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जानिए बिहार के इन 6 चेहरों को मंत्री बनाने के पीछे का पूरा समीकरण

Vivek Anand
Updated: June 1, 2019, 3:56 AM IST
जानिए बिहार के इन 6 चेहरों को मंत्री बनाने के पीछे का पूरा समीकरण
रामविलास पासवान और रविशंकर प्रसाद

मोदी सरकार में बिहार के 6 सांसद कुछ अहम मंत्रालय पाने में कामयाब रहे हैं. इनमें 3 कैबिनेट स्तर के और 3 राज्यमंत्री हैं.

  • Last Updated: June 1, 2019, 3:56 AM IST
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मोदी सरकार में बिहार के 6 सांसद कुछ अहम मंत्रालय पाने में कामयाब रहे हैं. इनमें 3 कैबिनेट स्तर के और 3 राज्यमंत्री हैं. कैबिनेट स्तर के मंत्रियों में रविशंकर प्रसाद को कानून मंत्रालय, संचार, इलेक्टॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, रामविलास पासवान को कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और गिरिराज सिंह को पशुपालन, डेयरी और फिशरीज मंत्रालय मिला है. राज्यमंत्रियों में नित्यानंद राय को गृहमंत्रालय और अश्विनी चौबे को स्वास्थ्य मंत्रालय के राज्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है.

वहीं आरके सिंह को पावर, न्यू एंड रिन्यूएबेल एनर्जी और स्किल डेवलेपमेंट के राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिला है. सांसदो की संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की वजह से जेडीयू मंत्रालय से बाहर है. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इशारों में नाराजगी जताते हुए सांकेतिक तौर पर मंत्रिमंडल में जेडीयू सांसदों को शामिल करने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्होंने भरोसा दिया कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू की गठबंधन सरकार को कोई दिक्कत नहीं है.

बीजेपी ने सारे समीकरण साधने की है कोशिश

जेडीयू की नाराजगी के बीच मोदी सरकार ने मंत्रियों के चयन से लेकर उनके विभागों के बंटवारे में हर तरह के समीकरण साधने की कोशिश की है. ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अगले ही साल बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी अपने इसी ट्रैक रिकॉर्ड को बरकरार रखना चाहेगी. हालांकि पिछली बार की तुलना में बिहार से मंत्रियों की संख्या कम है. पिछली बार बिहार से 8 मंत्री चुने गए थे. जिसमें राधामोहन सिंह को कृषि जैसा भारीभरकम मंत्रालय मिला था. उनके साथ रामकृपाल यादव और उस वक्त एनडीए में शामिल रहे उपेन्द्र कुशवाहा भी राज्यमंत्री बनाए गए थे.

इस बार बीजेपी से 5 और एक एलजेपी के कोटे से मंत्री बनाए गए हैं. रविशंकर प्रसाद को कानून मंत्रालय की दोबारा जिम्मेदारी मिली है. पिछली बार वो राज्यसभा सांसद के तौर पर मंत्रिमंडल में शामिल थे. इस बार उऩ्होंने पटना साहिब लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे शत्रुघ्न सिन्हा को हराकर संसद पहुंचे हैं. कायस्थ जाति से आने वाले रविशंकर प्रसाद ने दमदार बीजेपी प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का हर मौके पर बचाव किया है.

रविशंकर प्रसाद


वकालत के पेशे से आने वाले रविशंकर प्रसाद तीन बार राज्यसभा के सांसद चुने गए हैं. वो कई संसदीय समितियों में शामिल रहे हैं और पार्टी की पॉलिसी मेकिंग में अहम रोल निभाया है. रविशंकर प्रसाद अटल की सरकार में भी कानून मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं. इस बार लोकसभा से चुने जाने की वजह से उनके साथ बिहार बीजेपी का हौसला भी बुलंद होगा. शत्रुघ्न सिन्हा जैसे स्टारडम वाले नेता को हराकर कैबिनेट मंत्री का पद पाने की वजह से उनके समर्थकों और बिहार के सवर्ण मतदाता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा.
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राष्ट्रवाद के झंडे तले इकट्ठा समर्थकों को अपने साथ बनाए रखेगी बीजेपी

बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री का पद मिला है. पिछली सरकार में वो राज्यमंत्री थे. गिरिराज सिंह कट्टर हिंदूवादी छवि वाले नेता रहे हैं. भूमिहार जाति से आने वाले गिरिराज सिंह के प्रमोशन से सवर्ण और खासकर भूमिहार मतदाताओं के बीच बीजेपी अपनी मजबूत पैठ बनाए रखने में कामयाब होगी.

बेगूसराय सीट से जीत हासिल करने में उनके और कन्हैया के बीच की छवि के अंतर्विरोधों का खासा योगदान रहा है. बेगूसराय की चुनावी जंग राष्ट्रवाद बनाम देशद्रोह की हो गई थी. इसी वजह से गिरिराज सिंह दूसरे सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाले नेता बने. राष्ट्रवाद के झंडे तले इकट्ठा हुए समर्थकों को बीजेपी आगे भी अपने साथ बनाए रखना चाहेगी.

