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जयंती विशेष: सतीनाथ भादुड़ी की लेखन शैली से प्रभावित थे अमर कथाकार फणीश्वर नाथ 'रेणु'
Purnia News in Hindi

Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: March 4, 2020, 11:48 AM IST
जयंती विशेष: सतीनाथ भादुड़ी की लेखन शैली से प्रभावित थे अमर कथाकार फणीश्वर नाथ 'रेणु'
चार मार्च 1921 को फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म हुआ था.

सतीनाथ भादुड़ी का प्रसिद्ध उपन्यास ढोंढाईचरित मानस आम आदमी के आदमियत को महिमंडित करने का लोकप्रिय कथानक है. तब 'रेणु' उनके लेखन को आत्मसात कर रहे थे और 'रेणु' की रचनाओं में आंचलिकता आम आदमी के जीवन मूल्य और पिछड़े जमात के प्रति पक्षधरता इस सोहबत का प्रमाण रहा.

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पूर्णिया. हिन्दी कथा साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' (Phaniswarnath 'Renu') का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार केअररिया  ज़िला के 'औराही हिंगना' गांव में हुआ था. हालांकि रेणु के जन्मकाल में यह पूर्णिया जिला था. आज  'रेणु' की जयंती पर लोग उनको और उनकी लोकप्रिय रचनाओं की लोकमानस में भागीदारी को याद कर रहे हैं. माना जाता है कि 'रेणु'  बांग्ला साहित्यकार और विचारक सतीनाथ भादुड़ी (Bengali litterateur and thinker Satinath Bhaduri) से काफी प्रभावित थे और उनके पूर्णिया के भट्ठा बाजार आवास पर अक्सर चर्चा और विचार मंथन के साथ होते थे.

पूर्णिया के कई बुजुर्ग नागरिक और साहित्यकारों ने ये दृश्य देखें हैं. भादुड़ी जी का प्रसिद्ध उपन्यास ढोंढाईचरित मानस आम आदमी के आदमियत को महिमंडित करने का लोकप्रिय कथानक है. तब  'रेणु'  उनके लेखन को आत्मसात कर रहे थे और  'रेणु'  की रचनाओं में आंचलिकता आम आदमी के जीवन मूल्य और पिछड़े जमात के प्रति पक्षधरता इस सोहबत का प्रमाण रहा.

पूर्णिया के साहित्यप्रेमी अजय सान्याल और चंद्रशेखर मिश्र बताते हैं कि रेणु पूर्णिया के दो बांग्ला लेखकों भादुड़ी और बनफूल की रचनाधर्मिता से ओतप्रोत थे. सतीनाथ भादुड़ी फ्रीडम फाइटर भी थे और लेखन के साथ साथ समाज सुधार के काम भी किया करते थे.



'रेणु' ने आंचलिकता के रस और सामाजिक यथार्थ के साथ अपने उपन्यासों की रचना की है और उनकी आंचलिकाता का बड़ा या प्रधान क्षेत्र तत्काल का पूर्णिया जिला था जो बंगाल और नेपाल की संस्कृति का करीबी था.



राजकपूर ने तीसरी कसम बनाकर  'रेणु'  के चिंतन और लेखन को बड़ा मुकाम दिया. रेणु जी राजनीतिक तौर पर समाजवादी सोच रखते थे. आज पूर्णिया सहित पूरे प्रमंडल के जिलों के स्कूलों साहित्यिक संगठनों और सामाजिक संगठनों में रेणु जी जयंती कई कार्यक्रमों के साथ मनाई जा रही है.

प्रसिद्ध कथा साहित्य  मैला आंचल, पंचलाइट, ठेस, आत्मसाक्षी, जुलूस , परती परिकथा, लाल पान की बेगम सहित कई यादगार कथा साहित्य.

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First published: March 4, 2020, 11:33 AM IST
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