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'छोटे सरकार' पर इतने दिनों तक क्यों थी 'सरकार' की अनंत कृपा?

अनंत सिंह के सरेंडर पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है.

अनंत सिंह के सरेंडर पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है.

लोगों के बीच 'छोटे सरकार' ('Chhote Sarkar') के नाम से मशहूर मोकामा (Mokama) के निर्दलीय विधायक (Independent Mla in Bihar) अनंत सिंह(Anant singh) इन दिनों फिर से चर्चा में हैं. घोड़ा, हाथी के साथ-साथ अजगर सांप पालने से लेकर मर्सिडीज और बग्घी तक की सवारी करने वाले अनंत सिंह अब किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं.

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लोगों के बीच 'छोटे सरकार' ('Chhote Sarkar') के नाम से मशहूर मोकामा (Mokama) से निर्दलीय विधायक (Independent Mla in Bihar) अनंत सिंह (Anant singh) इन दिनों फिर से चर्चा में हैं. घोड़ा, हाथी के साथ-साथ अजगर सांप पालने से लेकर मर्सिडीज और बग्घी तक की सवारी करने वाले अनंत सिंह अब किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं. अनंत सिंह पर आर्म्स एक्ट (Arms Act), अनलॉफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (UAPA) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.  अनंत सिंह के पैतृक आवास से बीते शुक्रवार को छापेमारी के दौरान एक एके-47 राइफल के साथ ही बड़ी मात्रा में गोलियां और विस्फोटक सामग्री बरामद हुईं हैं.

कई संगीन आरोप पहले भी लग चुके हैं
अनंत सिंह पर हत्या, अपहरण, फिरौती और डकैती के न जाने कितने मामले दर्ज हैं. ऐसा पहली बार नहीं है कि अनंत सिंह गिरफ्तार होंगे. पहले भी कई बार अनंत सिंह संगीन अपराध के आरोप में जेल जा चुके हैं. कानून की किताब में शायद ही कोई ऐसी धारा बची हो जिसके तहत अनंत सिंह पर केस दर्ज नहीं हुआ हो. वर्ष 2005 के आस-पास अनंत सिंह का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें वे एक महफिल में एके-47 के साथ नाचते और फायरिंग करते नजर आए थे. उस वक्त भी अनंत सिंह को लेकर काफी विवाद हुआ था, लेकिन कहा जाता है कि नीतीश कुमार की नजदीकी के कारण अनंत सिंह बच गए थे.

अनंत सिंह पर हत्या, अपहरण, फिरौती और डकैती के न जाने कितने मामले दर्ज हैं.


बीते शुक्रवार को अनंत सिंह के घर से एके- 47 (AK-47) राइफल मिलने के बाद उनका जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है. अनंत सिंह के घर से राइफल, हैंड ग्रेनेड और 26 राउंड गोलियां बरामद हुई हैं. जबकि, इस घटना पर अनंत सिंह का कहना है कि मुंगेर के मौजूदा जेडीयू सांसद ललन सिंह के इशारे पर उन्हें फंसाया गया है और अब कोर्ट से ही उन्हें न्याय मिलेगा.

कभी नीतीश कुमार के करीबी थे!
बिहार को करीब से जानने वाले एक पत्रकार न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘बिहार में राजनीति और अपराध एक-दूसरे का पर्याय बन चुके हैं. जब जरूरत पड़ती है राजनीतिक दल अपराधियों का इस्तेमाल करते हैं और जब राजनीतिक दलों को लगता है कि पानी सर से काफी ऊपर बहने लगा है तो उसको मक्खी की तरह निकाल कर बाहर भी फेंक देते हैं. अनंत सिंह के साथ भी आजकल यही हो रहा है. आखिर क्या वजह है कि कभी नीतीश कुमार के दुलारे कहे जाने वाले अनंत सिंह आज नीतीश कुमार के जानी दुश्मन बन गए हैं?’

बिहार में हाल के वर्षों तक बाहुबलियों और दबंगों की ओट में नेता वोट से अपनी झोली भरते आ रहे हैं.


