क्या झारखंड की तरह बिहार विधानसभा चुनाव में भी जेल से चल पाएगा लालू का जादू?, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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क्या झारखंड की तरह बिहार विधानसभा चुनाव में भी जेल से चल पाएगा लालू का जादू?, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
लालू यादव की चोरी गई SUV अरुणाचल प्रदेश से बरामद (फाइल फोटो)

आरजेडी (RJD) भी बखूबी जानती है कि लालू उनके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं. वैसे भी आरजेडी की पहचान लालू से ही शुरू होकर लालू पर ही जाकर खत्म हो जाती है.

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पटना. बिहार में विधानसभा के चुनाव (Assembly Elections) इसी साल होने वाले हैं. ऐसे में कोरोना संक्रमण के बीच बिहार की राजनीतिक पार्टियां अभी से ही अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गई हैं. बिहार में राष्ट्रीय जनता (RJD)दल जैसी क्षेत्रीय पार्टी के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि जिस लालू यादव (Lalu Yadav) के दम पर ये पार्टी आज खड़ी है वही आज सलाखों के पीछे हैं. हालांकि, झारखंड की जीत ने आरजेडी की परेशानियां बहुत हद तक कम कर दी है. मसलन लालू जेल में रहते हुए जिस तरह से झारखंड चुनाव में महागठबंधन को एकजुट रखें उसी का नतीजा था कि बीजेपी की करारी हार हुई. यहां तक कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी माना कि झारखंड की जीत में लालू यादव का सबसे अहम रोल रहा है.

अब चूंकि बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं तो सवाल ये है कि क्या वाकई विधानसभा चुनाव में लालू एनडीए के लिए एक बड़ी मुसीबत बनने वाले हैं. उससे भी बड़ा सवाल ये है कि आरजेडी के लिए लालू यादव किस रूप में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं. जेल के अंदर से या फिर जेल से बाहर रहकर ..? वैसे तो इस सवाल का सही जवाब चुनाव के बाद ही पता चल सकता है. लेकिन जानकारों की माने तो लालू जेल से ज्यादा इफेक्टिव हो सकते हैं और इसके पीछे एक वाजिब दलील भी है. वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेलारी का मानना है कि लालू को जो लोग बेहद पसंद करते हैं या फिर ये कह लीजिए जो लोग लालू को अपना भगवान मानते हैं उन सभी के बीच एक सामान्य सोंच है कि विरोधी लालू यादव को जबरन परेशान या प्रताड़ित करने के लिए जेल में बंद कर दिए हैं. यही नहीं जो लोग लालू की विचारधारा से इत्तेफाक नहीं रखते उनलोगों के भीतर भी अब लालू का सेंटिमेंट जगने लगा है.  कन्हैया भेलारी जैसे पत्रकार लालू यादव को उस समय से जानते है जब लालू की बिहार में तूती बोलती थी.

90 के दशक में लालू का बिहार में सिक्का चलता था
यानि हम उस दौर की बात कर रहे हैं जब लालू ना सिर्फ सत्ता में थे बल्कि 90 के दशक में लालू का बिहार में सिक्का चलता था. लेकिन समय बदलता गया और लालू बिहार की सत्ता से दूर हो गए. या यह कह लीजिए कि जिन गरीब-गुरबों और पिछड़ों के नाम पर लालू ने बिहार में 15 सालों तक राज किया उन्हीं गरीब-गुरबों ने उनका साथ छोड़ दिया. इसके पीछे कई वजह भी है. खैर आज लालू यादव भले ही सत्ता से दूर हो गए हैं लेकिन आज भी उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है. लालू का माई अब भी उन्हें बहुत प्यार करता है और लालू को अपना रहनुमा भी मानता है. जानकारों का यही मानना है कि लालू अगर चुनाव के समय में भी जेल के भीतर रहेंगे तो आरजेडी को यक़ीनन लालू का सेंटिमेंट वोट मिलेगा.



मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखने लगे हैं


आरजेडी भी बखूबी जानती है कि लालू उनके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं. वैसे भी आरजेडी की पहचान लालू से ही शुरू होकर लालू पर ही जाकर खत्म हो जाती है. मृत्युंजय तिवारी जैसे सैकड़ों नेता हैं जो खुलकर तो नहीं लेकिन दबे जुबानों में मानते हैं कि लालू प्रसाद अगर चुनाव के दरम्यान जेल में रहते हैं तो यकीनन पार्टी को सेंटिमेंट वोट मिलेगा. वो और बात है कि जेडीयू जैसी पार्टी को लालू यादव के जेल में या जेल से बाहर रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता. पार्टी के प्रवक्ता निखिल मंडल तंज कसते हुए कहते हैं कि आरजेडी के लोग आजकल दिन में भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखने लगे हैं. जबकि बिहार में न तो कोई वैकेंसी है और न ही यहां की जनता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इतर कुछ सोचने को तैयार भी है.

लालू आरजेडी के हैं वोट मशीन
अभी अभी झारखंड में जिस तरह से बीजेपी को पछाड़कर महागठबंधन ने वहां सत्ता हासिल की है उसमें हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अलावा लालू यादव का भी एक अहम रोल रहा है. महागठबंधन को एकजूट रखने में सबसे बड़ी भूमिका लालू यादव की ही रही है. और ये सब कारनामा लालू ने जेल में रहते हुए ही किया है. अब सवाल ये भी है कि आरजेडी इस चुनाव में लालू यादव को किस तरह से कैश करती है.

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