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RJD नेताओं के बदले तेवर, बदल गए अंदाज! क्या एकला चलो की राह पर है RJD ?

Amit Singh | News18 Bihar
Updated: January 14, 2020, 12:59 PM IST
RJD नेताओं के बदले तेवर, बदल गए अंदाज! क्या एकला चलो की राह पर है RJD ?
क्या आरजेडी बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है.

महागठबन्धन में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है और लालू का बिहार में सबसे बड़ा जनाधार है इसमें कोई शक नहीं ..यही कारण भी है कि महागठबन्धन में आर

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पटना. आरजेडी नेताओं के तेवर इन दोनों जिस तरह से बदले बदले से हैं और अपने सहयोगियों पर जिस अंदाज में आरजेडी आक्रामक दिख रही है ऐसे में सवाल उठने लगा है कि कहीं ऐसा तो नहीं की आरजेडी  (RJD)अपने सहयोगियों से पीछा छुड़ाना चाहती है? दरअसल यह स्पष्ट देखा जा रहा है कि तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्यमंत्री बनाने की बात हो या फिर सीटों के बंटवारे का सवाल, आरजेडी अपने सहयोगियों को इन दिनों कोई खास तवज्जो नहीं दे रही.ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आरजेडी कहीं 2020 के चुनाव में एकला चलो की राह पर तो नहीं है?

आरजेडी के तेवर के पीछे ओवर कॉन्फिडेंस या फिर स्ट्रेटजी ?
राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखंड की जीत में लालू के किंगमेकर बनने के बाद से आरजेडी के नेता-कार्यकर्ता उत्साहित हैं. बिहार में पार्टी के अध्यक्ष  जगदानंद सिंह जैसे नेता के तेवर से साफ लगता है कि आरजेडी को खुद पर कॉन्फिडेंस भी है. गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले विधायक विजय प्रकाश ने भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह कर महागठबंधन के भीतर भूचाल ला दिया था. इसके बाद से ही पूर्व सीएम जीतनराम मांझी और उनकी पूरी टीम ने जगगदानंद सिंह से लेकर पार्टी के अधिकांश नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

हालांकि जानकार बताते हैं कि पार्टी की इसमें एक बड़ी स्ट्रेटजी भी हो सकती है. मसलन तेजस्वी को सीएम चेहरा और लालू को कोर्डिनेटर बनाने के बहाने आरजेडी गठबंधन के छोटे दलों पर दबाव बनाकर उनपर हावी होना चाहती है. ऐसा इसलिए कि मांझी-कुशवाहा जैसे नेता लोकसभा चुनाव की तरह उनपर 2020 में भी सीटों को लेकर दवाब ना बना सकें.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जगदानंद सिंह और विजय प्रकाश ये दोनों तेजस्वी के सबसे भरोसेमंद नेता हैं और इनके बयान का मतलब है कि उनकी रजामंदी भी है. साफ है कि आरजेडी पूरी रणनीति के साथ अपने सहयोगियों पर इस तरह से आक्रामक है. अंदरखाने में इस बात की खूब चर्चा है कि आरजेडी माइनस मांझी,  मुकेश सहनी और उपेंद्र कुशवाहा के ही 2020 के चुनाव लड़ने की तैयारी में है. हालांकि कांग्रेस को लेकर अभी पार्टी असमंजस में है.

आरजेडी के तेवर से सहयोगी नाराज, खोला मोर्चा
बता दें कि आरजेडी के आक्रामक तेवर के खिलाफ अब उनके सहयोगियों ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है. इसकी शुरुआत खुद जीतनराम मांझी ने कर दी. मांझी ने जगदानंद सिंह को अहंकारी तक बता दिया तो हम के नेता विजय यादव कहते हैं ऐसी हिटलर शाही उनलोगों को बर्दाश्त नहीं होगी.वहीं, कांग्रेस भी अब खुलकर आरजेडी पर हमले करने लगी है. पार्टी नेता प्रेमचन्द मिश्रा और राजेश राठौड़ जैसे नेता कहते हैं कि 2010 और 2014 में भी आरजेडी कुछ इसी अंदाज में एकला चलो की राह पर थी, नतीजा क्या हुआ सबने देखा. समझदारी इसमें है कि सूझबूझ से काम लेकर सबको एकसाथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ स्ट्रेटजी बनानी चाहिए. अगर आरजेडी को बिहार की सबसे बड़े पार्टी का गुमान है तो कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन हमें कोई घमंड नहीं है.

महागठबंधन के सहयोगियों को मिला रघुवंश का साथ
महागठबंधन में मचे कोहराम के बीच आरजेडी के एक बड़े नेता रघुवंश प्रसाद सिंह की एक चिट्ठी ने भी जगदानंद के फैसलों पर सवाल उठा दिया है. आरजेडी सूत्रों की मानें तो रघुवंश प्रसाद सिंह इस बात से भी बेहद नाराज हैं कि पार्टी के बड़े नेताओं को अपने सहयोगियों के इस तरह से व्यवहार हरगिज नहीं करना चाहिए जिससे महागठबंधन पर कोई असर पड़े.

बहरहाल पार्टी के सीनियर नेता शिवानन्द तिवारी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं.  जाहिर है अब आरजेडी का एक धड़ा  डैमेज कंट्रोल की भूमिका में है तो पार्टी का दूसरा पक्ष अब भी अपने सहयोगियों को तवज्जो देने के मूड में नहीं है.  दरअसल विरोधी खेमे को लगता है कि मांझी, कुशवाहा और सहनी से चुनाव में उन्हें बहुत कुछ फायदा नहीं होने वाला है. जबकि उनके पास खुद मुस्लिम-यादव समीकरण का 31 प्रतिशत वोट बिहार में है.

जेडीयू का तंज, अस्तित्व बचाना हो जाएगा मुश्किल
जाहिर है आरजेडी का एक धड़ा अब अकेले चुनाव लड़ने के मूड में भी है लेकिन रघुवंश प्रसाद जैसे नेता को यह फार्मूला मंजूर नहीं. वहीं महागठबंधन का महाभारत देख रही विरोधी पार्टियां आरजेडी पर ही तंज कस रही हैं. जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि सब मिलकर भी 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए का क्या बिगाड़ पाया, उल्टे सूपड़ा साफ हो गया. अगर आरजेडी अकेले चुनाव लड़ी तो समझिए अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा.

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First published: January 14, 2020, 12:58 PM IST
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