'सुशासन-बाबू' की इमेज बनाए रखनी है तो CM नीतीश कुमार को करने होंगे ये 5 काम

बिहार में सातवीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता हैं.
बिहार में सातवीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता हैं.

बिहार में सातवीं बार मुख्यमंत्री पद के रूप में शपथ लेने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सामने हैं कई चुनौतियां. चुनावी वादों को जमीन पर नई सरकार कितना उतार पाती है, इस पर विपक्षी दलों के साथ-साथ जनता की भी रहेगी नजर.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 20, 2020, 1:01 AM IST
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के अंतिम चरण के प्रचार की समाप्ति से पहले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का भाषण 'अंत भला तो सब भला' काफी चर्चित रहा था. चुनाव के दौरान सत्ताविरोधी लहर के तमाम दावों के बावजूद नीतीश ने सातवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी तक अपनी पहुंच मुकम्मल कर के दिखाई. इसके साथ ही यह चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं कि सुशासन पर उठ रहे सवालों के बीच इस बार नीतीश कुमार अपनी छवि और विरासत को चमकदार दिखाने के लिए कौन सी रणनीति अपनाएंगे. खासकर बिहार को विकास के पथ पर ले जाने के उनके दावों पर इस बार विपक्षी दलों (Mahagathbandhan) के साथ-साथ जनता भी पैनी नजर बनाए रखेगी. बेरोजगारी, पलायन, अर्थव्यवस्था, उद्योग जैसे मुद्दे उठाकर चुनाव में पहले ही उनकी सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुका है. ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों में नीतीश सरकार के लिए करने को बहुत कुछ है, जिसके जरिए वे अपनी सुशासन बाबू (Sushasan Babu) की छवि को बरकरार रख सकते हैं.

कोरोनाकाल में हुए बिहार चुनाव में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा. खास तौर पर लॉकडाउन के बाद देशभर से बिहार के प्रवासी कामगारों की वापसी को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और लोजपा के चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने चुनाव में जोर-शोर से उठाया. विपक्षी दलों के चुनाव घोषणा पत्र में '10 लाख रोजगार' के दावों के बाद सरकार की सहयोगी और अब सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी बीजेपी (BJP) ने भी 19 लाख रोजगार सृजन (Employement) का वादा किया है. लाजिमी है कि सरकार गठन के बाद नीतीश कुमार पर इसका दबाव दिखा है. कैबिनेट की पहली बैठक के बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभिन्न विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगा है ताकि इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरा जा सके. ये संकेत है कि इस बार की नीतीश सरकार अपने चुनावी वादों पर तत्काल अमल के लिए गंभीर है.





बहरहाल, अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में छपे एक आलेख की मानें तो नीतीश कुमार के लिए यह कार्यकाल चुनौती भरा है. पिछली सरकार में उनकी सरकार जनता से किए गए सभी वादों पर खरी नहीं उतरी, इसका उन्हें भी भान है. ऐसे में अगर इस कार्यकाल में वे अपने चुनावी वादों को पूरा करते हैं, तो बिहार उन्हें एक बेहतरीन नेता के रूप में हमेशा याद रखेगा. इकोनॉमिक टाइम्स लिखता है कि बिहार स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन जैसे क्षेत्र में अब भी देश के कई राज्यों के मुकाबले पिछड़ा है. इसलिए नीतीश कुमार के लिए यह कार्यकाल एक बेहतरीन मौका है जिसमें वे साबित कर सकते हैं कि बिहार में सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने अतीत के नेताओं की बनिस्पत प्रदेश की ज्यादा सेवा की है. अखबार के मुताबिक आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) की स्थापना, फिल्म सिटी, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र में करने के लिए बहुत कुछ है, जिसे यह सरकार अपनी प्राथमिकता की सूची में रख सकती है.
SEZ से आ सकती है बहार इकोनॉमिक टाइम्स के आलेख के मुताबिक बिहार के कई प्रवासी विदेशों में रहते हैं, जिन्हें राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. सरकार अगर स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाकर उद्योग संबंधी निवेश को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़े, तो ये NRI काफी मददगार साबित हो सकते हैं. उद्योगों के जरिए आने वाले बड़े निवेश से न सिर्फ बिहार की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन होगा. ये जरूर है कि इन NRI निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए ब्यूरोक्रेसी यानी अफसरशाही पर जरूर लगाम कसनी होगी.
बिहारी प्रतिभा को दें पहचान पूरे देश में बिहार के लोग अपनी मेहनत के बलबूते पर जाने-पहचाने जाते हैं. बिहार सरकार को इस मानव-बल की ओर ध्यान देना होगा. प्रदेश में जिलावार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर युवाओं को इससे जोड़ना होगा, ताकि स्वरोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आ सके. प्रशिक्षित युवाओं को छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बैंक-लोन दिलाकर यह काम आसानी से किया जा सकता है. इससे पलायन की समस्या पर भी विराम लग सकता है.
पर्यटन से आएगी समृद्धि बिहार में पर्यटन के नाम पर गया, नालंदा, भागलपुर का विक्रमशिला, पश्चिमी चंपारण का वाल्मिकीनगर टाइगर रिजर्व जैसे इलाके मशहूर हैं. लेकिन प्रदेश के अधिकतर जिले अब भी पर्यटन मानचित्र पर नहीं आ सके हैं. अपने इस कार्यकाल में नीतीश कुमार इस अनछुए क्षेत्र के विकास पर ध्यान दें तो यह न सिर्फ हजारों युवाओं को रोजगार देगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा.
मनोरंजन उद्योग से रोजगार भोजपुरी सिनेमा के उत्थान के पहले से ही बिहार की प्रतिभाएं मुंबई जाकर वहां अपने अभिनय का लोहा मनवाती रही हैं. हाल के वर्षों में भोजपुरी सिनेमा भी कमाई देने वाले उद्योग के रूप में सामने आया है. जरूरत है कि बिहार में इसके लिए और भी अवसर मुहैया कराए जाएं. अगर क्षेत्रीय सिनेमा के विकास के लिए नीतीश सरकार फिल्म सिटी की स्थापना की ओर कदम बढ़ाए, तो मनोरंजन उद्योग सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है.
शिक्षा में जरूरी है सुधार बिहार में जिस क्षेत्र में सबसे अधिक और त्वरित गति से सुधार की आवश्यकता है, वह है शिक्षा का क्षेत्र. शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत की वजह से ही हर साल 10वीं और 12वीं की परीक्षा के बाद हजारों छात्र-छात्राएं कोटा, दिल्ली या अन्य शहरों की ओर रुख करते हैं. प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद, इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित सत्र का न चलना जैसी कई समस्याएं हैं, जिनका तत्काल समाधान होना जरूरी है. शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार न सिर्फ वक्त की जरूरत है, बल्कि नीतीश कुमार की सरकार के प्रति जनता का भरोसा बना रहे, इसके लिए भी आवश्यक है.
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