लाइव टीवी
Elec-widget

बिहार की सियासत में 'नूरा-कुश्ती' खेल रही BJP-JDU का क्या है गेम प्लान? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

News18 Bihar
Updated: October 10, 2019, 4:58 PM IST
बिहार की सियासत में 'नूरा-कुश्ती' खेल रही BJP-JDU का क्या है गेम प्लान? पढ़ें इनसाइड स्टोरी
बिहार में बीजेपी में इस समय कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो नीतीश कुमार के विकल्प बन सके. (फाइल फोटो)

बीजेपी-जेडीयू नेताओं ने ये बयान जारी कर कहा कि एनडीए में सब ठीक है और 2020 का चुनाव साथ ही लड़ेंगे. इससे यह भी जाहिर हो गया कि भले ही दोनों दलों के नेता नूरा-कुश्ती में उलझे रहें, लेकिन ये गठबंधन दूर-दूर, पास-पास वाली राजनीति के आसरे आगे बढ़ती रहेगी.

  • Share this:
पटना. लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में बिहार (Bihar) में एनडीए गठबंधन (NDA Alliance) ने 40 में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की तो जनता ने अपना स्पष्ट मत देकर बता दिया कि वो राज्य में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जोड़ी को ही पसंद करती है. हालांकि इस टर्म में जेडीयू-बीजेपी (JDU-BJP) की दोस्ती में 'अविश्वास की छाया' कई बार दिखी है जो समय-समय पर बिहार की राजनीति को गरमाती रही है. बीते मई महीने में मोदी-2 मंत्रिपरिषद के विस्तार के बाद दोनों दलों के बीच खाई चौड़ी हुई है. इसके बाद आरएसएस (RSS) नेताओं की निगरानी करने के प्रकरण ने इस अविश्वास को और गहरा कर दिया. फिर प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लिए प्रचार की इजाजत देकर सीएम नीतीश कुमार ने जेडीयू की रणनीति का भी एक हद तक खुलासा कर दिया.

दोनों ही दल एक-दूसरे की मजबूरी, गठबंधन तोड़ने की कोई प्लानिंग नहीं 

वहीं, पटना में बाढ़ और जलजमाव के बीच बीजेपी नेताओं के जोरदार हमलों (विशेष तौर पर गिरिराज सिंह और सच्चिदानंद राय जैसे नेताओं के हमले) से आहत जेडीयू ने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से दखल की मांग की. जिसके बाद बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपने नेताओं को नसीहत दी, तो साफ जाहिर हो गया दोनों ही दल एक-दूसरे की मजबूरी हैं और गठबंधन तोड़ने की कोई प्लानिंग नहीं चल रही है.

Rss leader and Nitish Kumar
बिहार दौरे के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की नीतीश कुमार से हुई इस मुलाकात के कई मायने लगाए जा रहे हैं (फाइल फोटो)


बुधवार और गुरुवार को जब बीजेपी-जेडीयू नेताओं ने ये बयान जारी कर कहा कि एनडीए में सब ठीक है और वर्ष 2020 में होने वाला चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे. इससे यह भी जाहिर हो गया कि भले ही दोनों दलों के नेता नूरा-कुश्ती में उलझे रहें, लेकिन ये गठबंधन दूर-दूर, पास-पास वाली राजनीति के आसरे आगे बढ़ती रहेगी.

पहले 17 वर्षों तक साथ रहे जेडीयू-बीजेपी और अब दो वर्ष से फिर से बीजेपी के साथी बने जेडीयू की राजनीति इसी धारा पर चलती रही है. ये दोनों दल फिलहाल दूर-दूर, पास-पास वाली स्थिति में सत्ता में भी बने हुए हैं. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि दोनों ही पार्टियों को इस राजनीति का फायदा मिलता रहा है.

बीजेपी अकेले वजूद बनाने की जद्दोजहद में, जेडीयू अपने लिए बाहर भविष्य तलाशने में 
Loading...

दरअसल बीजेपी बिहार में अकेले अपना वजूद बनाने की जद्दोजहद में है, वहीं जेडीयू अपने लिए बिहार से बाहर भी भविष्य तलाशने में लगी है. जेडीयू ने तीन तलाक प्रकरण में संसद में एनडीए सरकार के बिल का विरोध किया. NRC, 35A और धारा 370 के मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन नहीं कर उसने अपनी रणनीति भी बता दी.

इसी तरह जेडीयू ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. अरुणाचल प्रदेश में भी उनके प्रत्याशियों ने अच्छी जीत दर्ज की थी. इसी तरह ममता बनर्जी के लिए प्रशांत किशोर को रणनीति बनाने की परमिशन देकर जेडीयू ने अपनी रणनीति भी जाहिर कर दी है कि वो भी एक विकल्प खोले रखना चाहते हैं.

