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यह महिला सरकार से मांग रही है इच्छा मृत्यु की इजाजत, जानिए क्या है मामला

News18 Bihar
Updated: September 15, 2019, 9:12 PM IST
यह महिला सरकार से मांग रही है इच्छा मृत्यु की इजाजत, जानिए क्या है मामला
कैंसर पीड़िता ज्योति

ज्योति पर मानो कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है कि जीने की लालसा ही हमेशा के लिए खत्म सी हो गई और अब जिंदगी की बजाए मौत मांग रही है.

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  • Last Updated: September 15, 2019, 9:12 PM IST
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पटन. सिर्फ सांसें चलते रहने को ही जिंदगी नहीं कहते. आंखों में कुछ ख्वाब और दिल में उम्मीदें होना भी जरूरी है. जी हां, पटना (Patna) की ज्योति पंजाबी (Jyoti Punjabi) की उम्मीदें अब खत्म होने लगी है क्योंकि उसे पता है कि उसे गंभीर बीमारी है और वह अकेली है. तभी तो ना कोई ख्वाब और अब ना कोई सपने सिर्फ जिद है तो मरने की.

कैंसर पीड़ित है ज्योति पंजाबी
हाथ जोड़कर मौत की गुहार लगा रही बेसहारा दिव्यांग महिला एक्जीविशन रोड की रहनेवाली ज्योति पंजाबी है. इसकी बदनसीबी कहिए या कुदरत की नाइंसाफी जिसे पहले बीमारी ने पैर से अपाहिज बना दिया फिर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की भी शिकार हो गई. अपनों के नाम पर इस दुनिया में अपना कोई नहीं. 64 साल की ज्योति का अपनों के नाम पर कोई नहीं है.


सालों पहले पहले पति के साथ छोड़ देने के बाद वर्षों तक विदेश में एयरलाइंस की नौकरी भी की. इस दौरान एक हादसे में पैर काटना पड़ा और अपाहिज बन गई. अपाहिज हालत में जब वह पटना पहुंची तो मददगार कोई नहीं मिलने पर छोटी बहन ने अपने घर में पनाह दिया और कई साल तक इलाज भी करवाई. पहले से बीमार ज्योति को अब कैंसर भी हो गया जिसे पटना के अस्पतालों ने पुणे के लिए रेफर कर दिया. गंभीर बीमारी के बाद अब बहन ने भी हाथ खड़े कर दिए और इसकी तकलीफ बढ़ती जा रही है. ऐसे में अपनी हालत और लाचारगी देख ज्योति ने मरने का ही मन बना लिया और राज्य और केंद्र सरकार से पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांग रही है.

गंभीर बीमारी के बाद अब बहन ने भी नहीं दे रही साथ
छोटी बहन ने साफ कह दिया कि मेरे पास अब इलाज कराने के लिए पैसे नहीं हैं. सरकार अगर चाहेगी तभी इलाज संभव हो सकेगा. ऐसे में बिस्तर पर पड़ी ज्योति का जहां आर्थिक संकट ने मनोबल तोड़ दिया है, वहीं दर्द और तन्हाई ने भी जीने की लालसा खत्म कर दी है. इसे एब्डोमिनल कैंसर है और इस बीमारी का इलाज रोबोटिक सर्जरी से ही संभव हो सकेगा जिसमें लाखों रुपए खर्च आएंगे पर जिसके लिए ना मां-बाप का साया ना हमसफर का साथ और ना संतान की मौजूदगी, ऐसे में मदद तो दूर अब भरोसा भी देनेवाला कोई नहीं.
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बता दें कि यह महिला दिव्यांगता के बाद भी स्वाबलंबन के लिए कई बार प्रयास की लेकिन स्टार्टअप इंडिया में सफलता नहीं मिली. सामाजिक कार्यकर्ता भी इसकी हालत देखकर तरस खा रहे हैं और सरकार से इलाज कराने की अपील कर रहे हैं.

बहरहाल, ज्योति को इस हालत में अब ना सिर्फ अपनों के साथ की जरूरत है बल्कि आर्थिक मदद की भी ताकि यह पुणे जाकर कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करा सके.

(रिपोर्ट- रजनीश कुमार)

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First published: September 15, 2019, 9:10 PM IST
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