दलित समीकरण बिठाने के लिए रामविलास पासवान पर भरोसा



रामविलास पासवान बिहार से तीसरे कैबिनेट मंत्री हैं. इन्हें कंज्यूमर अफेयर्स का अपना पुराना मंत्रालय मिला है. हालांकि इस बार उन्होंने लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा लेकिन एलजेपी को मिली 6 सीटों के सभी उम्मीदवारों को जीत हासिल करवाने में कामयाब रहे. बिहार में महागठबंधन ने आरक्षण और एससी एसटी एक्ट पर सरकार के रवैये को लेकर एनडीए के विरुद्ध माहौल बनाने की बहुत कोशिश की थी. लेकिन इन दोनों मुद्दों पर बीजेपी को एलजेपी का साथ मिला.

पासवान अपने दलित वोटबैंक को ये समझाने में कामयाब रहे कि एनडीए की नीतियां कहीं से भी आरक्षण और दलित विरोधी नहीं हैं. पासवान की वजह से महागठबंधन के साझीदार जीतनराम मांझी दलित वोटर्स के बीच इतनी पैठ नहीं बना पाए कि वो एनडीए को ज्यादा नुकसान पहुंचा पाते. बीजेपी को इस साथ की जरूरत आगे भी बनी रहेगी, इसलिए रामविलास पासवान को केंद्र सरकार में बने रहना जरूरी है.

आरजेडी के वोटबैंक में सेंध के लिए नित्यानंद राय को बढ़ाया आगे

उजियारपुर सीट से जीतकर आए नित्यानंद राय को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला है. नित्यानंद राय आरएलएसपी प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा को शिकस्त देकर लोकसभा पहुंचे हैं. पिछली मोदी सरकार में उपेन्द्र कुशवाहा को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद मिला था. इस बार बीजेपी विरोध में आकर वो महागठबंधन में शामिल हो गए.

नित्यानंद राय को कुशवाहा को हराने का इनाम मिला है. दूसरी बार उजियारपुर सीट से सांसद बनने वाले नित्यानंद राय बिहार में बीजेपी के यादव फेस हैं. नित्यानंद राय और रामकृपाल यादव की लगातार दूसरी जीत इस बात की तस्दीक करते हैं कि यादव वोटबैंक बीजेपी को अछूत नहीं मानता. बीजेपी ने नित्यानंद राय को मंत्रिमंडल में जगह देकर यादव वोटर्स के बीच ये संदेश पहुंचाने की कोशिश की है कि उन्हें विकास के मुद्दे पर एक परिवार के बाड़े से बाहर निकलकर सोचना चाहिए.

नित्यानंद राय 2016 से बिहार बीजेपी के अध्यक्ष हैं. उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद बीजेपी के भीतर चल रही आपसी गुटबाजी को खत्म किया. जेडीयू के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा. नित्यानंद राय का अमित शाह के अलावा सभी केंद्रीय नेताओं से अच्छे संबंध हैं. उन्होंने 1992 में महज 23 साल की उम्र में लालू यादव को चुनौती दी थी. जब आडवाणी रथयात्रा लेकर हाजीपुर पहुंचे थे और लालू उनके रथ को रोकने पर आमादा थे.

नित्यानंद राय ने उस वक्त काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने अपने दम पर हाजीपुर में आडवाणी की सभा करवाई थी. वो हाजीपुर से 4 बार विधायक चुने गए हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में विपरित समीकरण के बावजूद वो इस सीट पर बीजेपी को जीत दिलवाने में कामयाब रहे थे. अपने व्यक्तित्व की वजह से इलाके में वो लोकप्रिय हैं. बीजेपी बिहार के जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर उन्हें आगे भी बड़े मौके दे सकती है.

अश्विनी चौबे को मंत्री पद देकर ब्राह्मण वोटर्स को संदेश



बक्सर सीट से चुनकर आए अश्विनी चौबे को फिर से राज्यमंत्री बनाया गया है. इस सीट से उनकी लगातार दूसरी जीत है. 2014 में जीत हासिल करने के बाद उन्हें 2017 में स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया था. इस बार ब्राह्मण वोटर्स के साथ सवर्ण मतदाता को अपने साथ बनाए रखने की कवायद में उन्हें फिर मंत्रीपद मिला है. अश्विनी चौबे लंबे वक्त से बीजेपी से जुड़े रहे हैं. 1995 के बाद वो 5 बार विधायक चुने गए हैं. बिहार सरकार में मंत्री रहे हैं. चौबे बाबा के नाम से मशहूर वो अपने इलाके के लोकप्रिय ब्राह्मण नेता रहे हैं.

राजपूत जाति से आरके सिंह बने मंत्री

पिछली मोदी सरकार में बिहार से राजपूत जाति के दो मंत्री थे. राधामोहन सिंह को कृषि मंत्रालय जैसे बड़ी मिनिस्ट्री मिली थी, जबकि 2017 में आरके सिंह को पावर, न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी में राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिला था. पिछली सरकार में हुए किसान आंदोलनों की वजह से राधामोहन सिंह का पत्ता कट गया.

लेकिन घर-घर बिजली पहुंचाने के मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के सफल होने की वजह से आरके सिंह दोबारा अपना मंत्रालय पाने में कामयाब रहे. पूर्व नौकरशाह आरके सिंह बिहार में एक जाना पहचाना नाम हैं. नौकरशाह रहते हुए उन्होंने बिहार में सड़कों को लेकर काफी काम किए थे. उनको मंत्री पद मिलने से सवर्ण मतदाता के साथ विकास के मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन करने वाले वोटर्स खुश होंगे.

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First published: May 31, 2019, 9:25 PM IST
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