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बिहार में राजनीतिक लाभ की गोंद से फिर चिपकेंगे CM नीतीश और उपेंद्र कुशवाहा! पढ़ें इनसाइड स्‍टोरी

उपेंद्र कुशवाहा (बाएं) विधानसभा चुनाव के वक्त नीतीश कुमार पर हमलावर थे, पर अब उनका रुख बदला हुआ है.
उपेंद्र कुशवाहा (बाएं) विधानसभा चुनाव के वक्त नीतीश कुमार पर हमलावर थे, पर अब उनका रुख बदला हुआ है.

उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में लव-कुश समीकरण फिर से बन सकता है? क्या वे नीतीश कुमार के साथ आ सकते हैं? तब उन्होंने कहा, कल क्या होगा, किसने जाना है और राजनीति तो सम्भावना का खेल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 7:54 AM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के वक्त नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर हमलावर होने वाले तमाम विरोधी दलों के नेताओं के साथ RLSP के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) भी थे. लेकिन जैसे ही चुनाव परिणाम आया और नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने, तो तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने चुनावी अंदाज में ही हमला बोलना जारी रखा है. जबकि उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के पक्ष में खुल कर उतर गए हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने न्यूज़ 18 से कहा कि नीतीश कुमार मेरे बड़े भाई हैं, अगर उन पर इस तरह से कोई बोलेगा तो उपेंद्र कुशवाहा चुप नहीं बैठेगा. तेजस्वी का बयान बर्दाश्त करने लायक नहीं है. नीतीश कुमार बिहार के सम्मानित नेता हैं और वरिष्ठ हैं. उनके प्रति इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है.

कुशवाहा यही नहीं रुके, कुशवाहा से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में लव-कुश समीकरण फिर से बन सकता है? क्या वे नीतीश कुमार के साथ आ सकते हैं? तब कुशवाहा ने कहा, कल क्या होगा किसने जाना है और राजनीति तो सम्भावना का खेल है. कल क्या हो जाए क्या पता. नीतीश कुमार का बचाव करते दिख रहे कुशवाहा के इस बयान के अर्थ में राजनीतिक संकेत खोजा जाने लगा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार दोनों फिर से एक साथ आ सकते हैं?
आखिर इस नर्मी की वजह क्या है

चुनाव में जहां जेडीयू को झटका लगा है तो वहीं RLSP को भी एक सीट नहीं मिल पाई है. लेकिन कुशवाहा की पार्टी ने कई जगह अच्छे वोट पाए हैं और कई सीट पर परिणाम प्रभावित किया है. खासकर कुशवाहा वोट किसी भी गठबंधन को एक मुश्त नहीं मिल पाया. जिसकी सबसे बड़ी वजह कुशवाहा रहे. नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि उनका खोया वोट बैंक फिर से उनके पाले में आ जाए. वहीं अब कुशवाहा को लगता है कि उनकी ताकत खासकर कुशवाहा जाति में बनी है, लेकिन अकेले दम पर वे बहुत ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं. वहीं नीतीश कुमार भी अपने पुराने आधार वोटर लव कुश समीकरण को बिखरने से परेशान हैं, सो उन्हें भी कुशवाहा का साथ आने वाले वक्त में फायदा दे सकता है. कुशवाहा भी नीतीश कुमार के साथ मिल कर अपने जनाधार को बढ़ा सकते हैं.
नर्मी का असर दिखा जेडीयू पर



उपेंद्र कुशवाहा के नीतीश कुमार के प्रति नर्मी दिखाने पर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि संवैधानिक संस्था में बैठे लोग जब मर्यादा तोड़ते हैं तो इसका मैसेज ठीक नहीं जाता है. तेजस्वी ने जो कुछ बोला वह सही नहीं है. जो भी राजनीति में अच्छे लोग हैं वे इसकी निंदा करते हैं, उनमें राजनीतिक शुचिता है और कुशवाहा जी ने नीतीश जी के प्रति जो अपने उदगार व्यक्त किए है. उसकी हम तारिफ करते हैं.

दरअसल बिहार के सियासत में जेडीयू के पहले समता पार्टी बना था और उस वक्त समता पार्टी लव-कुश यानी कुर्मी और कोईरी की पार्टी मानी जाती थी. उस वक्त नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा भी साथ थे और दोनो मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने में लगे थे. लेकिन बाद में कुशवाहा जेडीयू से अलग हो गए और नीतीश कुमार और कुशवाहा के रास्ते अलग हो गए.
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