'संजीवनी' की तलाश में दूधवालों के लिए अड़ गए तेजस्वी!

करीब साढ़े आठ बजे शाम से तेजस्‍वी यादव अपने लाव-लश्कर के साथ धरने पर बैठ गए. मंडली संग बैठे तेजस्वी के साथ उनके कार्यकर्ता भजन-कीर्तन करते रहे.

News18 Bihar
Updated: August 22, 2019, 8:41 AM IST
'संजीवनी' की तलाश में दूधवालों के लिए अड़ गए तेजस्वी!
पटना जंक्शन पर दूध मंडी को टूटने से बचाने के लिए धरने पर बैठे तेजस्वी यादव.
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Updated: August 22, 2019, 8:41 AM IST
लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में करारी शिकस्त के बाद से तेजस्‍वी यादव (Tejaswi Yadav) मुख्‍य धारा की राजनीति से दूर थे. इस बीच वह विधानसभा के मानसून सत्र (Monsoon Session) और आरजेडी (RJD) की महत्‍वपूर्ण बैठकों से भी दूर रहे. लेकिन, ऐसा लगता है कि अब वह लौट आए हैं. मंगलवार की देर रात पटना लौटे तेजस्वी अब जमीन की राजनीति की ओर मुड़ रहे हैं. इसका दृश्य बुधवार की देर शाम को तब दिखा जब वह पटना जंक्शन (Patna Junction) के पास बनी दूध मंडी को तोड़े जाने के खिलाफ धरने पर बैठ गए.

तेजप्रताप ने दिया तेजस्वी का साथ
करीब साढ़े आठ बजे शाम से वह अपने लाव-लश्कर के साथ धरने पर बैठ गए. मंडली संग धरने पर बैठे तेजस्वी के साथ उनके कार्यकर्ता भजन कीर्तन करते रहे. लंबे अरसे के बाद तेजस्वी धरने पर बैठे थे. इसमें उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव का भी उनको साथ मिला.

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तेजप्रताप यादव भी तेजस्वी यादव का साथ देने धरनास्थल पर पहुंचे.


इसलिए 'जमीन' पर बैठे लालू के लाल
माना जा रहा है कि तेजप्रताप-तेजस्वी को सड़क पर इसलिए बैठना पड़ा कि यहां इनके सबसे बड़े वोट बैंक (यादव समुदाय) की खास पहचान पर प्रशासन का बुलडोजर चला था. अगर यहां चूकते तो वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ता. ऐसे में लालू को विरासत को बचाने के लिए 'कृष्ण-अर्जुन' ने जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर निशाना साधा और घंटों डटे रहे.

न्यूज 18 के सवाल पर तेजस्वी का पलटवार
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हालांकि न्यूज 18 ने इस धरने के दौरान ही जब तेजस्वी से यह पूछा कि बाढ़ की तबाही और चमकी बुखार के कहर के बीच आप कहां थे? लोग आपको ढूंढ़ रहे थे. इस पर तेजस्वी मीडिया से ही सवाल कर बैठे- पीएम कहां थे? मंगल पांडे कहां थे? सूबे के मुखिया नीतीश जी कहां थे?

'गरीबों का आशियाना उजाड़ रहे सीएम नीतीश'
तेजस्‍वी यादव ने कहा, 'हमसे जो आप पूछते हैं जरा उनसे भी तो पूछिए कि लालू जी ने जिन गरीबों को बसाया, नीतीश जी एक-एक कर उन गरीबों का आशियाना क्‍यों उजाड़ रहे हैं? तेजस्वी ने आगे कहा कि खबर तो ये है कि नीतीश जी को लालू यादव और राबड़ी देवी की प्रतिमा पसंद नहीं है. हम उनके बेटे हैं, ऐसे ही छोड़ देंगे ?

वोट बैंक खोने के डर से एक हुए 'कृष्ण-अर्जुन' !
भले ही कृष्ण अर्जुन में 36 का आंकड़ा हो. परिवार में सत्ता संघर्ष चल रहा हो, लेकिन वोट बैंक के खातिर दोनों भाई इस मसले पर एक हो गए. हालांकि, घंटों मशक्कत के बाद जिला प्रशासन ने तेज-तेजस्वी को इस आश्वासन पर मना लिया कि दूध मार्केट उजड़ गया तो क्या हुआ दूसरा मार्केट बसा देंगे. इसके बाद हरिकीर्तन भी रूका और लालू के दोनों लाल अपने-अपने घर भी चले गए.

अब सवाल ये है कि इस धरने का दूध कारोबारियों को कितना फायदा पहुंचेगा ये तो  वक्त बताएगा, लेकिन दोबारा सक्रिय राजनीति में लौटे तेजस्वी का यह धरना पार्टी के लिए जितना फायदेमंद साबित होगा उससे कहीं ज्यादा तेजस्वी के लिए यह संजीवनी का काम करेगा.

रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह

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First published: August 22, 2019, 7:08 AM IST
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