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पटना: धूमधाम से मनाया गया वर्ल्ड चिल्ड्रन डे, सुशील मोदी ने घूंघट के लिए कही ये बात

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: November 20, 2019, 7:47 PM IST
पटना: धूमधाम से मनाया गया वर्ल्ड चिल्ड्रन डे, सुशील मोदी ने घूंघट के लिए कही ये बात
दहेज प्रथा रोकने के लिए लड़के-लड़कियों को आगे आना होगा- सुशील कुमार मोदी

पटना में आयोजित विश्‍व बाल दिवस (World Children's Day) के मौके पर बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने घूंघट को लेकर बड़ा बयान दिया है.

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पटना. कुछ दिन पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Ministers Ashok Gehlot) ने कहा था कि समाज को किसी महिला को घूंघट में कैद करने का कोई अधिकार नहीं है. साथ ही उन्‍होंने कहा था कि जब तक घूंघट नहीं हटेगा, तब तक महिलाएं आगे नहीं बढ़ सकतीं. जबकि आज पटना में आयोजित विश्‍व बाल दिवस (World Children's Day) के मौके पर बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने भी कुछ ऐसी ही बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि किसी ने कभी दुर्गा मां (Durga Maa), सरस्वती मां और लक्ष्मी मां को घूंघट में देखा है. यही नहीं, उन्‍होंने आगे कहा कि क्या रामायण (Ramayana) और महाभारत (Mahabharata) में आपने बाल विवाह (Child Marriage) देखा है. रामायण में भी सीता माता का स्यंवर बालिग होने पर ही किया गया था.

अधिवेशन भवन में बोल रहे थे मोदी
दरअसल, सुशील कुमार मोदी वर्ल्ड चिल्ड्रन डे के मौके पर पटना के अधिवेशन भवन में महिला विकास निगम द्वारा आयोजित संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते की 30वीं वर्षगांठ पर राज्य स्तरीय किशोर-किशोरी शिखर सम्मेलन में पहुंचे थे. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि अगर महाभारत काल और रामायण काल में बाल विवाह की प्रथा नहीं थी और घूंघट की प्रथा भी नहीं थी. किसी ने लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती मां को घूंघट में देखा है. सुशील मोदी ने कहा कि जब देवी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी घूंघट या फिर पर्दे में नहीं हो सकती हैं, तो आज कैसे लड़कियों को घूंघट और पर्दे में रहने को कह सकते हैं. उन्होने वहां मौजूद बच्चों को कहा कि इसमें लड़कियों की जिम्मेदारी ज्यादा बनती है कि वे इसका विरोध करें. सुशील कुमार मोदी ने यह भी कहा कि लड़कियों को ताकतवर बनाने में लड़कों और महिलाओं को ताकतवर बनाने में पुरुषों की बड़ी भूमिका होगी.

बच्‍चों को दिया ये सुझाव

बिहार के डिप्टी सीएम ने कहा कि संयुक्त राष्‍ट्र बाल अधिकार पिछले तीस साल के से कार्यक्रम कर रहा है. अब जरूरत है कि बच्चों को अब उनके अधिकार ही नहीं बल्कि उनके कर्तव्य को भी बताया जाए. साथ ही डिप्टी सीएम ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा स्कूलो में बच्चों के लिए जो योजना चलाईं जा रही हैं, वो उन्हें ठीक प्रकार से मिल रही हैं या नहीं इस पर भी नजर रखी जाए. अगर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो इसका विरोध भी बच्चों को करना चाहिए.

डिप्‍टी सीएम ने बच्‍चों को दिया मंत्र
>>कानून बनाने से समाज में बदलाव नहीं लाया जा सकता, बल्कि समाज में जागृति और शिक्षित करने से ही बदलाव आ सकता है.
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>>दहेज प्रथा रोकने के लिए लड़के-लड़कियों को आगे आना होगा.
>>लड़की तभी दहेज का विरोध कर सकती है, जब वो अपने पैर पर खड़ी होगी. वह तभी दहेज देने के खिलाफ माता-पिता से लड़ सकती है.
>>स्कूल में अभिभावक-शिक्षक मीटिंग में ज्यादातर मां पहुंचती हैं. बच्चों के विकास का माता-पिता दोनों का दायित्व होता है.
>>शिक्षक भी दोनों (माता-पिता) के आने पर ही बात करें.
>>घर मे शौचालय है तो बाहर शौच के लिए ना खुद जाएं और ना ही अपने माता पिता जानें दें.
>>बच्चे साल में एक पेड़ लगाएं और उसकी देखभाल भी करें.

जब पुराने दिन किए याद..
डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने इस मौके पर अपना उदाहरण भी दिया कि कैसे वे अपने बच्चों के स्कूल में पैरेंट-टीचर मीट के दौरान खुद भी जाया करते थे. उन्होने यह भी कहा कि दहेज प्रथा खत्म करने के लिए लड़कियों को ही आगे आना होगा. जबकि बाल विवाह के साथ दहेज प्रथा खत्म करने में लड़कों को लड़कियों की मदद करनी होगी.

इसके अलावा महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक एन विजय लक्ष्मी ने कहा कि आज भी बिहार जैसे राज्य में बाल विवाह की दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है. जरूरत है बच्चे पढ़ाई कर अपने पैरों पर खड़े हों और अपने माता पिता को जागरूक करें, ताकि बाल विवाह और दहेज जैसे प्रथा पर रोक लगे.

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First published: November 20, 2019, 7:32 PM IST
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