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कभी नेपाल के पीएम से लेकर जेपी की पत्नी का ईलाज करने वाला प्राकृतिक चिकित्सालय बना तबेला

चिकित्सालय के कोषाध्यक्ष संजय चौधरी कहते हैं कि इस चिकित्सालय में ईलाज कराने के लिए गिरिजा प्रसाद कोईराला, जयप्रकाश नारायण की पत्नी के अलावे बिहार और देश के कई राज्यों से लोग ईलाज कराने आते थे.
चिकित्सालय के कोषाध्यक्ष संजय चौधरी कहते हैं कि इस चिकित्सालय में ईलाज कराने के लिए गिरिजा प्रसाद कोईराला, जयप्रकाश नारायण की पत्नी के अलावे बिहार और देश के कई राज्यों से लोग ईलाज कराने आते थे.

चिकित्सालय के कोषाध्यक्ष संजय चौधरी कहते हैं कि इस चिकित्सालय में ईलाज कराने के लिए गिरिजा प्रसाद कोईराला, जयप्रकाश नारायण की पत्नी के अलावे बिहार और देश के कई राज्यों से लोग ईलाज कराने आते थे.

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पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया (Purnia) जिले में रानीपतरा (Ranipatra) स्थित ऐतिहासिक प्राकृतिक चिकित्सालय आज मवेशी का तबेला बना हुआ है. इस चिकित्सालय में कभी नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला (Girija Prasad Koirala) से लेकर जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan) की पत्नी तक का ईलाज हुआ था. यह चिकित्सालय एक समय बिहार समेत पूरे देश में मशहूर था. आज यह अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है.

1956 में हुई थी प्राकृतिक चिकित्सालय की स्थापना
इस चिकित्सालय की स्थापना सन 1956 में हुई थी. पहले यह सर्वोदय आश्रम (Sarvodaya Ashram) का अंग था लेकिन बाद में यह स्थानीय राजनीति के चलते सर्वोदय आश्रम से अलग हो गया. इन दिनों प्राकृतिक चिकित्सालय में मरीज और डाक्टर के बजाय भैंस और बकरी बांधा हुआ है. इसके अलावे कमरे में कबाड़ का सामान रखा है.

यहां कई राज्यों से लोग ईलाज कराने आते थे 
चिकित्सालय के कोषाध्यक्ष संजय चौधरी कहते हैं कि इस चिकित्सालय में ईलाज कराने के लिए गिरिजा प्रसाद कोईराला, जयप्रकाश नारायण की पत्नी के अलावे बिहार और देश के कई राज्यों से लोग ईलाज कराने आते थे. कहते हैं कि यहां प्राकृतिक विधि से गंभीर बिमारियों की भी बहुत अच्छी चिकित्सा होती थी. लेकिन पिछले दो सालों से यहां कोई चिकित्सक तक नहीं है. पूर्व में यहां डॉ. रविन्द्र चौधरी लोगों का ईलाज करते थे. उनके मरने के बाद से यह वीरान पड़ा है. वहीं पूर्व डॉक्टर के बेटे आशीष कुमार कहते हैं कि यह चिकित्सालय अपना गौरव खोता जा रहा है. जब तक लोगों का सहयोग नहीं होगा तब तक इस चिकित्सालय का विकास नहीं हो पाएगा. उन्होंने जनप्रतिनिधि और सरकार से भी इस दिशा में पहल करने की अपील की.



सदर विधायक विजय खेमका ने भी इस चिकित्सालय के अतीत के गौरव का बखान करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी इस चिकित्सालय के विकास के लिए आवाज उठाया है. सरकार भी प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसके विकास के लिए वे लोग पहल कर रहे हैं.

बहरहाल, कभी देश और दुनिया में नाम बिखेरने वाला और कई महापुरुषों तक को स्वास्थ लाभ देने वाला प्राकृतिक चिकित्सालय खुद बीमार है. स्थानीय लोगों ने इसे मवेशी का तबेला बना दिया है. जरूरत है सरकार और प्रशासन इस चिकित्सालय की दशा और दिशा सुधारने में सहयोग करे ताकि यह चिकित्सालय फिर से अपने अतीत का गौरव हासिल कर सके.

(रिपोर्ट- कुमार प्रवीण)

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