OPINION: आखिर क्या है उपेंद्र कुशवाहा की कशमकश !

पटना-दिल्ली-पटना-दिल्ली की लगातार दौड़... और हर यात्रा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस. अलग होने की धमकी के साथ नई तारीख का एलान. उपेंद्र कुशवाहा आजकल अपनी इसी रणनीति के साथ नई चालें चल रहे हैं.

News18 Bihar
Updated: December 7, 2018, 6:27 PM IST
OPINION: आखिर क्या है उपेंद्र कुशवाहा की कशमकश !
उपेंद्र कुशवाहा (फाइल फोटो)
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Updated: December 7, 2018, 6:27 PM IST
उपेंद्र कुशवाहा के द्वंद्व ने आज उन्हें मझधार में लाकर खड़ा कर दिया है. न तो एनडीए से उनका मोह भंग हो रहा है, और ना ही महागठबंधन में उन्हें लेकर कोई उत्साह दिख रहा है. कुशवाहा एक तरफ नीतीश पर हमलावर हैं तो दूसरी तरफ एनडीए से अलग होने के एलान से भी बच रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की यह राजनीति क्या उनके मंसूबो को पूरा कर पाएगी या फिर इस खेल में कुशवाहा खुद फंसकर रह जाएंगे.

पटना-दिल्ली-पटना-दिल्ली की लगातार दौड़... और हर यात्रा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस. अलग होने की धमकी के साथ नई तारीख का एलान. उपेंद्र कुशवाहा आजकल अपनी इसी रणनीति के साथ नई चालें चल रहे हैं. मगर कुशवाहा आज खुद अपनी रणनीतियों के भंवर जाल में फंसते दिख रहे हैं. ना एनडीए में सहज हैं और न ही महागठबंधन के खेमे में उन्हें महत्व मिल रहा है.

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कुशवाहा के तमाम दावों और अल्टीमेटम के बाद भी उनका एनडीए नहीं छोड़ना उनकी दुविधापूर्ण स्थिति को बयां करने के लिए काफी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर खुलकर हमले के बाद ये तो साफ हो गया कि दो तलवारें एक मयान में नहीं रह सकती हैं. वही कांग्रेस ने महागठबंधन में सीएम की वेकेंसी खाली नहीं होने की बात कहकर रही-सही कसर भी निकाल दी है.

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दूसरी ओर कुशवाहा को अपनी ही पार्टी में समर्थन नहीं मिल रहा है. 06 दिसंबर को मोतिहारी के खुले अधिवेशन में जिस तरह से उनकी पार्टी के सांसद रामकुमार शर्मा, दोनों विधायक, सुधांशु शेखर और ललन पासवान और रालोसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भगवान सिंह कुशवाहा की गैरमौजदूगी ने उनकी पेसानी बर जरूर बल ला दिया था. शायद यही कारण रहा कि वे एनडीए से अलग होने की बात भी नहीं कह पाए.

पार्टी सूत्रों की मानें तो एनडीए से अलग होने से पहले उपेंद्र कुशवाहा कांग्रेस का साथी बनने की नीति पर चल रहे हैं. कुशवाहा की कोशिश है कि कांग्रेस के समर्थन से महागठबंधन में शामिल हुआ जाए ताकि सीट की बारगेनिंग ज्यादा से ज्यादा की जा सके. हालांकि स्थिति तब ही साफ हो सकेगी जब उनकी मुलाकात राहुल गांधी से हो सकेगी.
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रिपोर्ट- रवि एस नारायण

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