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बिहार: कोसी-मिथिलांचल में आज भी कायम है दिवाली की अनोखी परंपरा 'हुक्का-पाती'

News18 Bihar
Updated: October 26, 2019, 5:43 PM IST
बिहार: कोसी-मिथिलांचल में आज भी कायम है दिवाली की अनोखी परंपरा 'हुक्का-पाती'
कोसी और मिथिलांचल क्षेत्र में दिवाली मनाने की अनोखी परंपरा हुक्का-पाती आज भी कायम है.

दीया जलाने के बाद दिवाली की रात हर घर के दरवाजे पर लोग हुक्का-पाती को जलाकर घुमाते और भांजते भी हैं. इसके साथ ही दिवाली मना लिए जाने का रिवाज पूरा होता है.

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पूर्णिया. 'देवाली के ऐलै त्योहार, हुक्का-पाती धू-धू, लक्ष्मी घर, दरिद्दर बहार...' दीपावली के अवसर पर गाई जाने वाली देसज शैली की इस लोकगीत से पूर्णिया, कटिहार और अंग क्षेत्र के अधिकांश गांवों के लोग वाकिफ हैं. ये लोकगीत बिहार की उस अनोखी परंपरा की वाहक है जो हजारों वर्षों से इस क्षेत्र के लोग सदियों से निभाते आ रहे हैं. दरअसल भारतीय संस्कृति और परंपरा आज भी गांव के लोगों ने बचा कर रखी है. इसी में से एक है कोसी, मिथिलांचल और अंग क्षेत्र में  दीपावली के अवसर पर 'हुक्का-पाती' खेलने की परंपरा.

कोसी-मिथिलांचल में दिवाली मनाने की विशेष परंपरा
भारत को अगर हम 6 दिशाओं में विभाजित करके देखें तो एक होगा पश्चिम भारत, दूसरा पूर्वी भारत, तीसरा उत्तर भारत, चौथा दक्षिण भारत, पांचवां मध्यभारत और पूर्वोत्तर राज्य. हर क्षेत्र दीपावली मनाने के की अपनी अलग परंपराएं भी हैं. ऐसे ही बिहार बिहार के अंग क्षेत्र, कोसी और मिथिलांचल में महज दीया जलाकर ही नहीं बल्कि 'हुक्का-पाती' जलाकर दीपावली मनाई जाती है.

बाजारों में भी होने लगी है हुक्का-पाती की बिक्री

कोसी और मिथिलांचल में बगैर हुक्का-पाती रिवाज के दिवाली मनती ही नहीं. हुक्का-पाती सनाठी (पटसन के पौधे से सन निकालने के बाद बचा हुआ लकड़ी जैसा हिस्सा) और पाट (सन) की रस्सी से  बनाते हैं. इसे आकर्षक अंदाज में बनाया जाता है और कोसी मिथिलांचल के दिवाली बाजार में दीयों और अन्य सामानों की तरह ही बड़े पैमाने पर हुक्का-पाती की बिक्री भी होती है.

इस पूरे इलाके में जूट के उत्पादन की पृष्ठभूमि जुडी है और दशहरा से दिवाली के बीच बड़े पैमाने पर जूट की सनाठी जूट निकालने के बाद उपलब्ध होती है.


पितरों को प्रकाश दिखाने की श्रद्धा से जुड़ी परंपरा
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इलाके के बुजुर्ग और पारंपरा एवं संस्कृति के जानकार बैद्यनाथ शर्मा और अमरनाथ झा कहते हैं कि हुक्का-पाती की पारंपरिकता और मान्यता अपने पितरों और पूर्वजों को सम्मान देने से जुड़ी है और यह सदियों से चली आ रही है. इसके तहत दक्षिण दिशा में हुक्का-पाती को जलाकर हम पितरों को प्रकाश दिखाने की परंपरा श्रद्धा के साथ निभाते हैं.

हुक्का-पाती के साथ 5 बार तरपन करने की परंपरा
दिवाली की शाम में घर के सभी सदस्य नहा धोकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने के बाद पूजा घर के दीये से हुक्का-पांती में आग सुलगाते हैं और घर के सभी दरवाजों पर रखे गए दीये में लगाते हुए लक्ष्मी घर, दरिद्र बाहर, लक्ष्मी घर, दरिद्र बाहर...कहते हुए मुख्य द्वार से बाहर निकलते हैं. बाहर निकलकर सभी सदस्य एक जगह पर हुक्का-पाती रखते हैं और पांच बार उसका तरपन करते हैं.

इस तरह पूरा होता है दिवाली मनाने का रिवाज
दीया जलाने के बाद दिवाली की रात हर घर के दरवाजे पर लोग हुक्का-पाती को जलाकर घुमाते और भांजते भी हैं. इसके साथ ही दिवाली मना लिए जाने का रिवाज पूरा होता है. इस इलाकों के बाजारों और घरों में हुक्का-पाती पहुंच चुकी है और लोग इसके साथ दिवाली मनाने की तैयारियां भी हर साल की तरह इस साल भी कर चुके हैं.

रिपोर्ट- राजेंद्र पाठक

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First published: October 26, 2019, 4:05 PM IST
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