Opinion: शून्य से शिखर पर जाने का तरीका जानते हैं लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में जमानत दे दी है. (फाइल फोटो)

लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में जमानत दे दी है. (फाइल फोटो)

लंबे अर्से से बिहार की राजनीति से प्रत्यक्ष रूप से दूर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के एक मामले में जमानत मिल गई है. इन दिनों में वे बीमार भी रहे, फिर भी सियासत में उनके सक्रिय होने की संभावना से हलचल तेज है. आइए इस करिश्माई नेता की शख्सियत पर डालते हैं एक नजर.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 4:08 PM IST
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जेल और अस्पताल के चक्कर लगाते लगाते अब लालू प्रसाद यादव कमजोर जरूर हो गए हैं, लेकिन एक लंबे समय तक वे बिहार की राजनीति की एक जिंदा कहावत रहे हैं. लालू प्रसाद जानते हैं कि राजनीति में शून्य से शिखर तक जाने का तरीका क्या है और अपने प्रिय लोगों को भी कैसे शिखर तक पहुंचाया जाता है. यह गुण सबमें नहीं होता. तारीख 11 जून 1948 को गोपालगंज के फुलवरिया गांव में एक किसान परिवार में जन्मे लालू प्रसाद यादव, जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति आंदोलन में एक बेहद सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उभरे. पिता- कुंदन राय माता- मराछिया देवी. लालू प्रसाद ने अपनी सबसे बड़ी बेटी का नाम रखा मीसा. मीसा आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम नाम था और आपातकाल के दौरान यह अधिनियम बहुत कुख्यात था और इसी अधिनियम के तहत इंदिरा विरोधी लोगों को जेल हुई थी.

अपने इंदिरा विरोधी तेवर से लालू प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी हो गए. लेकिन उनुकी राजनीतिक सूझ-बूझ देखिए कि एक समय आया जब वही लालू प्रसाद धीरे-धीरे सोनिया गांधी के करीबी और बहुत प्रिय नेता हो गए. उन्हें सोनिया गांधी ने रेल मंत्री बनाया. यह कला उन्हीं लोगों में थी. प्रबल विरोध करके चमक पैदा कीजिए. बाद में जिसका विरोध किया, उसके प्रिय बन जाइए. लालू प्रसाद यादव ने अपनी प्राथमिक पढ़ाई गोपालगंज से की. आगे की पढ़ाई उन्होंने पटना के बीएन कॉलेज से की. पटना विश्वविद्यालय गए. फिर लॉ में ग्रेजुएशन किया. लालू यादव ने अपनी सबसे पहली नौकरी, बिहार के पशु चिकित्सा कॉलेज में एक क्लर्क के रूप में शुरू की. लेकिन यह नौकरी उन्हें रास नहीं आई. नौकरी छोड़ कर वे राजनीति में आ गए. इसके पीछे वजह थी.

पटना यूनिवर्सिटी से राजनीति शुरू की

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