Opinion: आखिर बिहार में क्यों पड़ी विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक की जरूरत, जिस पर हुआ इतना हंगामा

बिहार विधानसभा भवन (फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा भवन (फाइल फोटो)

बिहार (Bihar) में विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 विधानसभा और विधानपरिषद दोनों सदनों में पास हो गया है. इस विधेयक को पास कराने के लिए विधानसभा के अंदर पुलिस (Police) को बुलाना पड़ा. ऐसे में आपके दिमाग में ये बात आती होगी कि ये बिल बिहार के लिए क्या इतना ज्यादा जरूरी था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 4:14 PM IST
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बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 बिहार विधानमंडल (विधानसभा-विधानपरिषद) के बजट सत्र के दोनों सदनों में पास हो गया है. दोनों सदनों से पास हुआ यह पहला विधेयक है, जिसे पुलिस के पहरे में पास कराया गया है. इससे पहले जो भी विधेयक विधानसभा से पास हुए वो सत्ता और विपक्ष की सहमति या उनके नोक-झोंक के बीच पास हुए. लेकिन, 23 मार्च को विधानसभा से जो बिहार सशस्त्र पुलिस विधेयक पास हुआ वो पुलिस पहरे में पास कराया गया. लेकन इसी बीच लोगों के दिमाग में ये सवाल उठाना तो लाजमी है कि बिहार में आखिर विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक की जरूरत क्यों पड़ी? इसे बिल के पारित होने से पुलिस को कितनी शक्तियां मिलेगी.

विधेयक के पास होने से पहले अंदर से जो तस्वीरें सामने आयीं वो चौंकाने वाली थीं. पहली बार विधानसभा के अंदर पुलिस ने प्रवेश किया था और विपक्षी विधायकों को जमकर पीटा और उन्हें जबरन सदन से उठाकर बाहर भी फेंका. संभवत: यह पहला अवसर था जब इस प्रकार की तस्वीरें सामने आयी. इससे पहले भी हंगामा हुआ और सरकार के मंत्री को अपनी रक्षा के लिए बाथरूम तक में बंद होना पड़ा. लेकिन, तब भी विधानसभा के अंदर पुलिस नहीं बुलायी गई और न ही ऐसी तस्वीरें सामने आयी थी.

बाथरूम में बंद होकर बचायी थी अपनी जान

सीनियर पत्रकार लव कुमार मिश्रा 18 मार्च 1974 की चर्चा करते हुए कहते हैं कि विधानसभा का बजट सत्र का पहला दिन था. तत्कालीन राज्यपाल आर डी भंडारी का दोनों सदनों में संयुक्त अभिभाषण होना था. इधर, छात्र संघर्ष समिति ने विधान सभा के घेराव का भी नोटिश दे रखा था. सरकार ने इसको लेकर विधानसभा को चारों तरफ से बांस बल्ले से बेरिकेटिंग करा रखी थी, ताकि आनंदोलकारी विधानसभा के अंदर नहीं प्रवेश कर सकें. दूसरी ओर महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे पर बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा के पास अपना विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे. वे वहां पर हंगामा कर रहे थे.
इसी बीच जैसे ही दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेश को संबोधित करने राज्यपाल विधानसभा पहुंचे छात्रों ने अपना हंगामा तेज कर दिया. उनके काफिले को रोक दिया. किसी प्रकार पुलिस की मदद से उन्हें विधानसभा के संयुक्त अधिवेशन के लिए ले जाया गया. लेकिन, छात्रों का आंदोलन रुका नहीं और तेज हो गया. हंगामा कर रहे छात्रों को गिरफ्तारी के बाद जेल ले जाने के लिए खड़ी बसों को उन लोगों ने कब्जा कर लिया और बेरिकेटिंग को तोड़ते हुए बसों को लेकर विधान सभा में प्रवेश कर गए. इसके बाद विधान सभा में हंगामा इतना ज्यादा बढ़ गया था कि सदन की कार्रवाई में शामिल होने आए विधायक और मंत्री इधर-उधर भागने लगे.

लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि आंदोलन कितना उग्र रहा होगा इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आंदोलनकारियों के भय से तत्कालीन वित्त मंत्री दारोगा प्रसाद राय अपने को विधानसभा के बाथरूम में लॉक कर लिया था. विधान सभाध्यक्ष ने कुछ दिनों के लिए सदन को स्थगित कर दिया था, लेकिन उन्होंने विधानसभा में पुलिस को नहीं बुलाया था.

महिला विधायकों के साथ नीतीश भी बैठे थे धरने पर



अपनी मांगों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष कक्ष के बाहर पहली बार राजद विधायकों ने धरना नहीं दिया. इससे पहले भी विधायक अपनी मांगों को लेकर उनके कक्ष के सामने धरना पर बैठे हैं. वर्ष 1986 में लोकदल के विधायक कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में विधान सभाध्यक्ष कक्ष के सामने अपनी मांगों को लेकर दो दिन दो रात धरना पर बैठ गए थे. उनके साथ नीतीश कुमार और महिला विधायक भी थी. वे लोग तत्कालीन विधान सभाध्यक्ष को उनके कक्ष में ही कैद कर दिया था. तब वे पीछे के रास्ते से वहां से निकले थे. उन्होंने इसके बाद भी अपने कक्ष के सामने धरना दे रहे विधायकों को हटाने के लिए पुलिस नहीं बुलाया था, बल्कि धरना पर बैठे विधायकों के लिए चाय- नाश्ता से लेकर खाने तक की व्यवस्था किया था.

क्या है सशस्त्र पुलिस विधेयक

बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक पास हो गया है. इसके लागू होने के साथ ही पुलिस अब बिना किसी वॉरेन्ट के किसी को गिरफ्तार कर सकती है. इसके साथ ही पुलिस के पास शक के आधार पर गिरफ्तार करने का अधिकार होगा. बिना वॉरन्ट के तलाशी लेने का अधिकार होगा. गिरफ्तार किए गए शख्स को लोकल पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा. बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के किसी अधिकारी पर यदि कोई आरोप लगता है तो कोर्ट खुद से संज्ञान नहीं ले पाएगा.

विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकार के कैबिनेट मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में इस बिल को लेकर कहा कि साल 2010 में राज्य में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की 23 कंपनियां बिहार में थीं, अभी ये 45 हो चुकी हैं. इस कारण राज्य सरकार को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. नया बल (फोर्स) बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तो करेगी ही साथ ही उग्रवाद से भी मुकाबला करेगी, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बल को असीमित अधिकार नहीं दिए गए हैं. बिल के मुताबिक एयरपोर्ट-मेट्रो की सुरक्षा के लिए और राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए इस फोर्स का गठन किया जा रहा है. इसके पास हथियार होंगे, हर परिस्थिति से निपटने की ट्रेनिंग होगी और जरूरी अधिकार होंगे ताकि अगर कोई मुसीबत का वक्त आए तो ये फोर्स उससे निपट सके.

बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक को लेकर बवाल क्यों है?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि सीआईएसएफ की तरह यह फोर्स भी एयरपोर्ट, मेट्रो, ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा करेगी. बोधगया में आतंकवाद की घटना के बाद से बिहार मिलिट्री पुलिस वहां पर पिछले आठ सालों से सुरक्षा में है. लेकिन उसके पास अभी तक तलाशी लेने या गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है. लेकिन, इस विधेयक के जरिए उन्हें यह अधिकार दिए जा रहे हैं. वे आगे कहते हैं कि ये अधिकार केवल उन्हीं जगहों पर रहेंगे, जहां उन्हें सुरक्षा में लगाया जाएगा.

इधर, बिहार के विपक्ष का ये कहना है कि इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब पुलिस किसी के भी घर में घुसकर तलाशी ले सकती है और गिरफ्तार कर सकती है. साथ ही शासन और प्रशासन ने पहले से इस विधेयक के बारे में ना तो कोई जानकारी दी थी और ना ही मीडिया को कुछ बताया था. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो कहा कि इस विधेयक से नीतीश कुमार पुलिस को गुंडा बना रहे हैं. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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