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पूर्णिया: शिक्षक नियोजन में बड़ा फर्जीवाड़ा, स्कैन किए हुए फर्जी सर्टिफिकेट पर हुआ अभ्यर्थी का चयन

पूर्णिया में शिक्षक नियोजन में धांधली सामने आई.

PURNIA NEWS: शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई तरह के सवाल सामने आने लगे हैं. सवाल नियोजन ईकाई पर भी उठने लगा है कि बिना आधार कार्ड के कैसे आवेदन स्वीकार किया गया?

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पूर्णिया. नगर निगम में हाल में ही शिक्षक पद के लिये नियोजन हुआ है. इस नियोजन में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है. सुपौल के छातापुर की पिंकी देवी का कहना है कि उसने पूर्णिया और सुपौल दोनों जगहों से अनुसूचित जाति के कोटे से शिक्षक नियोजन के लिये आवेदन दिया था. पूर्णिया नगर निगम में पांच जुलाई को काउंसेलिंग हुई थी जिसमें वह शामिल नहीं हुई थी. जबकि सात जुलाई को वह सुपौल के छातापुर में काउंसेलिंग में शामिल हुई थीं. जहां एससी कोटे में उनका चयन भी हो गया था. बाद में उन्हें पता चला कि पूर्णिया नगर निगम में भी उनकी काउंसलिंग हुई है. जब वेलोग यहां पहुंचे तो पाया कि पूर्णिया नगर निगम में किसी ने उनके सर्टिफिकेट का स्कैनिंग कर अपना फोटो लगाकर फर्जी तरीके से नियोजन किया गया है. हैरत की बात तो ये है कि फर्जी अभ्यर्थी का आवेदन के साथ आधार कार्ड भी नहीं है.

वहीं अन्य अभ्यर्थियों का वीडियोयो रेकार्डिंग है जबकि फर्जी अभ्यर्थी का वीडियो रेकार्डिंग भी नहीं है. इसके बावजूद फर्जी अभ्यर्थी का भी यहां चयन हो गया है. इस बाबत उसने पूर्णिया नगर आयुक्त को लिखित आवेदन दिया है. पिंकी के पति राजेन्द्र राम ने नगर आयुक्त से इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और फर्जी अभ्यर्थी पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.

आवेदन मिलने पर नगर आयुक्त जिउत सिंह खुद मामले की जांच में जुट गये हैं. उसने दोनों अभ्यर्थियों का प्रमाण-पत्र जांचने के बाद लैपटॉप पर विडियो रिकार्डिंग की भी जांच की. नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम में फर्जी काउंसलिंग के दो मामले सामने आये हैं जिसमें एक तो पिंकी देवी का आवेदन मिला है. उनका कहना है कि उनके प्रमाण-पत्र का स्कैन कर किसी ने फर्जी तरीके से नियोजन कर लिया है.  वहीं दूसरी अभ्यर्थी आऱती देवी ने मौखिक शिकायत की है कि उनके नाम पर भी किसी ने फर्जी नियोजन किया है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है. जांच में दोषी पाये जाने पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जायेगी.

शिक्षक नियोजन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद कई तरह के सवाल सामने आने लगे हैं. सवाल नियोजन ईकाई पर भी उठने लगा है कि बिना आधार कार्ड के कैसे आवेदन स्वीकार किया गया? अभ्यर्थी का वीडियो रिकार्डिंग क्यों नहीं है. आखिर नियोजन ईकाई ने कैसे आंख मूंदकर पिंकी देवी के नाम पर किसी दूसरे का काउंसेलिंग कर चयन भी कर लिया. कहीं नियोजन ईकाई की भी तो मिलीभगत नहीं है. बहरहाल सभी विन्दुओं पर जांच के बाद ही खुलासा हो पायेगा कि इसके पीछे क्या सच्चाई है.

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