पटना के 160 साल पुराने इस ऐतिहासिक भवन को बचाने के लिए क्यों लामबंद हो रहे हैं इतिहासकार?

इतिहासकारों का कहना है कि सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारत ‘शहर का गौरव’ और ‘जीवंत धरोहर’ है. (सांकेतिक फोटो)
इतिहासकारों का कहना है कि सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारत ‘शहर का गौरव’ और ‘जीवंत धरोहर’ है. (सांकेतिक फोटो)

इतिहासकारों (Historians) ने यह भी चेताया कि पटना कलेक्ट्रेट भवन (Patna Collectorate Bhawan) को गिराने से ‘बड़ा नुकसान’ होगा और शहर के इतिहास की निरंतरता में अंतराल आएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2020, 8:49 PM IST
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पटना. पटना कलेक्ट्रेट भवन (Patna Collectorate Bhawan) को बचाने के लिए अब पटना विश्वविद्यालय (Patna University) के इतिहासकारों (Historians) ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है. इतिहासकारों का कहना है कि सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारत ‘शहर का गौरव’ और ‘जीवंत धरोहर’ है और इसे बचाकर अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जाना चाहिए. इतिहासकारों ने यह भी चेताया कि पटना कलेक्ट्रेट भवन को गिराने से ‘बड़ा नुकसान’ होगा और शहर के इतिहास की निरंतरता में अंतराल आएगा. पटना के 103 साल पुराने विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के वर्तमान और पूर्व प्रमुखों, अन्य विद्वानों, मौजूदा कुलपति और उनसे पूर्व रहे कुलपति ने बिहार सरकार से ऐतिहासिक इमारत को नहीं गिराने की अपील की है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस भवन को गिराने से फिलहाल रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर एक याचिका पर बिहार सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है.

कलेक्ट्रेट हमारी जीवंत धरोहर है-इतिहासकार
इतिहास विभाग के प्रमुख सुरेंद्र कुमार कहते हैं, ‘कलेक्ट्रेट हमारी जीवंत धरोहर है. हमारा जीवंत इतिहास है और इसे निश्चित रूप से बचाया जाना चाहिए. इस बारे में दो राय नहीं हैं. दरअसल कलेक्ट्रेट क्टोरेट भवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि पटना 17वीं सदी में भी फलता-फूलता नदी किनारे बसा शहर था और अंग्रेजों के पहुंचने से पहले ही डच, डेनिश तथा अन्य विदेशियों का पसंदीदा गंतव्य था. ये इमारतें शहर के गौरवपूर्ण कालखंड की साक्षी रही हैं.'

क्या कहना है इतिहासकारों का
इतिहास विभाग की पूर्व प्रमुख भारती कुमार ने कहा कि कलेक्ट्रेट भवन डच और ब्रिटिश काल से है और यह 1857 से जिला प्रशासन का केंद्र रहा है जिस समय पटना बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा हुआ करता था. इसलिए कलेक्ट्रेट के रूप में इसका 160 साल से ज्यादा पुराना इतिहास रहा है. इसने 1912 में बिहार प्रांत की स्थापना से लेकर दो विश्व युद्धों, देश की आजादी तक इतिहास के पलटते पन्नों को देखा है. यह शहर के विकासक्रम का हिस्सा रहा है. कलेक्ट्रेट भवन को बचाना जरूरी है ताकि बिना किसी पूर्वाग्रह के इतिहास की निरंतरता को संरक्षित रखा जा सके.’



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पटना विश्वविद्यालय के कुलपति जी के चौधरी ने कहा, ‘इसे पटना के ऐतिहासिक वास्तुशिल्प के रूप में संरक्षित रखा जाना चाहिए जिससे अनेक पीढ़ियों की स्मृतियां जुड़ी हैं.' लॉकडाउन के दौरान सेवानिवृत्त हुए पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आरबीपी सिंह ने कलेक्ट्रेट को ‘पटना का गौरव’ बताते हुए कहा कि इस ‘शिल्प सौंदर्य’ को बचाया जाना चाहिए.'

(भाषा)
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