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नागरिकता संशोधन बिल: नीतीश कुमार का फैसला मजबूरी या फिर यू टर्न, पढ़ें पूरी कहानी

Brijam Pandey | News18 Bihar
Updated: December 11, 2019, 6:01 PM IST
नागरिकता संशोधन बिल: नीतीश कुमार का फैसला मजबूरी या फिर यू टर्न, पढ़ें पूरी कहानी
नीतीश कुमार की पार्टी ने नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन किया है

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने यू-टर्न नहीं लिया है. यह नीतिगत फैसले हैं जिसे राजनीति में करना होता है.

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पटना. पहले धारा 370, (Article 370) फिर तीन तलाक (Triple Talaq) और इसके बाद अब नागरिक संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पर भी नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की हामी मिल चुकी है. इसे नीतीश कुमार का यू टर्न कहें या फिर मौके की नजाकत. बिहार की राजनीति में कुछ ऐसा ही हो रहा है. नीतीश कुमार पहले बीजेपी (BJP) के एजेंडों का विरोध करते हैं पर वक्त आने पर उसका समर्थन भी कर देते हैं. इसे नीतीश कुमार का यू टर्न कहें या फिर मौके की नजाकत. विरोधी कहते हैं कि नीतीश कुमार एक स्टैंड पर रह नहीं सकते वहीं जेडीयू (JDU) कहती है नीतीश कुमार अपनी शर्तों पर राजनीति करते हैं और इन बिलों में भी ऐसा ही कुछ हुआ है.

जेडीयू एक स्टैंड पर नहीं रहती

जब मामला आया तीन तलाक का तो नीतीश कुमार ने इसका पुरजोर विरोध किया. कहा- मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ है, उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार इस पर अड़ी रही और तीन तलाक के बिल को पास करा लिया गया. धारा 370 में भी कुछ ऐसा ही हुआ. नीतीश कुमार ने इसका भी विरोध किया, लेकिन उस विरोध को किसी ने नहीं सुना. देश में धारा 370 संशोधन बिल पास करा लिया गया. अब नागरिक संशोधन बिल में भी ऐसा ही हुआ है. पहले नीतीश कुमार ने विरोध किया अब उनकी पार्टी ने इसका समर्थन कर दिया.

विरोधी बोले

विरोधी इन फैसलों को नीतीश कुमार का यू-टर्न मानते हैं. कांग्रेस के प्रेमचंद मिश्रा कहते हैं कि यह दलबदलू लोग हैं जो एक स्टैंड पर नहीं रह सकते कभी कुछ कहते हैं. कभी कुछ कहते हैं ऐसे में इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है तभी तो इनकी पार्टी में भी इसका विरोध हो रहा है.

सहयोगी बोले

नागरिक संशोधन बिल में केंद्र सरकार को जेडीयू का पूरा सहयोग मिला है तो इससे बीजेपी काफी उत्साहित है. बीजेपी पुराने गड़े मुर्दे को उखाड़ना नहीं चाहती है. ऐसे में बीजेपी कोटे के मंत्री विनोद नारायण झा कहते हैं कि नीतीश कुमार के तरफ से इसका कोई विरोध नहीं हुआ था और उन्होंने समर्थन करके देश में नागरिकों के लिए मजबूत कदम उठाया है.अपनी शर्तों पर दिया समर्थन

जेडीयू पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी राजनैतिक दायरा बढ़ा रही है. उस क्षेत्र से कुछ विधायक भी जेडीयू से है . इस बात को लेकर जेडीयू को चिंता जरूर थी कि नागरिक संशोधन बिल में पूर्वोत्तर राज्यों में जेडीयू को नुकसान हो सकता है. जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन कहते हैं कि पूर्वोत्तर के मसलों पर उनकी पार्टी ने केंद्रीय टीम से बातचीत की. इस मसौदे को नागरिक संशोधन टीम के सामने रखा गया जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधित किया और यह बिल संशोधित होकर लोकसभा में पास हुआ है और आगे भी इस बिल को पास होना है. जब शर्तों को मान लिया गया तो फिर विरोध का कोई सवाल ही नही है.

यू-टर्न नही नीतिगत फैसला है

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय मानते हैं कि नीतीश कुमार पहले अपनी राष्ट्रीय कोर कमेटी से इन बिंदुओं पर बात करते हैं उसके बाद ही कोई फैसला लेते हैं. रवि उपाध्याय कहते हैं कि नीतीश कुमार ने यू-टर्न नहीं लिया है. यह नीतिगत फैसले हैं. जिसे राजनीति में करना होता है. और नीतीश कुमार ने राष्ट्र हित को देखते हुए इसका समर्थन किया है.

क्या बीजेपी की बी टीम है जेडीयू ?

जेडीयू चाहे लाख सफाई दे दे जो बातें पहले आती हैं उसे जनता सुनती और समझती भी है. धारा 370 , 35 ए, तीन तलाक, अब नागरिक संशोधन बिल को लेकर जेडीयू ने पहले विरोध किया, फिर समर्थन. अब जनता के सामने जेडीयू इन बातों को कैसे पहुंचाएगी या फिर जनता के सामने जेडीयू अपनी सफाई किस तरह से देगी. इसकी रणनीति जेडीयू को अलग से बनानी पड़ेगी. विरोधी यह भी कहते हैं कि जब बीजेपी के साथ जेडीयू ने गठबंधन किया है तो जेडीयू बीजेपी की बी टीम बन कर रह गई है.


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First published: December 11, 2019, 5:04 PM IST
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