दर्दनाक हादसा: पूर्णिया में थर्मोकोल से बनी जुगाड़ नाव पलटी, 8 साल के बच्चे की डूबने से मौत
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दर्दनाक हादसा: पूर्णिया में थर्मोकोल से बनी जुगाड़ नाव पलटी, 8 साल के बच्चे की डूबने से मौत
SDRF व स्थानीय ग्रामीणों ने निकाला बच्चे का शव

SDRF की टीम ने स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से बच्चे के शव को बरामद किया. ग्रामीणों का कहना है कि थर्मोकोल की जुगाड़ नाव के स्थान पर असली नाव होती तो यह घटना नहीं घटती और बच्चा नहीं मरता. उन लोगों ने कई बार ब्लॉक प्रशासन से नाव की मांग की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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पूर्णिया. जनपद के बायसी अनुमंडल के मीनापुर गांव में दिल दहला देने वाली एक घटना में 8 वर्षीय बच्चे तारिक की पानी में डूबकर मौत (drowning death) हो गई. दरअसल हादसे के समय तारिक अपने दोस्तों के साथ थर्मोकोल (Thermocol) वाली जुगाड़ नाव (Makeshift boat) से नदी पार करने की कोशिश कर रहा था. ग्रामीणों का आरोप है कि उन लोगों ने स्थानीय प्रशासन से कई बार नाव की मांग की है लेकिन प्रशासन ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते स्थानीय लोगों को जुगाड़ वाली नाव का सहारा लेना पड़ता है.

बता दें कि मोहम्मद तारिक सोमवार शाम लगभग पांच बजे अपने अन्य दो दोस्तों के साथ थर्मोकोल से बनी एक जुगाड़ नाव से बेरिया ईदगाह के समीप ताला नदी (Taala River) को पार कर रहा था और इसी दौरान नाव पलट गई और तीनों बच्चे पानी की तेज धार की चपेट में आ गए. दो बच्चों ने तो तैरकर किसी तरह अपनी जान बचा ली, पर तारिक को तैरना नहीं आता था लिहाजा वो डूब गया.

अगले दिन SDRF की मदद से ढूंढा जा सका शव
स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि सैय्यद समसुद्दीन ने बताया कि घटना के बाद एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी फोन किया गया पर टीम के सदस्य मंगलवार की सुबह आ सके. सुबह-सुबह ही SDRF  की टीम ने स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से बच्चे के शव को बरामद किया. जिसके बाद तत्काल डगरुआ के थाना प्रभारी और अंचलाधिकारी को इसकी सूचना दी गई. मृतक के परिजन और मुखिया प्रतिनिधि समसुद्दीन की मदद से एक होमगार्ड जवान के साथ ऑटो में बच्चे के शव को रख कर पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया भेजा गया.
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डगरुआ के अंचलाधिकारी प्रवीन कुमार वत्स ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द बच्चे की नदी में डूबने से हुई मौत के मामले में राहत राशि परिवार को दिलवाने का प्रयास किया जाएगा. वहीं दूसरी ओर मुखिया प्रतिनिधि का कहना है कि शायद थर्मोकोल की नाव के स्थान पर असली नाव होती तो यह घटना ही नहीं घटती और बच्चा नहीं मरता. उन्होंने आगे कहा कि गांव के लोगों ने कई बार ब्लॉक में नाव की मांग की है लेकिन अभी तक नाव न मिलने की वजह से गांव के लोगों को जुगाड़ नाव का ही सहारा लेना पड़ता है.
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