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बिहार के 'सियासी सीन' से क्यों 'गायब' होते जा रहे हैं ये तीन लीडर?

News18 Bihar
Updated: October 16, 2019, 10:18 AM IST
बिहार के 'सियासी सीन' से क्यों 'गायब' होते जा रहे हैं ये तीन लीडर?
बिहार उपचुनाव में तार-तार हुई महागठबंधन की एकता! क्या करेंगे जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी?

ये वही नेता हैं जो लोक सभा चुनाव से पहले महागठबंधन के लिए मास्टरस्ट्रोक माने जा रहे थे क्योंकि इन्होंने एनडीए छोड़ महागठबंधन का दामन थाम लिया था. आखिर ऐसा क्या हुआ जो ये तीनों ही नेता अब हाशिये पर चले गए हैं?

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पटना. बिहार में 5 विधान सभा और एक लोक सभा की सीट पर उपचुनाव (By election) हो रहे हैं और 21 अक्टूबर को इसके लिए वोटिंग होने जा रही है. इलेक्शन कैंपेन में महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) काफी सक्रिय हैं क्योंकि 5 में से 4 असेंबली सीटों पर उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार खड़े हैं. कांग्रेस (Congress) भी एक विधान सभा और समस्तीपुर लोक सभा सीट पर चुनावी संघर्ष में टक्कर दे रही है और उनके नेता भी काफी एक्टिव दिख रहे हैं. लेकिन, इन सब के बीच महागठबंधन के ही तीन नेता हाशिये पर खड़े दिख रहे हैं. हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha)और विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) कहीं सीन में भी नजर नहीं आ रहे हैं.



गौरतलब है कि ये वही नेता हैं जो लोक सभा चुनाव से पहले महागठबंधन के लिए मास्टरस्ट्रोक माने जा रहे थे क्योंकि इन्होंने एनडीए छोड़ महागठबंधन का दामन थाम लिया था. आखिर ऐसा क्या हुआ जो ये तीनों ही नेता अब हाशिये पर चले गए हैं?



बता दें कि 2015 के बिहार विधान सभा चुनाव में बड़ी पूछ थी. एनडीए ने इन्हें अपने पाले में कर महागठबंधन को झटका देने की कोशिश की थी. हालांकि इन तीनों के साथ के बावजूद एनडीए को ज़बरदस्त झटका लगा और करारी शिकस्त हुई थी.



बिहार उपचुनाव/महागठबंधन
बिहार में बने महागठबंधन के नेताओं की फाइल फोटो.



इसके बाद एक-एक करके ये इन तीनों नेताओं का एनडीए से और एनडीए का इन तीनों नेताओं से मोहभंग हो गया. इन नेताओं ने भी अपनी पूछ कम होती देख लोक सभा चुनाव के पहले पाला बदला और महागठबंधन के साथ हो गए. लेकिन, यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ. इन तीनों नेताओं के साथ के बावजूद महागठबंधन लोक सभा चुनाव में धराशायी हो गया.


जाहिर है इसके बाद इन तीनों नेताओं की महागठबंधन में भी वह पूछ नहीं रही. इसके बाद इन्होंने भी तेवर दिखाने की कोशिश की. 2020 चुनाव की तैयारी करने लगे और अधिकाधिक सीटों पर दावेदारी ठोकने लगे. हालांकि यहां तेवर तेजस्वी यादव ने दिखा दिए. विधान सभा और लोक सभा उपचुनाव में इन तीनों ही दलों को एक भी सीट नहीं दी.


इस उपेक्षा के बावजूद उपेन्द्र कुशवाहा तो चुप रहे, लेकिन मांझी और मुकेश सहनी ने खुल कर तेजस्वी यादव पर मनमानी करने का आरोप लगा दिया. मांझी ने तो नाथनगर से अपने उम्मीदवार भी मैदान में उतार दिए हैं. बावजूद इसके इन्हें तवज्जो नहीं मिली. खबर तो ये भी आई कि ये नेता आरजेडी और कांग्रेस इन तीनों नेताओं को अब अधिक भाव नहीं देगी.




महागठबंधन
फाइल फोटो



राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी इन तीनों नेताओं को इशारों में उनकी हैसियत बता रहे हैं.  वे कहते हैं कि  जितना मान सम्मान इन्हें महागठबंधन में मिला उसके बावजूद राजद के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतार कर इन्होंने राजनीतिक मर्यादा भंग की है.


हालांकि हाल में राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर हाल में ही महागठबंधन में शामिल दलों के नेता एक मंच पर इकट्ठा हुए थे, लेकिन वहां भी रिश्तों में गर्माहट का अभाव ही दिखा. अलबत्ता मांझी की पार्टी के प्रवक्ता विजय यादव आरोप लगाते है की तेजस्वी यादव बीजेपी से मिल कर महागठबंधन को कमज़ोर कर रहे हैं.



वहीं, इन नेताओं की सियासी स्थिति को देखते हुए जेडीयू तंज कस रही है. पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह कहते हैं कि तीनों नेता राजनीतिक रूप से किसी भी सगे नहीं है. न नीतीश कुमार के और न ही लालू यादव के.  यही कारण है कि बिहार की राजनीति में अब ये लोग अप्रासंगिक होने लगे हैं.



रिपोर्ट- आनंद अमृतराज


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First published: October 16, 2019, 8:51 AM IST
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