तेजप्रताप यादव के तेवर क्यों पड़ गए ठंडे? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

News18 Bihar
Updated: September 9, 2019, 8:30 AM IST
तेजप्रताप यादव के तेवर क्यों पड़ गए ठंडे? पढ़ें इनसाइड स्टोरी
राजनीतिक जानकारों की राय में तेजप्रताप यादव का राजनीतिक करियर दांव पर है. (फाइल फोटो)

RJD में तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) का कद और बढ़ गया है. ऐसे में पार्टी के बड़े नेता हों या फिर कार्यकर्ता, हर कोई तेजप्रताप यादव से दूरी बनाने लगा है.

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पटना. क्या लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव का राजनीतिक करियर (Political Carrier) दांव पर है? क्या अपनी ही पार्टी में तेजप्रताप (Tejpratap Yadav) अलग-थलग पड़ने लगे हैं? क्या तेजप्रताप के तेवर अब ठंडे पड़ने लगे हैंं?  क्या तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के पीछे-पीछे चलना तेजप्रताप की मजबूरी बन गई है? क्या वाकई पॉलिटिकल क्राइसिस (Political Crisis) से जूझ रहे हैं तेजप्रताप यादव? दरअसल, ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि एक वक्त सब पर अपनी धौंस जमाने वाले तेजप्रताप यादव इन दिनों शांत (Cool) पड़ गए हैं.

तेजस्वी के पिछलग्गू बनने को मजबूर हुए तेजप्रताप!
कभी खुद को कृष्ण बताकर तेजस्वी के सारथी बनने का दावा करने वाले तेजप्रताप आज उसी अर्जुन के पिछलग्गू बनने की राह पर हैं. हाल के दिनों में जिस तरह से तेजप्रताप पार्टी की गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं और पार्टी में तेजस्वी का कद और बढ़ गया है. पार्टी के बड़े नेता हों या फिर कार्यकर्ता, हर कोई तेजप्रताप यादव से दूरी बनाने में लगा है.

Tejpratap Yadav
तेजप्रताप यादव पार्टी में कमजोर पड़ते जा रहे हैं. (File Photo)


तेजप्रताप को भी है बदले हालात का अहसास
ऐसा नहीं है कि तेजप्रताप को इस बात का अहसास नहीं है. वह भी बखूबी इस सच्चाई को समझते हैं. शायद यही कारण है कि पिछले कुछ मौकों पर तेजप्रताप अपने छोटे भाई तेजस्वी के पीछे-पीछे चले आते हैं.

तेजस्वी का साथ देने को मजबूर हुए तेजप्रताप
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चाहे दूध मंडी के ध्वस्त होने के बाद रात भर सड़क पर धरना देने की बात हो, या फिर पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान को सफल बनाने की मुहिम, तेजप्रताप बिना कुछ कहे ही तेजस्वी के साथ खड़े हो गए.

Tejpratap Yadav, Tejaswi Yadav
पटना स्थित पोलो रोड पर तेजस्वी यादव के नए सरकारी आवास के गृहप्रवेश में उनके बड़े भाई तेजप्रताप पहुंचे थे. (फाइल फोटो)


मजबूरी में नरम पड़े तेजप्रताप
एक समय ऐसा भी था जब तेजस्वी के चुने गए प्रत्याशी के खिलाफ तेजप्रताप ने डंके की चोट पर न सिर्फ अपना उम्मीदवार उतारा था, बल्कि लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी के खिलाफ हुंकार भी भरी थी. लेकिन, आज हालात बदले हैं तो तेजप्रताप भी नरम पड़ गए हैं.

तेजप्रताप को कार्रवाई का डर
राजनीतिक जानकारों की राय में जब से सियासी हलकों में तेजस्वी को राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने और उसके बाद तेजप्रताप पर कार्रवाई करने की चर्चा शुरू हुई है. सियासी गलियारों में तो यह भी चर्चा है कि अगर तेजस्वी पावरफुल होते हैं और उनके खिलाफ कोई एक्शन लिया जाता है तो उनका राजनीतिक भविष्य चौपट हो जाएगा. जाहिर है तेजप्रताप को यह डर सताने लगा है.

हालांकि, विरोधी अब भी तेजप्रताप को उकसाने में लगे हैं. दरअसल, तेजप्रताप का कमजोर होना और तेजस्वी का सशक्त होकर उभरना, विरोधियों के लिए तो अच्छे संकेत कतई नहीं हैं. विरोधी पार्टियां हरगिज़ नहीं चाहतीं कि दोनों भाइयों में कोई सुलह हो.

रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह

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First published: September 9, 2019, 8:12 AM IST
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