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क्या इसी तनातनी के बीच BJP-JDU अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: October 7, 2019, 5:40 PM IST
क्या इसी तनातनी के बीच BJP-JDU अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
एक ओर कुछ नेता जलजमाव के बहाने सीधे नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं. वहीं सुशील कुमार मोदी जैसे नेता ट्वीट कर नीतीश कुमार के साथ खड़े नजर आए.

बिहार एनडीए (Bihar NDA) में एक फिर घमासान मचा है. कुछ नेता जलजमाव के बहाने सीधे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर हमला बोल रहे हैं. वहीं सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) जैसे नेता ट्वीट कर नीतीश कुमार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.

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पटना. बिहार एनडीए (Bihar NDA) में एक फिर घमासान मचा है. पटना (Patna) में भारी बारिश (Heavy Rain) और जलजमाव से तबाही क्या हुई, गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) जैसे नेताओं ने तो खुलकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हालांकि उन्होंने इस लपेटे में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी ले लिया.

गिरिराज ने खुलकर लगाई तोहमत
गिरिराज सिंह ने खुलकर तोहमत लगाई कि पटना में बारिश से तबाही के लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं. लगातार हमलों से बौखलाए जेडीयू के नेता भी खुलकर गिरिराज सिंह को कोस रहे हैं. के.सी. त्यागी ने गिरिराज सिंह पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी आग्रह किया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच आए दिन जिस तरह से एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी शुरू हुई है, उससे यह सवाल उठता है कि क्या 2020 का विधानसभा चुनाव इसी तनातनी के बीच लड़ा जाएगा?

गिरिराज के बयान जेडीयू को नहीं सुहाए

जाहिर है कि गिरिराज सिंह के बयान कभी जेडीयू को सुहाए ही नहीं और जब नीतीश कुमार पर सीधा हमला हुआ तो जेडीयू के नेता भी बुरी तरह बौखला गए और एक साथ प्रवक्ताओं की पूरी टीम ने गिरिराज सिंह पर हमला बोला है. के.सी. त्यागी ने तो यहां तक कहा कि जो काम तेजस्वी यादव ने नहीं किया, उससे अधिक नुकसान तो गिरिराज सिंह ने कर दिया. लेकिन इस पूरे मामले पर बीजेपी में भी दो धड़ा हो गया है.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह


सुशील मोदी ने किया सपोर्ट
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एक ओर कुछ नेता जलजमाव के बहाने सीधे नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं. वहीं सुशील कुमार मोदी जैसे नेता ट्वीट कर नीतीश कुमार के साथ खड़े नजर आए कि नीतीश कुमार ने आपदा की चुनौतियों को भी जनता की सेवा के अवसर में बदलने का हुनर साबित कर दिया.

आने वाले दिनों सबसे बड़ा टारगेट 2020 विधानसभा चुनाव है. क्या इस तनातनी के बीच एनडीए यह चुनाव लड़ेगा? सवाल है कि क्या लोकसभा रिजल्ट के जबरदस्त नतीजों के बाद बीजेपी का एक धड़ा नहीं चाहता कि पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लडे़? क्या बीजेपी का एक धड़ा यह चाहता है कि पार्टी खुद को नीतीश कुमार की छाया से बाहर निकाले? क्या किसी न किसी मुद्दे पर बयानबाजी इसी को लेकर है.

सीएम बनने की आकांक्षा?
बीजेपी ने कई चेहरे ऐसे हैं जो खुद को सीएम मैटेरियल के रूप में देखते हैं लेकिन वे खुलकर सामने नहीं आ रहे, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर सारी कवायद को अंजाम दे रहे हैं. लेकिन गिरिराज सिंह हमेशा से ही मुखर माने जाते रहे हैं. अपनी इसी मुखर वाणी के कारण बीजेपी आलाकमान से उन्हें डांट भी लग चुकी है. लेकिन फिर भी कुछ न कुछ बोलने से नहीं चूकते. राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार का मानना है कि भले ही गिरिराज सिंह को उनके बयानों के लिए आलाकमान से कई मौके पर डांट मिल चुकी है लेकिन इसके बाद भी उनके बयान आना इस बात का संकेत है कि उन्हें अपने आलाकमान से प्रश्रय भी मिलता है.



बीजेपी आलाकमान की चुप्पी
अभी तक इस पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई बयान नहीं आया कि वे गलत बोल रहे हैं. केसी त्यागी लगातार नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आग्रह कर रहे हैं कि वे गिरिराज सिंह के वक्तव्यों पर रोक लगाएं. लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से ऐसा होता नहीं दिख रहा है.

जेडीयू और बीजेपी साथ में हैं. लेकिन बीजेपी अब यह जताने की कोशिश में है कि बिहार में नीतीश सरकार बीजेपी के दम पर है. हालांकि जेडीयू इसे मानने को तैयार नहीं. उसका मानना है कि भले ही उसने बीजेपी से समर्थन लिया हो लेकिन चीजें हर हाल में नीतीश कुमार ही तय करेंगे. जेडीयू की कोशिश यह है कि पहले की तरह बीजेपी बिहार में जेडीयू को बड़ा भाई मानती रहे लेकिन बदली हुई परिस्थिति में बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं दिखती. हालांकि सुशील मोदी जैसे कुछ नेता नीतीश कुमार के साथ खड़े दिखाई देते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार फैजाद अहमद का मानना है कि बिहार बीजेपी दो भागों में बंट चुकी है. जिसमें एक गुट चाहता है कि नीतीश कुमार ही सीएम फेस रहें, जबकि दूसरा धड़ा इसे मानने को तैयार नहीं है. चूंकि चुनाव में अभी एक साल है इसलिए बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व मौन है. वह किसी ओर कुछ भी नहीं कह रहा. ऐसे में हो सकता है कि चुनाव से दो तीन महीने पहले कोई फैसला लिया जाए. अगर ऐसा है तो बीजेपी-जेडीयू के बीच जुबानी जंग चलती रहेगी. यह अलग बात है कि मुद्दे बदलते रहेंगे.

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First published: October 7, 2019, 5:26 PM IST
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