Nitish kumar
2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू एक बार फिर PK को रणनीतिक मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है (फाइल फोटो)


बीते 8 अक्टूबर को दशहरा पर जब पटना में रावण दहन कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत बीजेपी के किसी नेता ने शिरकत नहीं की तो सीएम नीतीश कुमार ने तत्काल ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को अपने साथ लाकर यह बता दिया कि अगर बीजेपी की ओर से कोई ऐसा कदम उठाया जाता है जिससे गठबंधन पर खतरा हो, तो वो भी इसके लिए तैयार हैं.

वहीं, बीजेपी की रणनीति भी जाहिर है. एनआरसी जैसे मुद्दे को बार-बार उठा रही बीजेपी ने भी साफ कर दिया है कि वो भी अपने मुद्दों से समझौता नहीं करने जा रही. इसी तरह जेडीयू की ओर से तमाम दबाव देने के बाद भी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इस्तीफा नहीं देने पर बीजेपी अड़ी रही, और उसकी ही चली भी.

विभिन्न मुद्दों पर अलग मत होने के बावजूद बीजेपी-जेडीयू के बीच एक आम सहमति  

जेडीयू के विरोध के बावजूद तीन तलाक और धारा 370 जैसे कोर मुद्दों के आसरे बीजेपी अपने वोट बैंक को जहां एड्रेस करती रही है, वहीं जेडीयू के लिए असहज स्थिति भी उत्पन्न करती रही है. हालांकि धारा 370, 35 ए और ट्रिपल तलाक जैसे विभिन्न मुद्दों पर अलग मत होने के बावजूद बीजेपी-जेडीयू के बीच एक आम सहमति सी है कि आप अपने स्टैंड पर रहें और हम अपने मुद्दों पर. यह स्थिति दोनों ही ओर से है और एक दूसरे पर किसी तरह का दबाव भी नहीं डाला जाता है.

CM nitish with Congress precedent
दशहरा के दिन पटना के गांधी मैदान में रावण वध कार्यक्रम के दौरान मंच पर CM नीतीश कुमार के बगल में कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष मदन मोहन झा बैठे, लेकिन बीजेपी के किसी नेता ने इसमें शिरकत नहीं की


जाहिर है किसी भी गठबंधन के सत्ता में बने रहने के लिए यह एक अनुकूल स्थिति है. यह बात हाल के पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के मंत्रिपरिषद की शपथ में भी दिखी. मंत्रिपरिषद से अलग रहने के जेडीयू के निर्णय पर न तो बीजेपी ने ज्यादा टिप्पणी की और न ही बिहार में जेडीयू के अपने कोटे से आठ मंत्री बनाए जाने और बीजेपी को छोड़ देने पर कोई कड़वाहट दिखी.

दरअसल अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों ही पार्टियां (बीजेपी और जेडीयू) अपनी रणनीति बना रही हैं. इसमें बड़ा भाई कौन होगा इसको लेकर अभी बात होनी है. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार पहले से ऐसा माहौल बनाए रखना चाहते हैं कि बीजेपी को हमेशा ये लगे कि इनका साथ हमारे लिए जरूरी है. ऐसे में सीटों की बारगेनिंग (मोल भाव) पर इसका असर हो सकता है.

बिहार में बाढ़ और जलजमाव पर हो रही सियासत के बीच बीजेपी और जेडीयू के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है (पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की फाइल फोटो)


बीजेपी के साथ रहने के बाद भी उससे दूरी बनाए रखने की राजनीति

दरअसल नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा ही बीजेपी के साथ रहने के बाद भी उससे दूरी बनाए रखने की रही है. यह सिलसिला आज से नहीं बल्कि वर्ष 1996 से चला आ रहा है. हाल में संसद में धारा 370 के खिलाफ वोटिंग के समय उनकी पार्टी का बायकॉट करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है. दरअसल यह उस बात का भी संकेत है कि आने वाले समय में अगर राजनीति में कुछ परिवर्तन हो तो नीतीश के लिए किसी भी तरह से असहज स्थिति न हो.

ये भी पढ़ें- 

उपचुनाव में तार-तार हुई महागठबंधन की एकता! क्या करेंगे मांझी, कुशवाहा और सहनी?

बिहार के इस जिले में 'गायब' हो गए 34 सरकारी कार्यालय! ढूंढने के लिए आदेश जारी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 10, 2019, 4:06 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com