Bihar Assembly Election 2020: कोरोना से थमी सियासत, 75 नेता पॉजिटिव, तेजस्वी बोले- नहीं होना चाहिए चुनाव
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Bihar Assembly Election 2020: कोरोना से थमी सियासत, 75 नेता पॉजिटिव, तेजस्वी बोले- नहीं होना चाहिए चुनाव
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. (कॉन्सेप्ट इमेज)

Bihar Assembly Election Update: विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi yadav) ने तो साफ तौर पर कह दिया कि अभी चुनाव (Election) बिल्कुल नहीं होना चाहिए. जब कोरोना थम जाए तो परंपरागत तरीके से चुनाव होना चाहिए.

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पटना. बिहार (Bihar Assembly Election) में विधानसभा चुनाव काफी नजदीक है. ऐसे में राजनीतिक तैयारियां होनी लाजमी है, लेकिन इस कोरोना संकट (Corona Pandemic) में यह तैयारी कैसे हो सकती है. हालांकि, कुछ दलों ने वर्चुअल अभियान (Virtual Rally) चलाया. लेकिन ढाक के तीन पात. नेता संक्रमित हो गए. इस पर उनकी विपक्षी पार्टियां आरोप लगाने लगी कि उन्होंने संक्रमण फैलाया है. चुनाव नहीं होना चाहिए.

मंगलवार को बिहार से एक बड़ी खबर यह आई कि बिहार बीजेपी के 75 नेता कोरोना संक्रमित हो गए. पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गया. पक्ष से लेकर विपक्ष के नेता तक सहम गए. फिर शुरू हुआ इस पर राजनीति का दौर. विपक्ष के नेता यह कह रहे हैं कि बीजेपी और जेडीयू चुनाव की तैयारी की वजह से वर्चुअल रैली और बैठकों का आयोजन कर रही थी. इस वजह से यह संक्रमण फैला है.

परंपरागत तरीके से हो चुनाव 



विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तो साफ तौर पर कह दिया कि अभी चुनाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. जब कोरोना थम जाए तो परंपरागत तरीके से चुनाव होना चाहिए. वहीं, कांग्रेस के नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने भी कहा कि अभी राजनैतिक अभियान चलाना बहुत ही मुश्किल है. जेडीयू और बीजेपी के लोगों को पूरी तरह से लॉकडाउन का पालन करना चाहिए. चुनाव की तैयारी से दूरी बनानी चाहिए.
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लोगों से सम्पर्क के लिए वर्चुअल माध्यम बेहतर 

क्योंकि बीजेपी के साथ यह बड़ी घटना घटी है तो पार्टी के नेता  डिफेंसिव मोड में है. बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद कहते हैं कि बीजेपी ने पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग के तहत वर्चुअल मीटिंग की है. लेकिन इस आधुनिक युग में वर्चुअल मीटिंग का विरोध करके आरजेडी सिर्फ राजनीति कर रही है. वहीं जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि कोरोना संकट में सोशल डिस्टेंसिंग रखना ही एक रास्ता है. ऐसे में राजनीतिक गतिविधि चलाने में मुश्किल तो हो रही है.  लेकिन वर्चुअल तरीके से यदि मीटिंग रैली होती है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है. चुनाव कब होना है, कैसे होना है, यह चुनाव आयोग तय करेगा जिसका पालन जेडीयू करेगी.

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चुनाव लड़े या कोरोना से लड़े

यह कोरोना महामारी और ऊपर से यह चुनाव. राजनीतिक नेताओं को कुछ समझ नहीं आ रहा कि वह चुनाव लड़े या फिर इस कोरोना से लड़े. हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों ने बीच का रास्ता टेक्नोलॉजी के तहत निकालने की कोशिश तो जरूर की. लेकिन उस पर भी कोरोना का साया ऐसा मंडराया की सब कुछ ठप्प हो गया.
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