व्यक्ति विशेष: बिहार के राजनीतिक इतिहास के विदेह हैं पूर्व सीएम भोला पासवान शास्त्री

पूर्णिया जिले के के.नगर प्रखंड के बैरगाछी गांव में हरसाल 21 सितंबर को राजकीय समारोह के साथ शास्त्री जी की जयंती मनती है.

Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: September 23, 2018, 1:00 PM IST
व्यक्ति विशेष: बिहार के राजनीतिक इतिहास के विदेह हैं पूर्व सीएम भोला पासवान शास्त्री
भोला पासवान शास्त्री की आदमकद प्रतिमा
Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: September 23, 2018, 1:00 PM IST
तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री भले ही अब इस दुनिया में नहीं हो लेकिन वो बिहार की राजनीतिक इतिहास में विदेह कहे जाने वाले एक मात्र नेता हैं. विदेह का अर्थ होता है सार्वजनिक जीवन और सांसारिक जीवन में रहते हुए भी व्यक्तिगत स्वार्थ से परे होना यानि देह रहते हुए भी देह की चिंता नही करना.

भोला पासवान शास्त्री सादा जीवन और उच्च विचार के लिए बिहार की राजनीति में जाने जाते हैं. स्वतंत्रता संग्राम से आजादी के बाद कांग्रेस के साथ जुड़कर कई महत्वपूर्ण पदों सहित मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भी भोला पासवान शास्त्री ने कोई भी निजी धन संपत्ति इकट्ठा नहीं की. यही कारण है कि उन्हें सादगी के लिए जाना जाता है. शास्त्रीजी के गुजरे कई साल हो गये उनके कुछ परिजन जो आज भी हैं वे मामूली जीवन जीते हैं.

पूर्णिया जिले के के.नगर प्रखंड के बैरगाछी गांव में हरसाल 21 सितंबर को राजकीय समारोह के साथ शास्त्री जी की जयंती मनती है. गांव से लगे ऐतिहासिक काझा कोठी डाकबंगले में पिछले कुछ सालों पहले स्वर्गीय शास्त्रीजी की प्रतिमा लगाई गयी है और उन्हीं की याद में पूर्णिया शहर के डीआईजी चौक का नाम बदल कर शास्त्री जी के नाम के साथ जोड़ा गया है और यहां भी उनकी प्रतिमा लगाई गयी.

पिछले चार पहले पूर्णिया में जब कृषि महाविद्यालय की स्थापना हुई तो उसका नामकरण भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय किया गया. शास्त्री जी को कोई संतान नहीं था और उनके परिवार के जो सदस्य उनकी संपत्ति और पारिवारिक प्रतिष्ठा से जुड़े हैं वो भी मामूली जीवन बसर ही करते हैं. शास्त्री जी के गांव और घर का विकास सरकारी कोटे से किया गया है और उनकी जयंती तथा पुण्यतिथि राजकीय समारोह के साथ आयोजित करने का रिवाज है.

पूर्णिया के वरिष्ठ नागरिक और पहले सांसद फणीगोपाल सेन के बेटे देवनाथ सेन शास्त्री जी की सादगी की कई कहानियां कहते हैं जिसमें एक महत्वपूर्ण कहानी के मुताबिक सीएम रहते हुए शास्त्रीजी जमीन पर काला कंबल बिछाकर बैठते थे और अधिकारियों के साथ बैठक करते थे. इस तरह की कई यादें पूर्णिया के लोगों के बीच मौजूद हैं जिससे लोग एक सादगी के साथ जीवन जीने वाले राज्य के मुख्यमंत्री के इतिहास को याद करते हैं और खुद को गौरवान्वित मानते हैं.

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First published: September 23, 2018, 1:00 PM IST
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