बायसी विधानसभा: महानंदा नदी की उपधारा में बाढ़ बनाती है सदन तक पहुंचने का रास्ता

बिहार चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं . (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)
बिहार चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं . (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

बिहार (Bihar) के पूर्णिया जिले का बायसी विधानसभा (Bayasi Assembly) क्षेत्र कोसी नदी की उपधारा कनकई और परमान नदी से घिरा हुआ क्षेत्र है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 21, 2020, 3:57 PM IST
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पूर्णिया. बिहार (Bihar) के पूर्णिया जिले का बायसी विधानसभा (Bayasi Assembly) क्षेत्र महानंदा नदी की उपधारा कनकई और परमान नदी से घिरा हुआ क्षेत्र है. सालभर इस इलाके में लोग हलकान में रहते हैं. बाढ़ इस इलाके का मुख्य चुनौती का विषय बनी रहती है. बायसी की जनता बाढ़ की दंश को झेलने के लिए अभिशप्त रहते हैं. डर और भय के बीच बायसी की जनता के आधा साल गुजर जाता है. छह महीने तक यह इलाका टापू में तब्दील रहता है. बाढ़ सियासतदानों के लिए सदन तक पहुंचने के लिए जरिया है.

सियासी नारे और दावे हर चुनाव में देखने को मिलते हैं।‌ बाढ़ से निजात दिलाने के हसीन ख्वाब दिखाएं जाते हैं. राजनीतिक तौर पर बायसी का इलाका उतना चेतना से भरा हुआ नहीं माना जाता है. भावुकता में वोट बटोरे जाते हैं. लिहाजा इस इलाके के लोगों के लिए जिंदगी बेहद कठिन मानी जाती है. बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद साल के आखिरी छह महीने गुजर जाते हैं.

समा​जवादियों से बीजेपी की भिड़ंत
दरअसल, बायसी विधानसभा पूर्णिया में है, लेकिन लोकसभा क्षेत्र बायसी में पड़ता है. राजनीतिक तौर पर इस सीट पर किसी भी पार्टी का पेटेंट नहीं है. चुनावी अखाड़े में राजनीतिक समीकरण बदलते रहते हैं. यहां समाजवादियों और भाजपा में भिड़त है. भाजपा को हराकर राजद ने सीट अपने पाले में कर लिया है. 2005 में निर्दलीय उम्मीदवार ने इस सीट पर अपना दखल दिया था. हालांकि 2010 में भाजपा ने यह चुनाव जीतकर इस सीट पर दावा ठोंक दिया. फिर राजद ने भाजपा से 2015 के चुनाव में यह सीट छीनकर अपनी झोली में रखने में सफल रहा. बायसी विधानसभा क्षेत्र में कुल वोटर 2 लाख 70 हजार के करीब हैं. इनमें पुरुष वोटर 139772 और महिला वोटर 126802 हैं.
मुस्लिम बाहुल्य इलाका


मुख्य तौर पर इस इलाके में मुस्लिम आबादी अधिक है. मुसलमान उम्मीदवार चुनाव में अपने-अपने भाग्य आजमाने उतरते हैं. हिंदू वोट भी निर्णायक होते हैं. देखा जाए तो आर्थिक तौर पर लोगों के हालात नहीं बदले. जनता के मुद्दे और सियासतदानों के दावे के बीच बायसी आज भी फंसी हुई है. इस दफे, औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम की पार्टी भी चुनाव में कमर कसने की तैयारी कर रही है. कहा जा रहा है कि एआइएमआइएम ने कांग्रेस और राजद गठबंधन के लिए इस सीट पर चुनौती बढ़ा दी है. एआईएमर्आइ के दखल देने से क्या बायसी का सियासी समीकरण बदलेगा? ये चर्चा का विषय क्षेत्र में बना हुआ है. इस सीट से निर्दलीय विधायक और जदयू समर्थित सैयद रुकनुद्दीन ने एआईएमआई ज्वाइन कर लिया है.
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