तल्ख होते रिश्ते, अब नेपाल ने भारतीय टीवी चैनलों पर लगाया प्रतिबंध
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तल्ख होते रिश्ते, अब नेपाल ने भारतीय टीवी चैनलों पर लगाया प्रतिबंध
नेपाल में भारतीय टीवी चैनलों पर प्रतिबंध (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सीमावर्ती लोगों का कहना है कि उनके लिए ये अजीब था जब नेपाल में रह रहे परिजनों ने उन्हें ये बताया कि वे भारतीय टीवी चैनलों को नहीं देख पा रहे हैं. पूर्णिया की सीनियर सिटीजन स्वाति वैश्यंत्री कहती हैं कि ये चीन की विस्तारवादी सोच और भारत के साथ गलत कूटनीति करने का परिणाम है और इससे ये साफ होता है कि नेपाल चीन के प्रभाव में है.

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पूर्णिया. भारत-नेपाल (India-Nepal Relation) के बीच संबंध इन दिनों तल्ख होते जा रहे हैं. यहां तक कि नेपाल में भारतीय टीवी चैनलों (Indian Television ban in Nepal) पर प्रतिबंध भी लगा दिए गए हैं जिसे लेकर बिहार-नेपाल सीमा के आस-पास के सीमांचल इलाकों में लोगों में काफी आक्रोश नजर आ रहा है. बीते दिनों सीतामढ़ी जनपद की नेपाल सीमा पर गोलीबारी में भारतीय सिपाहियों की मौत को लेकर लोगों में पहले से ही खासी नाराजगी है.

बढ़ते विवाद, तल्ख होते रिश्ते
दरअसल भारत और नेपाल के बीच इन दिनों सीमा विवाद (India-Nepal Dispute) काफी बढ़ गया है. चीन सीमा (China) को जोड़ने वाली लिपुलेख सड़क के उद्घाटन के बाद नेपाल ने लिपुलेख (Lipulekh),लिम्पियाधूरा और कालापानी (Kalapani) को नेपाल (Nepal) का हिस्सा बताया है. यही नहीं इन इलाकों को अपने नक्शे में दिखाते हुए इस नक्शे को नेपाली संसद से पास भी करवाया है. बता दें कि ये तीनों इलाके उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालय में मौजूद हैं. नेपाली सरकार ने नए राजनीतिक नक्शे में भारत के इन हिस्सों को भी शामिल कर लिया है.

स्थाई नहीं है ये तनाव
हालांकि सीमावर्ती इलाके के लोग इस प्रतिबंध को और भारत-नेपाल के संबंधों में तनाव को स्थाई नहीं मानते और वर्तमान हालातों के पीछे चीन का हाथ होना बताते हैं. कुछ लोग भारतीय टीवी चैनलों की ओर से भी गैर-जवाबदेह हो जाने की बात को भी एक कारण बता रहे हैं. सीमांचल के लोगों का बातचीत में कहना था कि नेपाल के साथ महाभारत कालीन सम्बन्ध देखते-देखते इतने तीखे हो जायेंगे ये कभी नहीं सोचा था. कई बुजुर्ग कहते हैं कि पूरी उम्र में उन्होंने पहली बार ये हाल महसूस किया है. उनके लिए ये अजीब था जब नेपाल में रह रहे परिजनों ने उन्हें ये बताया कि वे भारतीय टीवी चैनलों को नहीं देख पा रहे हैं. पूर्णिया की सीनियर सिटीजन स्वाति वैश्यंत्री कहती हैं कि ये चीन की विस्तारवादी सोच और भारत के साथ गलत कूटनीति करने का परिणाम है और इससे ये साफ होता है कि नेपाल चीन के प्रभाव में है. पूर्णिया के ही एक और वरिष्ठ नागरिक संजय बनर्जी कहते हैं कि नेपाल की जनता भारतीय चैनलों पर प्रतिबंध कभी नहीं पसंद करेगी. ये महज सरकार का फैसला है क्यूंकि नेपाली समाज भारतीय मिजाज के सामाजिक राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में रूचि रखती हैं. वे इन प्रतिबंध को स्थाई नहीं मानते.



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साहित्यकार चंद्रशेखर मिश्र का मत है कि चीन के प्रति भारतीय टीवी चैनलों का जारी आक्रोश इस कदर रहा कि देखते देखते ये नेपाल के प्रति भी बेजा विरोधी स्वभाव में आने लगा और इसी कारण नेपाल को कदम उठाना पड़ा. चंद्रशेखर मिश्र भारत-नेपाल संबंधों में तल्खी का एक बड़ा कारण भारतीय न्यूज चैनलों को भी मानते हैं. कटिहार के समाजसेवी वीके ठाकुर क्षोभ जताते हुए कहते हैं कि अगर नेपाल ने भारतीय टीवी चैनलों को प्रतिबंधित कर रखा है तो हमें भी नेपाल के कई रेडियो प्रसारणों को रोकना होगा जो भारतीय सीमा में भारत के प्रति लगातार जहर उगल रहे हैं. वे चीन और नेपाल के साथ मौजूदा हालात के लिए भारत सरकार को सावधान करते हैं और कहते हैं कि नेपाल से हमारे ऐतिहासिक संबंध हैं बदलते परिद्रश्य को लेकर सरकार को सचेत हो जाना चाहिए. पूर्णिया के किसान हिमकर मिश्र भी अपनी चिंता जताते हुए नेपाल के साथ बेटी-रोटी के संबंधों को मजबूत बनाए रखने के पक्षधर हैं.
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