बड़े भाई की मौत के बाद अनंत सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा
बिहार में हाल के वर्षों तक बाहुबलियों और दबंगों की ओट में नेता वोट से अपनी झोली भरते आ रहे हैं. बिहार में कहा जाता है कि जिसके पास जितना बड़ा बाहुबल होता, वो चुनाव में उतना ही सफल माना जाता है. अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह भी कभी आरजेडी के टिकट पर विधायक और मंत्री बने थे. दिलीप सिंह भी अनंत सिंह की तरह ही अपराध की दुनियां का एक जाना-पहचाना नाम हुआ करता था. दिलीप सिंह की राजनीति में आने पर अनंत सिंह भाई के लिए जुर्म और अपराध किया करते. बड़े भाई की मौत के बाद अनंत सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा और जेडीयू जैसी राजनीतिक पार्टियां ने एक अपराधी प्रवृति वाले आदमी को अपनी जमीन मुहैया कराई.

2015 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह बागी हो गए
एक वरिष्ठ पत्रकार न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में साफ कहते हैं कि हाल के वर्षों तक अनंत सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजदीकी किसी से छुपी नहीं है. समय-समय पर दोनों की मीडिया में आई तस्वीर भी इसी ओर इशारा भी करती है. लेकिन, 2015 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह बागी हो गए. अनंत सिंह ने मोकामा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा और जेल में रहते हुए मौजूदा सरकार के मंत्री और उस समय के जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार को हरा दिया.

अपने अंदाज में अनंत सिंह


बीते लोकसभा में हुई थी लड़ाई की शुरुआत
अनंत सिंह पिछले कुछ महीनों से लगातार आरोप लगा रहे हैं कि मुंगेर के मौजूदा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह उन्हें आपराधिक मामलों में फंसाने का षड्यंत्र रच रहे हैं. अनंत सिंह की पत्नी बीते लोकसभा चुनाव में मुंगेर संसदीय सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ी थी. एनडीए प्रत्याशी और मौजूदा सांसद ललन सिंह को इस चुनाव में अनंत सिंह से कड़ी टक्कर मिली थी. ये भी कम ताज्जुब की बात नहीं है कि इसी ललन सिंह को अनंत सिंह को राजनीति में लाने का श्रेय जाता है.

जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार और अनंत सिंह में दोस्ती की नींव 2004 लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी, जब नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे. नीतीश कुमार को इस बात का अंदाजा हो गया था कि मोकामा से निर्दलीय विधायक सूरजभान सिंह के एलजेपी में हो जाने के कारण और उनका अनंत सिंह की मदद के बिना चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. इसलिए नीतीश कुमार के लिए राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, अनंत सिंह को अपने साथ ले आए. बाढ़ संसदीय क्षेत्र में उस समय एक जनसभा का आयोजन किया गया था, जिसमें चांदी के सिक्कों से अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को तौला था.

Anant singh-Nitish Kumar
अनंत सिंह और नीतीश कुमार की ये तस्वीर इस बाहुबली के रसूख को बयां करती है.


राबड़ी के कार्यकाल में भी हुई थी छापेमारी
बता दें कि पहले भी अनंत सिंह के घर पर राबड़ी देवी के अंतिम कार्यकाल में भी छापेमारी हुई थी. इस छापेमारी के दौरान बिहार पुलिस और अनंत सिंह के बीच घंटों तक फायरिंग हुई, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय की राजनीतिक परिस्थिति में अनंत सिंह पर नीतीश कुमार और ललन सिंह का आशीर्वाद था.

फिलहाल अनंत सिंह की अनंत कथा पर विराम लगाने की पूरी कोशिश की जा रही है, जो कायदे से बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. राजनीति को करीब से समझने वाले कहते हैं कि नीतीश कुमार को अब यह भी जवाब देना चाहिए कि उनके कार्यकाल में जब पप्पू यादव, शहाबुद्दीन, आनंद मोहन, राजबल्लभ यादव, रामा सिंह न जाने ऐसे कितने दर्जनों आपराधिक प्रवृति के लोगों पर लगाम कसी गई तो अनंत सिंह पर नरमी क्यों? नीतीश कुमार को ये भी जवाब देना चाहिए कि अनंत सिंह को बाहुबली से ‘छोटे सरकार’ की रौबदार उपाधि की ओर बढ़ाने में किसका हाथ है?

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