भारत-चीन युद्ध हुआ तो टारगेट अचीव करने में Air force की ये मदद करेगा बिहार
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भारत-चीन युद्ध हुआ तो टारगेट अचीव करने में Air force की ये मदद करेगा बिहार
(फाइल तस्वीर)

रक्षा मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर (Deputy Director in the Ministry of Defense) रह चुके इंडियन एयरफोर्स के पूर्व ग्रुप कैप्टन अरविंद कुमार सिंह के अनुसार भारतीय एयरफोर्स की क्षमता अब काफी अधिक है और चीन की किसी भी हिमाकत पर उसे भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

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पटना. लद्दाख (Laddakh) में भारतीय और चीनी सेना (Indian and Chinese Army) के बीच टेंशन बरकरार है. जानकारी के अनुसार चीन अपने क्षेत्र में एयरबेस के निर्माण की गतिविधियां जारी रखे हुए हैं. इसी तरह भारत के सिक्किम (Sikkim) से लगी उत्तर पूर्वी सीमा पर भी चीन अपनी तैयारी में लगा है. वहीं, भारत की ओर से भी सभी तैयारियां हैं और देश मजबूती के साथ चीन की हिमाकत का जवाब देने को तैयार है. इन दोनों इलाकों में 9 और 10 मई से ही सीमा के दोनों ओर हजार से ज्यादा सैनिकों का जमाव़ड़ा हो चुका है. हालांकि, राजनयिक स्तर पर भी बातचीत जारी है. हालांकि अगर युद्ध (War) की स्थिति आती है तो बिहार के एयरफोर्स स्टेशन (Airforce Station) भी इस युद्ध में बड़ी भूमिका निभाएंगे.

रक्षा मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर रह चुके पूर्व ग्रुप कैप्टन अरविंद कुमार सिंह के अनुसार चीन से युद्ध की स्थिति में बिहार के पटना जिले में स्थित बिहटा, पूर्णिया का चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन और दरभंगा के केयर एंड मेंटेनेंस वायु सैनिक हवाई अड्डे की बेहद अहम भूमिका होगी.

दरअसल बिहटा एयर फोर्स स्टेशन लगभग 40 किलोमीटर यानी करीब 900 एकड़ में फैला हुआ है जिसमें भारतीय वायु सेना के उच्च रैंक के अधिकारी रहते हैं. यहां से फाइटर जेट उड़ान भर सकता है और मिनटों में चीन की सीमा में घुसकर तबाही मचा सकता है. बिहटा स्टेशन में बहुत सारे जहाजों में एक साथ रीफ्यूलिंग की भी कैपिसिटी है जो भीषण युद्ध की स्थिति में एयरफोर्स के लिए बेहद अहम होगा.



भारत चीन युद्ध की स्थिति में एक्टिव हो जाएगा बिहटा एयरफोर्स स्टेशन.

अरविंद कुमार सिंह बताते हैं कि पूर्णिया एयरफोर्स स्टेशन को चूनापुर हवाई अड्डा (एयरफोर्स स्टेशन) के रूप में भी जाना जाता है. यह छावनी क्षेत्र के भीतर स्थित है और केवल सैन्य उपयोग के लिए ही सीमित है. यहां से नेपाल तथा पूर्वोत्तर भारत जाने का रास्ता है सड़क मार्ग सुगम है. असम, सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा भूटान से काफी नजदीक होने के कारण भारत-चीन युद्ध की स्थिति में इसकी काफी अहम भूमिका हो जाएगी.

अरविंद कुमार सिंह कहते हैं कि इसी तरह दरभंगा एयर बेस में केयर्स एंड मेंटेनेंस की सुविधा है. जाहिर है किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में ये एयरफोर्स स्टेशन काफी अहम भूमिका निभाएगा. सबसे खास ये है कि यह नेपाल की सीमा से काफी पास है. अगर चीन हम पर हमला करता है तो इस एयरफोर्स स्टेशन की काफी बड़ी भूमिका होगी.

दरभंगा एयरफोर्स स्टेशन का नेपाल के करीब होना भारत के लिए महत्वपूर्ण है.


बकौल अरविंद कुमार सिंह दरभंगा, पूर्णिया, बिहटा फाइटर जहाज ऑपरेट कर सकते हैं. आगे बढ़ाने के लिए यहां से हरेक फाइटर एयर टू एयर रेंज बढ़ा सकते हैं. ये महत्वपूर्ण इसलिए होगा कि जरूरत पर रीफ्यूलिंग भी की जा सकती है और समय रहते टारगेट अचीव किया जा सकता है. इन तीन में बिहटा और चूनापुर से फाइटर प्लेन उड़ सकते हैं वहीं टेक्निकल सपोर्ट के लिए दरभंगा एयरफोर्स स्टेशन भी महत्वपूर्ण साबित होगा.

इंडियन एयरफोर्स में फाइटर पायलट रहे ग्रुप कैप्टन अरविंद कुमार सिंह कहते हैं कि भारतीय एयरफोर्स की क्षमता अब काफी अधिक है और चीन की किसी भी हिमाकत का वह करारा जवाब दे सकती है. यही नहीं भारत अपनी सीमा में रहते हुए भी चीन को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में बिहार, बंगाल और असम के एयरफोर्स स्टेशन देश की पूर्वी सीमा की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

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