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बिहार विधान परिषद चुनाव: मुकेश सहनी को रास नहीं आया BJP का ऑफर, 4 साल की बजाय फुल टर्म चाहिए कुर्सी

बिहार सरकार के मंत्री मुकेश सहनी (File Photo)
बिहार सरकार के मंत्री मुकेश सहनी (File Photo)

Bihar Legislative Council Election: विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) बिहार में एनडीए की सरकार का हिस्सा हैं. BJP ने अपने हिस्से की विधान परिषद की एक सीट वीआईपी को ऑफर की थी, लेकिन सहनी ने इस पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 11:02 AM IST
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पटना. बिहार में विधान परिषद की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव (Vidhan Parishad By-Polls) को लेकर मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) की अगुवाई वाली विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने ना कर दी है. दरअसल बिहार में जिन दो सीटों के लिए उपचुनाव होना है, उनमें से एक बीजेपी (BJP) के खाते में गई है, जबकि दूसरे पर बिहार सरकार में मंत्री और वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश साहनी के विधान परिषद में जाने के कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन अब ताजा घटनाक्रम में मुकेश सहनी ने उपचुनाव के लिए नॉमिनेशन नहीं करने की घोषणा की है.

वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव मिश्रा ने न्यूज़ 18 को जानकारी देते हुए बताया कि बिहार की दो सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में मुकेश साहनी नॉमिनेशन नहीं करेंगे. राजीव मिश्रा के मुताबिक मुकेश सहनी विधान परिषद की सीट के लिए 6 साल कार्यकाल वाली सीट चाहते हैं, जबकि इस बार के उपचुनाव में जो सीट मुकेश सहनी के खाते में आती उसका कार्यकाल महज 4 साल है. ऐसे में मुकेश सहनी ने किसी भी सीट से विधान परिषद में नहीं जाने का फैसला लिया है.

विधानसभा चुनाव में हार गए थे मुकेश सहनी
दरअसल, बिहार विधानसभा के चुनाव में मुकेश सहनी को हार का सामना करना पड़ा था. बावजूद इसके नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उन्हें जगह दी गई है. ऐसे में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री बन चुके मुकेश सहनी को 6 महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना पड़ेगा. बिहार विधान परिषद चुनाव की एक सीट के लिए बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को उम्मीदवार बनाया है. इसके साथ ही हुसैन की चुनावी राजनीति में वापसी हो गई है. बता दें कि लोकसभा चुनाव 2014 में मिली हार के बाद यह पहला मौका है जब वो चुनाव मैदान में उतरेंगे. वर्ष 2014 में वो भागलपुर संसदीय सीट से चुनाव हार गए थे. 2019 के आम चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था.
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