यूपी-बिहार के गुंडे: तेजस्वी यादव की 'खामोशी' पर आखिर क्यों याद आ रहे लालू?

लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव  और ममता बनर्जी की फाइल फोटो.

लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और ममता बनर्जी की फाइल फोटो.

Bihar Politics: तेजस्वी यादव खुद विभिन्न राज्यों में परप्रांतियों के साथ भेदभाव के विरोधी रहे हैं. वर्ष 2016 में महाराष्ट्र में गैर मराठियों के ऑटो रिक्शा जला देने की बात का तेजस्वी यादव ने खूब विरोध किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 2, 2021, 10:16 AM IST
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पटना. पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार की शुरुआत से ही प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार 'बाहरी गुंडों' को बुलाए जाने की बात कहती रही हैं. हाल में ही उन्‍होंने नंदीग्राम (Nandigram) में फिर से कहा कि बंगाल में बिहार और यूपी से आए गुंडे गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. ममता के ऐसे बयानों को बंगाली बनाम बाहरी के तौर पर ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि उनकी राज्य सत्ता में दोबारा वापसी हो सके. बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी का समर्थन किया है, पर यूपी और बिहार के लोगों को लगातार गुंडा कहे जाने और राजद नेता की खामोशी को लेकर अब बिहार की सियासत गरमा गई है.

ममता बनर्जी द्वारा बिहार-यूपी के लोगों के खिलाफ दिए गये बयान पर तेजस्वी को घेरते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि सत्ता के लिए तेजस्वी इतने बेचैन हो चुके हैं कि अब उन्हेंं बिहार को बदनाम करने वाले राजनेताओं की चिरौरी करने में भी शर्म नहीं आती. ममता बनर्जी बिहार-यूपी के लोगों को अपराधी बता रही हैं और उसपर तेजस्वी प्रतिक्रिया नहीं दें तो इससे समझा जा सकता है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए बिहार की इज्जत और प्रतिष्ठा कोई मायने नहीं रखती. क्या राजनीति ही सबसे ऊपर है? तेजस्वी के लिए बिहारियों को ममता बनर्जी गाली देते रहेंगे और बिहारी अपमान सहते रहेंगे?

प्रवासियों से भेदभाव के विरोधी रहे हैं तेजस्वी

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने तृणमूल कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन दिया है. राजद खुद एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रहा, लेकिन तेजस्वी यादव ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को अपना समर्थन दिया है. बता दें कि बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में आसनसोल, हावड़ा, वर्धमान समेत बंगाल-बिहार की सीमा पर रहते हैं. बहरहाल ममता बनर्जी यूपी-बिहार के लोगों को लगातार गुंडा कह रही हैं और तेजस्वी यादव की चुप्पी पर कई सियासी जानकार भी हैरान हैं.
बिहारियों से भेदभाव पर अड़ जाते थे लालू यादव 

वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि तेजस्वी यादव खुद परप्रांतियों के साथ भेदभाव करने के विरोधी रहे हैं. वर्ष 2016 में महाराष्ट्र में गैर मराठियों के ऑटो रिक्शा जला देने के फरमान पर तेजस्वी यादव ने भी खूब विरोध किया था और ऐसे कृत्यों को फासीवाद से जोड़ा था. तब तेजस्वी बिहार के डिप्टी सीएम थे और उन्होंने राज ठाकरे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, 'महाराष्ट्र और देश किसी के बाप की जागीर नहीं है कि वे जो कहेंगे वही होगा.' उन्होंने कहा था कि यह सबका देश है. महाराष्ट्र सरकार ऐसे लोगों पर कड़ी कारवाई करे.

लालू यादव ने जब ठाकरे परिवार को घुसपैठिया कहा



अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि एक दौर वह भी था जब महाराष्ट्र या अन्य प्रांतों में बिहार और यूपी के लोगों से भेदभाव किया जाता था तो लालू प्रसाद यादव और राजद के अन्य नेता सबसे पहले उठ खड़े होते थे और जबरदस्त प्रतिकार करते थे. इसी तरह वर्ष 2012 के एक और वाकये को याद करते हुए अशोक शर्मा कहते हैं कि एक बार फिर राज ठाकरे ने बिहारियों के खिलाफ जहर उगला तो लालू प्रसाद ने ठाकरे परिवार को ही महाराष्ट्र में घुसपैठिया कह दिया था.

दिग्विजय सिंह के खुलासे के बाद गरमाई थी राजनीति

लालू यादव ने तब कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खुलासे का हवाला देते हुए कहा था कि बाला साहेब ठाकरे का पूरा परिवार ही बिहार से पहले मध्य प्रदेश गया था, फिर वहां से वे महाराष्ट्र चले गए. इस तरह ये सभी खुद ही महाराष्ट्र में घुसपैठिये हैं. लालू के इस बयान के बाद राजनीति काफी गर्म हो गई थी.

बिहारियों को इसलिए याद आ रहे लालू यादव

वर्ष 2008 के नवंबर महीने में कही गई उस बात को याद करते हुए अशोक शर्मा कहते हैं कि जब राज ठाकरे द्वारा बिहारियों को महाराष्ट्र से भगाने की बात गई थी तो लालू यादव ने राज ठाकरे पर सख्त एक्शन लेने की चेतावनी दी थी. उन्होंने तब यह भी आह्वान किया था कि अगर ठाकरे के ऊपर 15 दिनों के अंदर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो सभी बिहारी सांसदों को इस्तीफा दे देना चाहिए. जाहिर है लालू प्रसाद यादव की पहचान बिहारियों के मान-सम्मान के रक्षक के तौर पर बन गई थी, पर ममता बनर्जी द्वारा यूपी-बिहार के लोगों या फिर गैर बंगालियों को गुंडा कहे जाने पर तेजस्वी की खामोशी सवालों के घेरे में है.

तेजस्वी की खामोशी का बिहार में भी होगा असर!

भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा कहते हैं, 'ममता बनर्जी ने बिहार का ही नहीं बंगाल का और अपने पूर्वजों का भी अपमान किया है. ममता बनर्जी के पूर्वज भी उतने ही बिहारी थे, जितने कि हमारे पूर्वज थे.' उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी क्षेत्र और प्रांत के नाम पर वैमनस्य फैलाने का जो काम कर रही हैं, उससे उन्हें कोई फायदा नहीं होगा. ममता बनर्जी द्वारा लगातार बिहार का अपमान किया जा रहा है, सभी बिहारियों को गुंडा कहा जा रहा है, लेकिन लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव की चुप्पी बिहारी जनमानस को गहरी चोट पहुंचा रहा है.
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