने वाले छोटे औद्योगिक इकाई यानी एमएसएमई, दुकानदार और व्यापारियों को तीन महीने के बिजली बिल पर मासिक फिक्स्ड चार्ज माफ किया जाए.
10. राज्य भर के मॉल और बड़े रीटेलरों सहित बड़े उद्योगों के बिजली बिल के फिक्स्ड चार्जेज को कम से कम तीन महीने के लिए टाला जाएऔर उसे अगले एक साल के दौरान मासिक किस्तों में वसूल किया जाए.
11. किसानों को कई जिलों में गेहूं इनपुट अनुदाननहीं मिल रहा है. आपको ज्ञात है कि जब गेहूं पकने का समय था, उन्हींदिनों बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि के कारण फसलों को 25-30 फीसदी का नुकसान हुआ. साथ में, गेहूं का दाना भी ठीक से आकार नहीं ले पाया. इससे किसानों को बड़ा नुकसान हुआ. इसीलिए गेहूं किसानों को भी इनपुट अनुदान दिया जाए.
12. लीची किसानों पर लॉकडाउन और मौसम की दोहरी मार पड़ी है. इस वर्ग को भी विशेष सहायता की जरूरत है और उनके नुकसान का आकलन करउन्हें आर्थिक् सहयोग किया जाए.
13. पांच एकड़ तक के मालिकाना हक वाले किसानों के 20,000 रुपए तक का कृषि ऋण माफ किया जाए.
14. सभी तरह के यात्री बस और मालवाहक ट्रकों कापहिया लंबे समय से थमा हुआ और उनको इस अवधि का भी इंश्योरेंस और रोड टैक्स लग रहा है. ऐसे समय में सरकार न सिर्फ दो महीने का रोड टैक्स माफ करे, बल्कि इंश्योरेंस कंपनियों से बात कर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बीमा अवधि को भी तीन महीने बढ़ाया जाए.
15. छोटे दुकानदारों के 20,000 रुपए तक के माइक्रो फाइनेंस ऋण का भुगतान राज्य सरकार करे.
16. सरकार बैंकों के साथ एग्रीमेंट कर छोटी पूंजी वाले दुकानदारों, कारोबारियों को एक लाख रुपए तक बिना किसी कोलैटरल के वर्किंग कैपिटल मुहैया कराए.
17. लॉकडाउन के दौरान भूख या किसी अन्यदुर्घटना के कारण मौत के शिकार मजदूरों के परिजनों को कम से कम 10लाख रुपए का मुआवजा दिया जाये.
18. बिहार में गन्ना किसानों के बकाए का भी भुगतान अविलंब किया जाए.

 

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