बिहार चुनाव 2020: क्या ओवैसी की आक्रमकता से खौफ खा रहे हैं RJD-कांग्रेस के नेता?
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बिहार चुनाव 2020: क्या ओवैसी की आक्रमकता से खौफ खा रहे हैं RJD-कांग्रेस के नेता?
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की बिहार की 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM ने बिहार की जिन 50 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है उनमें सीमांचल के चार जिलों की 24 विधानसभा क्षेत्रों में से 15 सीटें शामिल हैं

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पूर्णिया. मुस्लिम बहुल सीमांचल की कुल 24 सीटों पर लगभग आधे से अधिक जगहों पर अगर इस बार मुस्लिम वोटों का एकतरफा ध्रुवीकरण हुआ तो कई जगहों पर असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM बनाम कांग्रेस, राजद और जदयू के कोण बनेंगे. जाहिर है अगर ऐसा हुआ तो एक नये राजनीतिक स्वरूप उभरने के साथ ही नये सामाजिक समीकरण भी समाने आ सकते हैं. इसकी एक बड़ी वजह है पिछले विधानसभा उपचुनाव में किशनगंज से AIMAIM का प्रदर्शन. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि यही वजह है कि सीमांचल में इस बार कांग्रेस के साथ ही राजद और जदयू अपने आधार वोटों को लेकर रणनीतिक हो रहे हैं.

गौरतलब है कि पूर्णिया प्रमंडल में जिले 4 जिले- पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार हैं. मजबूत वोट बैंक के हिसाब से यह मुस्लिम बहुल इलाका है.  यहां मुस्लिम वोटों पर राजद और जदयू से अधिक कांग्रेस की पैठ रही यही और इसबार कांग्रेस की चिंता AIMIM को लेकर बढ़ गई है. इसके साथ ही राजद और जदयू भी चिंता में पड़ी हुई है क्योंकि असदुद्दीन ओवैसी दोनों ही दलों के खिलाफ आक्रामक हैं.

बता दें कि पूर्णिया प्रमंडल यानि सीमांचल में जिलावार वर्तमान महागठबंधन की सीटिंग सीटें यूं हैं -  पूर्णिया की 7 सीटों में 2, अररिया की 6 में 1, कटिहार की 7 में 3, किशनगंज की 4 में 1. यहां पहले दो सीटें थीं जिसपर 1 पर कांग्रेस विधायक के सांसद बनने के बाद AIMIM ने उपचुनाव में कांग्रेस से छीन ली थी.



AIMIM ने सीमांचल की जिन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है उनमें किशनगंज की चार सीटें- किशनगंज, कोचाधामन, बहादुरगंज, ठाकुरगंज.  पूर्णिया की  तीन सीटेें- अमौर, बायसी. कस्बा. अररिया की तीन सीटें- अररिया, जोकीहाट, नरपतगंज. कटिहार की पांच सीटें-  बलरामपुर, बरारी, कदवा, प्राणपुर, मनिहारी शामिल हैं.  मो. हन्नान जो पूर्णिया में  AIMIM के स्थानीय नेता हैं. वे कहते हैं कि AIMIM अपने 'जय भीम-जय मीम' के नारे के साथ काम कर रही है.
जाहिर है इस तरह  AIMIM कांग्रेस के पुराने वोट बैंक पर लगातार अपनी ओर झुकाने की कोशिश कर रहा है. वहीं पूर्णिया कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंदु सिन्हा कहतीं हैं कि भाजपा, AIMIM को कांग्रेस के खिलाफ हाथ आया मौका मान कर राजनीति कर रही है. यही वजह है कि देश विरोधी बयानबाजी के बावजूद AIMIM प्रमुख के खिलाफ एक्शन नहीं लेती. कांग्रेस के लोग चुनावी चर्चा में AIMIM को भाजपा की टीम-बी कहते हैं.

कांग्रेस राजद के अलावा एनडीए के घटक दल जदयू को भी मुस्लिम मतों के उनकी तरफ आने का भरोसा नहीं है. हालांकि वह इसे महज राजद-कांग्रेस महागठबंधन के आधार वोट को खिसकना भर मानता है. जदयू राज्य परिषद सदस्य, राकेश कुमार के मुताबिक AIMIM को कांग्रेस की तरह ही कम्यूनल पहले से बताता आ रहा है. इधर कांग्रेस के बिहार प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वी के ठाकुर मानते हैं कि AIMIM को किशनगंज सीट पर राजनीतिक चूक से जीत मिली थी, पर इसबार उनकी पार्टी काफी सतर्क चल रही है.
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