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आदिवासियों ने धूमधाम से मनाया 'सरहुल'

आदिवासियों ने धूमधाम से मनाया 'सरहुल'

हर साल की तरह ही इस साल भी पूर्णिया में संथाल आदिवासियों ने सोमवार को अपना महान और पारंपारिक पर्व सरहुल धूमधाम से आयोजित किया। यहां सरहुल हर साल राजेंद्र बाल उद्यान में हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है।

हर साल की तरह ही इस साल भी पूर्णिया में संथाल आदिवासियों ने सोमवार को अपना महान और पारंपारिक पर्व सरहुल धूमधाम से आयोजित किया। यहां सरहुल हर साल राजेंद्र बाल उद्यान में हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है।

हर साल की तरह ही इस साल भी पूर्णिया में संथाल आदिवासियों ने सोमवार को अपना महान और पारंपारिक पर्व सरहुल धूमधाम से आयोजित किया। यहां सरहुल हर साल राजेंद्र बाल उद्यान में हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है।

हर साल की तरह ही इस साल भी पूर्णिया में संथाल आदिवासियों ने सोमवार को अपना महान और पारंपारिक पर्व सरहुल धूमधाम से आयोजित किया। यहां सरहुल हर साल राजेंद्र बाल उद्यान में हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है।

झारखंड अलग होने के बाद बिहार के पूर्णिया प्रमंडल में सबसे अधिक जनजातीय बसाव है और इस कारण जनजातीय संस्कृति की झलक पूर्णिया में हर साल सरहुल के आयोजन में दिखती है।

सोमवार की सुबह से ही जुटे जनजातीय समुदाय के लोगों ने पहले सरनास्थल पर विधानसहित पूजा की और सखुआ के नए कोंपल और फूलों से एक दूसरे को सजाया। इसके बाद मांदर की थाप पर झूमने और समूह नृत्य का सिलसिला चल पड़ा।

पूर्णिया में सरहुल का आयोजन हर साल अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद और पूर्णिया प्रमंडल आदिवासी छात्र और युवा समिति नामक जनजातीय सांस्कृतिक संगठन करते हैं।

इस आयोजन से पूर्णिया का पूरा माहौल प्रकृति पर्व 'सरहुल' और जनजातीय संस्कृति में डूबा है क्योंकि सैकड़ों की तादात में आदिवासी नर नारी सड़को पर मांदर की थाप, गालों गुलाल लगाए गा-बजा और नाच रहे हैं।

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