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बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती विशेष: जगदीशपुर किले से 'यूनियन जैक' उतारकर ही दम लिया

बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती विशेष: जगदीशपुर किले से 'यूनियन जैक' उतारकर ही दम लिया

बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती पर विशेष आलेख.

बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती पर विशेष आलेख.

Bhojpur News: 27 अप्रैल 1857 को दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी जवानों और अन्य साथियों के साथ आरा नगर पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने कब्जा कर लिया. अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी भोजपुर लंबे समय तक स्वतंत्र रहा. जब अंग्रेजी फौज ने आरा पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई.

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पटना. 80 साल की उम्र में लड़ने और विजय हासिल करने के लिए अगर किसी शख्स का नाम लिया जाता है तो वो हैं वीर कुंवर सिंह. वीर कुंवर सिंह का जन्म 13 नवंबर 1777 को बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गांव में हुआ था. वीर कुंवर सिंह सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे. अन्याय विरोधी और स्वतंत्रता प्रेमी बाबू कुंवर सिंह कुशल सेना नायक थे. 1857 में अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर कदम बढ़ाया. मंगल पांडे की बहादुरी ने सारे देश में विप्लव मचा दिया.

बिहार की दानापुर रेजिमेंट, बंगाल के बैरकपुर और रामगढ़ के सिपाहियों ने बगावत कर दी. मेरठ, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी और दिल्ली में भी आग भड़क उठी. ऐसे हालात में बाबू कुंवर सिंह ने अपने सेनापति मैकु सिंह और भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया.

गजब की थी नेतृत्व क्षमता
27 अप्रैल 1857 को दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी जवानों और अन्य साथियों के साथ आरा नगर पर बाबू वीर कुंवर सिंह ने कब्जा कर लिया. अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी भोजपुर लंबे समय तक स्वतंत्र रहा. जब अंग्रेजी फौज ने आरा पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई. बहादुर स्वतंत्रता सेनानी जगदीशपुर की ओर बढ़ गए.

ऐसे योद्धा थे बाबू वीर कुंवर सिंह
आरा पर फिर से कब्जा जमाने के बाद अंग्रेजों ने जगदीशपुर पर आक्रमण कर दिया. बाबू कुंवर सिंह और अमर सिंह को जन्मभूमि छोड़नी पड़ी. अमर सिंह अंग्रेजों से छापामार लड़ाई लड़ते रहे और बाबू वीर कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियों के साथ बांदा, रीवा, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर और गोरखपुर में विप्लव के नगाड़े बजाते रहे.

1858 में वीरगति पायी
वीर कुंवर सिंह ने 23 अप्रैल 1858 में जगदीशपुर के पास अंतिम लड़ाई लड़ी. ईस्ट इंडिया कंपनी के भाड़े के सैनिकों को इन्होंने पूरी तरह खदेड़ दिया. उस दिन बुरी तरह घायल होने पर भी इस बहादुर ने जगदीशपुर किले से गोरे पिस्सुओं का यूनियन जैक नाम का झंडा उतार कर ही दम लिया. वहां से अपने किले में लौटने के बाद 26 अप्रैल 1858 को इन्होंने वीरगति पाई.

पारिवारिक परिचय
वीर कुंवर सिंह के पिता बाबू साहबजादा सिंह प्रसिद्ध शासक भोज के वंशजों में से थे. उनकी माताजी का नाम पंचरत्न कुंवर था. उनके छोटे भाई अमर सिंह, दयालु सिंह और राजपति सिंह और इसी खानदान के बाबू उदवंत सिंह, उमराव सिंह, गजराज सिंह नामी जागीरदार रहे. ये परिवार अपनी आजादी कायम रखने की खातिर सदा लड़ने के लिए जाना गया.

Tags: ARA news, Bhojpur news, Bihar news election 2020, Bihar News in hindi, PATNA NEWS, Patna News Update

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