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...तो क्या दो बार मना लिया गया पूर्णिया का 250वां स्‍थापना दिवस?

अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं, यहां तक कि लोगों को भी समझ नहीं आ रहा है कि इसे प्रशासन की भूल समझें या फिर कुछ और. (फाइल फोटो)

अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं, यहां तक कि लोगों को भी समझ नहीं आ रहा है कि इसे प्रशासन की भूल समझें या फिर कुछ और. (फाइल फोटो)

2019 में भी 14 फरवरी को ही उस समय जिले के डीएम प्रदीप कुमार झा ने 250 साल का जश्न मना लिया था और अब एक बार फिर डीएम राहुल कुमार ने धूमधाम से जिले के 250 साल पूरे करने का जश्न मना लिया.

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पूर्णिया. 14 फरवरी को पूर्णिया के 250 साल पूरे होने पर जिले में हर तरफ जश्न का माहौल था. देशभर से लोगों ने पूर्णिया वासियों को बधाई दी. इस दौरान मनाया गया महोत्सव देश भर की सुर्खियों में रहा. लेकिन अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पूर्णिया की स्‍थापना के 250 साल का जश्न दो बार मना लिया गया. इसका कारण है कि 2019 में भी 14 फरवरी को ही उस समय जिले के डीएम प्रदीप कुमार झा ने 250 साल का जश्न मना लिया था और अब एक बार फिर डीएम राहुल कुमार ने धूमधाम से जिले के 250 साल पूरे करने का जश्न मना लिया.

क्या महज एक भूल है
अब इस बात पर सवाल उठ रहे हैं, यहां तक कि लोगों को भी समझ नहीं आ रहा है कि इसे प्रशासन की भूल समझें या फिर कुछ और. स्‍थानीय लोगों का कहना है कि स्‍थापना वर्ष और कैलेंडर को गलत तरीके से पेश करने का अधिकार न तो किसी अफसर को है और न ही किसी इतिहासकार को. वहीं अधिकारी अब इस बात से बचते नजर आ रहे हैं.

नहीं बता रहे कारण
इस बारे में जब न्यूज 18 के संवाददाता ने प्रशासन से जुड़े अधिकारियों से सवाल पूछा तो वे इससे बचते दिखे. कुछ ने कहा कि यह एक मामूली बात है. हालांकि उनसे यह चूक हुई है या इस दोहराव के पीछे कोई कारण है ये वह नहीं बता रहे हैं. वहीं पूर्णिया के कांग्रेस नेता वीके ठाकुर ने स्थापना वर्ष के दुहराव के पीछे के औचित्य पर सवाल दागते हुए राज्य सरकार से इस हालत पर जवाबदेही तय कर कारवाई करने की मांग भी की है. वे कहते हैं कि साल 250 या 251 के एक मामूली सवाल पर जिला प्रशासन की चुप्पी ने यह बता दिया है कि गलतियों पर चुप्पी साधकर जिला स्थापना दिवस मनाया जा रहा है जिसे जनहित में कभी भी वाजिब नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे नई पीढ़ी को इतिहास बताने में दिगभ्रमित करने का काम हुआ है.

जवाब में विधायक ने दी मुस्कुराहट
इस संबंध में प्रोफेसर मिहिर सिन्हा, प्रो. शम्भू लाल वर्मा, अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, सुदीप राय ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे गलत ठहराया है और इस साल 251वां स्‍थापना दिवस मनाए जाने को उचित बताया. चौंकाने वाली बात यह रही कि जब इस संबंध में स्थानीय विधायक विजय खेमका सवाल किया गया तो वे बस मुस्कुरा कर वहां से आगे बढ़ गए.

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