मक्के की खेती में पूर्णिया ने अमेरिका को पछाड़ा, बंपर पैदावार से लाखों लोगों को मिल रहा रोजगार

पूर्णिया (Purnia) में किसानों द्वारा मक्के की बंपर पैदावार से हजारों मजदूरों को भी रोजगार मिलता है. व्यवसायी मनोज सर्राफ ने कहा कि मक्का का रेट उसकी क्वालिटी और मास्चराईजेशन पर निर्भर करता है. यहां 14 प्रतिशत से नीचे मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत 1500 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि इससे अधिक मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है

पूर्णिया (Purnia) में किसानों द्वारा मक्के की बंपर पैदावार से हजारों मजदूरों को भी रोजगार मिलता है. व्यवसायी मनोज सर्राफ ने कहा कि मक्का का रेट उसकी क्वालिटी और मास्चराईजेशन पर निर्भर करता है. यहां 14 प्रतिशत से नीचे मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत 1500 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि इससे अधिक मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है

पूर्णिया (Purnia) में किसानों द्वारा मक्के की बंपर पैदावार से हजारों मजदूरों को भी रोजगार मिलता है. व्यवसायी मनोज सर्राफ ने कहा कि मक्का का रेट उसकी क्वालिटी और मास्चराईजेशन पर निर्भर करता है. यहां 14 प्रतिशत से नीचे मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत 1500 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि इससे अधिक मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है

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पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया (Purnia) और सीमांचल में मक्का की जबरदस्त पैदावार ने प्रति एकड़ उत्पादन में अमेरिका को भी पीछे छो़ड़ दिया है. पूर्णिया का गुलाबबाग मंडी एशिया का सबसे बड़ा मक्का मंडी बन गया है. यहां से कई देशों में मक्के की सप्लाई होती है. जिले में मक्का की खेती (Corn Production) से दो लाख से अधिक किसान जुड़े हैं. वहीं, पचास हजार से अधिक व्यवसायी और मजदूर भी इससे रोजगार पा रहे हैं. देश की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां (MNC) भी पूर्णिया के गुलाबबाग में आकर मक्का की खरीद करती हैं.

पीला सोना के नाम से भी जाने जानेवाले मक्का की खेती पूर्णिया और सीमांचल में बड़े पैमाने पर होती है. यहां किसान प्रति एकड़ 50 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन करते हैं. इस मामले में पूर्णिया ने विश्व के सबसे अधिक उत्पादकता वाले क्षेत्र अमेरिका के मिडवेस्ट हार्टलैंड को पीछे छोड़ दिया है. अमेरिका में मक्का की उत्पादन क्षमता 48 क्विंटल प्रति एकड़ तक है. मक्का व्यवसायी और पूर्णिया के गुलाबबाग मंडी अनाज संघ के अध्यक्ष पप्पू यादव कहते हैं कि गुलाबबाग मक्का के मामले में एशिया की सबसे बड़ी मंडी है. यहां से कई देशों में मक्का की सप्लाई होती है. यहां से मक्का विशाखापतनम समेत कई पोर्ट पर जाता है जहां से जहाज के माध्यम से कई देशों में मक्का का निर्यात किया जाता है.

एक और मक्का व्यवसायी सुरेन्द्र भगत कहते हैं कि देश की 50 से अधिक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां गुलाबबाग में आकर मक्का खरीदती हैं. यहां से हर साल छह-सात सौ रेक रेलवे से मक्के की ढुलाई होती है. इसके अलावे ट्रकों से पड़ोसी देश बंग्लादेश समेत देश के कई राज्यों में भी मक्के की सप्लाई की जाती है. उन्होंने कहा कि मक्के की सप्लाई और रेट रेलवे पर भी डिपेंड करता है. उन्होंने बताया कि इस वजह से पूर्णिया में अब सात जगहों से मक्का लोडिंग के लिये रेक बन गया है जिससे व्यवसायियों को काफी सुविधा होता है.

मक्के की बंपर पैदावार से हजारों मजदूरों को भी मिलता है रोजगार
गुलाबबाग मंडी में सैकड़ों व्यवसायी मक्के की खरीद में जुटे हैं. वहीं, हजारों मजदूरों को भी इससे रोजगार मिलता है. व्यवसायी मनोज सर्राफ ने कहा कि मक्का का रेट उसकी क्वालिटी और मास्चराईजेशन पर निर्भर करता है. यहां 14 प्रतिशत से नीचे मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत 1500 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि इससे अधिक मास्चराइजेशन वाले मक्के की कीमत करीब 1450 रुपये प्रति क्विंटल है.

जिला कृषि पदाधिकारी संतलाल प्रसाद ने कहा कि पूर्णिया जिले में 65 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती होती है. इस रबी सीजन में यहां करीब साढ़े छह लाख मीट्रिक टन मक्के का उत्पादन हुआ है. उन्होंने कहा कि पूर्णिया जिले में लगभग दो लाख किसान मक्का की खेती करते है. जबकि 50 हजार से अधिक लोग इस रोजगार से जुड़े हैं. यहां से कई देशों में भी मक्के की सप्लाई की जाती है. यहां के मक्के की क्वालिटी विश्व की सबसे अच्छी क्वालिटी में से एक है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 1850 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. जल्द ही समर्थन मूल्य पर मक्के की खरीद शुरु होगी.

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