लालू परिवार में 'विरासत की जंग' जारी है! जानिए इनसाइड स्टोरी

साख खो चुके तेजस्वी यादव के एक बार फिर सक्रिय होने के बाद सभी विधायकों से एकजुटता प्रदर्शित करने के साथ तेजस्वी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करवाया जाएगा. हालांकि इस बैठक में तेजप्रताप यादव और मीसा भारती की मौजूदगी या गैरमौजूदगी पर भी सबकी नजर रहेगी.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 14, 2019, 11:38 AM IST
लालू परिवार में 'विरासत की जंग' जारी है! जानिए इनसाइड स्टोरी
जानकारों की मानें तो लालू यादव के परिवार में राजनीतिक विरासत संभालने को लेकर सबकुछ सही नहीं है.
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 14, 2019, 11:38 AM IST
लोकसभा चुनाव परिणाम के आए ढाई महीने से अधिक हो गए. इस दौरान बिहार में कई ऐसे मुद्दे उभरकर आए जो विपक्ष (Opposition) की राजनीति को नई ताकत दे सकते थे. लेकिन, संसदीय चुनाव में महामगठबंधन का नेतृत्व करने वाले तेजस्वी यादव (Tejaswi yadav) नतीजों के बाद सीन से गायब रहे. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से कभी उनकी बीमारी का बहाना बनाया गया तो कभी कहा गया कि वो बीजेपी (BJP) के खिलाफ आगे की रणनीति बनाने में लगे हैं. इन बहानों के बीच छिपते रहे तेजस्वी के कमबैक करने की खबर आ रही है. वो 16 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (Rabri Devi) के आवास पर आरजेडी विधायक दल की बैठक का नेतृत्व करेंगे.

ये बैठक राबड़ी आवास पर होगी, माना जा रहा है कि सभी विधायकों से एकजुटता दिखाने के साथ तेजस्वी के नेतृत्व में उनका विश्वास व्यक्त करवाया जाएगा. हालांकि इस बैठक में तेजप्रताप यादव और मीसा भारती की मौजूदगी या गैरमौजूदगी पर भी सबकी नजरें रहेंगी. दरअसल यह भी माना जा रहा है कि लालू परिवार के भीतर अंदर ही अंदर विरासत की जंग जारी है. आखिर क्या वजह है जो लालू परिवार के भीतर 'घमासान' की बात कही जा रही है?

मीसा भारती ने साध रखी है चुप्पी
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने चुप्पी साध रखी है. नतीजों में मिली हार के बाद से अब तक वो कुछ खास नहीं बोली हैं. पूरे चुनावी कैंपेन के दौरान भी अपने संसदीय क्षेत्र (पाटलिपुत्र) को छोड़ मीसा भारती ज्यादा एक्टिव नहीं रहीं. जाहिर है जिस तरीके से वो अपनी ही पार्टी में सिमट कर रह गई हैं, इसको लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

'हाशिये पर चली गईं मीसा'
वरिष्ठ पत्रकार फ़ैजान अहमद कहते हैं कि इसे गहराई में जानना हो तो कुछ साल पीछे लौटना होगा. लालू यादव ने जब 2015 में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राजनीतिक विरासत का बंटवारा किया था तो मीसा भारती को दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी. यानी लोकसभा और राज्यसभा से संबंधित चीजों को वही देखेंगी. लेकिन, बीतते वक्त के साथ वो हाशिये पर जाती चली गईं और तेजस्वी पार्टी पर हावी होते चले गए.

तेजप्रताप-तेजस्वी में तल्‍खी
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पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से मीसा भारती के टिकट मामले पर जिस तरह तेजस्वी के बड़े भाई तेजप्रताप ने मोर्चा संभाला और मीसा भारती के वहां से लड़ने का खुला ऐलान कर दिया, इससे लालू परिवार में काफी खींचतान दिखी. इसके बाद कई बार तेजस्वी ने अपनी बड़ी बहन और बड़े भाई को अनुशासन में रहने की हिदायत भी दी. हालांकि इसका असर जमीन पर नहीं दिखा और तेजप्रताप रह-रहकर अपनी बात सामने लाते रहे.

Lalu Family
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू प्रसाद यादव किसी अपने संतान में से किसी एक के हाथ में राजनीतिक सत्ता नहीं सौपेंगे.


छोटे ने बड़े को किया इग्नोर
जानकार मानते हैं कि लालू यादव की अनुपस्थिति में तेजस्वी यादव ने मीसा भारती और तेजप्रताप यादव को इग्नोर किया है. लोकसभा चुनाव कैंपेन के दौरान बीते 13 मई को तेजप्रताप ने तेजस्वी के सामने ही मंच पर कहा, 'हमेशा से हम व्याकुल रहे कि तेजस्वी जी के साथ (जो हमारे अर्जुन हैं) उनके कार्यक्रम में जाएं, लेकिन ये पहले ही हेलीकॉप्टर से उड़ जाते थे और हम जमीन पर रह जाते थे.'

'सेल्फ सेंटर्ड हो गए तेजस्वी'
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि तेजप्रताप के इस बयान से साफ है कि वो तेजस्वी के साथ हर वक्त होना चाहते थे, लेकिन छोटे भाई ने उनसे दूरी बना रखी थी. दरअसल तेजस्वी यादव ने पूरे लोकसभा चुनाव कैंपेन को सेल्फ सेंटर्ड कर लिया था. वहीं, मीसा भारती और तेजप्रताप यादव एक खेमे में नजर आ रहे थे. ऊपर से तो सब ठीक दिखाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन अंदरखाने हलचल मची थी.

Lalu Family dispute
तेजस्वी यादव को लालू यादव ने अपनी राजनीतिक विरासत सौंपी थी, लेकिन परिवार में इसपर मतभेद हैं.


'तेजस्वी की मनमानी से बढ़ी दूरी'
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं, परिवार में अंदरुनी कलह तो टिकट बंटवारे के समय ही दिख गई थी. दरअसल, जिस तरह से तेजस्वी यादव ने मीसा भारती को पाटलिपुत्र संसदीय सीट से टिकट दिए जाने को मुद्दा बनाया, वो भी परिवार के भीतर चल रही खींचतान की तस्दीक करती है. इसी तरह तेजप्रताप के एक भी कैंडिडेट को लोकसभा का टिकट न देकर तेजस्वी ने मनमानी की.

बहरहाल, अपनी स्थापना के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि आरजेडी लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खोल पाई. यहां तक कि लालू यादव की बेटी मीसा भारती चुनाव हार गईं. यह सब तेजस्वी के नेतृत्व में हुआ इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं. अब माना जा रहा है कि तेजस्वी पार्टी पर एकाधिकार चाहते हैं और उनकी नजर अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बताई जा रही है. ऐसे में सवाल यही है कि परिवार के भीतर विरासत की ये जंग कहीं आरजेडी को ले न डूबे.

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First published: August 14, 2019, 11:03 AM IST
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