बिहार चुनाव 2020: बनमनखी में BJP को अपनों से ही मिली थी कांटे की टक्कर, इस बार महिला वोटर्स का दबदबा

बनमनखी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को लगातार 4 चुनावों से जीत मिल रही है. (फाइल फोटो)
बनमनखी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को लगातार 4 चुनावों से जीत मिल रही है. (फाइल फोटो)

2015 के चुनाव में एनडीए (NDA) के उम्मीदवार रहे बिहार सरकार (Bihar Government) के पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि को राजद (RJD) कांटे की टक्कर मिली थी.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 1:20 PM IST
  • Share this:
पू​र्णिया. पिछले करीब तीन महीने से बिहार (Bihar) का पूर्णिया जिला राष्ट्रीय सुर्खियों में है. कारण विधानसभा चुनाव (Assembly Election) से ज्यादा वहां मूल निवासी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की संदिग्ध मौत रही है. राजनीतिक नजरिए से भी ये जिला बिहार में काफी महत्व रखता है. चीनी मिल के कारण कभी राष्ट्रीय फलक पर औद्योगिक पहचान रखने वाले बनमनखी विधानसभा सीट पूर्णिया का ही हिस्सा है. वर्ष 2015 में जनता दल यूनाइइटे के महागठबंधन में चले जाने से चुनावी समीकरण बदल गया था, जिससे बीजेपी प्रत्याशी को अपने ही लोगों से कड़ी चुनौती मिली थी. इस सीट पर पुरुषों की तुलना में महिला वोटर्स अधिक हैं.

2015 के चुनाव में एनडीए (NDA) के उम्मीदवार रहे बिहार सरकार (Bihar Government) के पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि को कांटे की टक्कर मिली थी. लालू यादव की पार्टी राजद के प्रत्याशी संजीव कुमार पासवान से वो महज 708 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर सके थे. हालांकि वर्ष 2005 से लगातार विधायक बनने का उनका सिलसिला जारी रहा.  बता दें कि साल 2005 में बीजेपी के सीटिंग एमएलए देवनारायण रजक की टिकट काटकर पार्टी ने कृष्ण कुमार को उम्मीदवार बनाया था. इसके बाद से लगातार पंद्रह सालों से वह विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

एससी वोटर्स को साधने की कवायद
भाजपा के सांगठनिक स्तर पर प्रदेश मंत्री तथा मौजूदा राष्ट्रपति के चुनाव में पार्टी ने कृष्ण कुमार को प्रस्तावक बना चुकी है. इसके अलावा कई जिलों के पार्टी के स्तर से प्रभारी का दायित्व भी इन्हे सौंपा गया है. प्रतिनिधित्व के तौर जिस जाति से कृष्ण सम्बन्ध रख रहे हैं, एससी कोटे में उसकी बहुलता विधानसभा क्षेत्र में है. ऐसे में इस वर्ग को साधने का प्रयास बीजेपी के अलावा दूसरे दल भी करेंगे. इस चुनाव में भी बीजेपी प्रत्याशी का मुकाबला महागठबंधन के ही किसी उम्मीदवार से होना तय माना जा रहा है.
कब-कब किसको मिली जीत


साल 1962 में बनमनखी विधानसभा के पहले चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए गए भोला पासवान शास्त्री इस सीट से जीते थे. इसके बाद 1962 में आईएनसी से ही बालदेव सर्राफ, 1969 एवं 1972 में आईएनसी के रसिक लाल ऋषिदेव, 1977 मे जेएनपी से बालबोध पासवान, 1980 में आईएनसीयू से जयकांत पासवान, 1985 मे आईएनसी से एक बार फिर रसिक लाल ऋषिदेव, 1990 मे बीजेपी पुन? 1995 में जनता दल से चुन्नी लाल राजवंशी, 2000 में बीजेपी से देवनारायण रजक तथा वर्ष 2005 से अब तक बीजेपी से कृष्ण कुमार ऋषि को जीत मिली है.

आरक्षित है सीट
बनमनखी विधानसभा का गठन 1962 में हुआ. तब से लेकर अब तक यह अनुसूचित जाति कोटे के लिए आरक्षित है. वर्ष 2010 में हुई नई परिसीमन में बीकोठी प्रखंड की छह नई पंचायतों को जोड़ा गया. इससे पूर्व बीकोठी की पांच पंचायतें इसमें शामिल थी. इस सीट पर कुल 3 लाख 3 हजार 567 मतदाता हैं. इसमें पुरुष 1 लाख 46 हजार 300 व महिला मतदाता 1 लाख 57 हजार 254 हैं.

कृषि आय का मुख्य जरिया
बनमनखी विधानसभा क्षेत्र में की अधिकतर आबादी के लिए जीविका का साधन खेती किसानी ही है. चीनी मिल के कारण नब्बे के दशक तक यह इलाका गन्ना उत्पादन में अव्वल रहा. इसके बाद मिल बंद होने के बाद यहां कृषि का स्वरूप बदला और अब केले एवं मकई की खेती प्रमुखता से की जाती है. इस दौरान क्षेत्र की नगदी फसल मक्का ही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज