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बिहार के इस गांव को क्यों कहते हैं मिनी चंबल? 4 दशक में बिछ चुकीं हैं 50 से ज्यादा लाशें

बिहार के इस गांव को क्यों कहते हैं मिनी चंबल? 4 दशक में बिछ चुकीं हैं 50 से ज्यादा लाशें

पूर्णिया के सरसी गांव में बात-बात पर बंदूकें बोलने लगती हैं और लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है.

पूर्णिया के सरसी गांव में बात-बात पर बंदूकें बोलने लगती हैं और लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है.

Mini Chambal of Bihar: पूर्णिया के सरसी गांव में साल 1978 से बंदूकें गजर रही हैं. बीते शुक्रवार को पूर्व जिला पार्षद की हत्या कर दी गई. इससे पहले मंत्री लेशी सिंह के पति बूटन सिंह से लेकर लड्डू सिंह तक को मौत की नींद सुला दी गई. अबतक यहां पचास से अधिक लाशें बिछ चुकी हैं. बात- बात पर इस गांव में बदूकें गरज उठती हैं.

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    रिपोर्ट- कुमार प्रवीण

    पूर्णिया. बिहार में मिनी चम्बल के नाम से कुख्यात रहा पूर्णिया का सरसी गांव पिछले चार दशक से गैंगवार का दंश झेल रहा है. बदले की आग ने इस गांव की दर्जनों महिलाओं को विधवा बना दिया है, तो कई मांओं की कोख सूनी कर दी है. साल 1978 से अब तक चले आ रहे इस बदले की आग में सरसी में मंत्री लेशी सिंह के पति बूटन सिंह से लेकर लड्डू सिंह तक को मौत की नींद सुला दी. अबतक यहां पचास से अधिक लाशें बिछ चुकी हैं. बात- बात पर यहां बदूकें गरज उठती हैं. इस वजह से आम लोग दहशत के साये में जीने को विवश है. इसी का नतीजा है कि बीते शुक्रवार को सरेआम पूर्व जिला परिषद सदस्य रिंटू सिंह की हत्या कर दी गई.

    रिंटू सिंह की हत्या के बाद एक बार फिर सरसी में बदले की आग सुलगने लगी है. रिश्ते में मामा भांजा लड्डू सिंह और बूटन सिंह की कभी गहरी दोस्ती थी. लेकिन अचानक दोनों के बीच ऐसी दुश्मनी हुई कि सरसी गांव में गैंगवार में लाशें बिछती चली गईं. इससे पहले की बात करें तो साल 1978 में सूर्य नारायण सिंह की हत्या के बाद से सरसी में हत्याओं का दौर शुरु हो गया. 1979 में सूर्य नारायण सिंह हत्याकांड के आरोपी प्रमोद सिंह की हत्या कर दी गयी. इसके बाद शुरु हुए गैंगवार में विजय झा, गोपी सिंह, श्याम बिहारी सिंह, राजेश सिंह, नरेन्द्र नारायण सिंह, देव सुन्दर यादव, सियाशरण यादव, पंकज सिंह, मनोज मेहता, विशुनदेव मंडल, अरुण सिंह की हत्या कर दी गई.

    साल 2000 में वर्तमान खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह के पति और समता पार्टी के जिला अध्यक्ष बूटन सिंह की पूर्णिया सिविल कोर्ट में पेशी के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस घटना के बाद सरसी में बदले की आग फिर धधक उठी. 2008 में लड्डू सिंह, विवेका झा, और रामेश्वर झा की एक साथ गोली और बम मारकर सरसी गांव में हत्या कर दी गयी. इसके बाद सुगरा सिंह, बेदो सिंह, मलय सिंह समेत कई लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी. उसी दौर में पिंका सिंह और भोला सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया.

    लड्डू सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी बंदना सिंह मुखिया बनी. लड्डू सिंह की पत्नी वंदना सिंह और विधायक लेशी सिंह ने लोगों से शांति की अपील की. जिसके बाद कई वर्षों तक सरसी शांत रहा. कुछ वर्षों बाद फिर से सरसी में बंदूकें गरजने लगी. नवम्बर 2020 में विधानसभा चुनाव के दिन ही बिट्टू सिंह के भाई बेनी सिंह की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गयी. बीते शुक्रवार को सरसी थाना के पास पूर्व जिला परिषद सदस्य रिंटू सिंह की हत्या कर दी गयी. इस घटना से लोगों में काफी आक्रोश है.

    लड्डू सिंह की बहू सर्व प्रिया सिंह कहती हैं कि यहां बोलना अपराध है. कभी भी किसी की हत्या हो सकती है. मृतक रिंटू सिंह के पिता मनोज सिंह कहते हैं कि यहां गैंगवार में अबतक 50 से अधिक लोगों की हत्या हो चुकी है. लोग भय से कुछ बोलना नहीं चाहते हैं. गांव में दहशत का माहौल है.

    सरसी पहुंचे जाप सुप्रीमो व पूर्व सांसद पप्पू यादव कहते हैं कि गैंगवार के चलते सरसी के दर्जनों महिलाओं की मांग सूनी हो गयी है. बच्चे अनाथ हो गये हैं. अब यह सिलसिला थमना चाहिये. उन्होंने कहा कि चार दशकों के इस गैंगवार ने सरसी का अमन चैन छीन लिया है. लोगों में दहशत है और पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है.

    नेशनल हाइवे 107 और स्टेट हाइवे 77 से जुड़ा सरसी व्यापार से लेकर शिक्षा के मामले में कभी जिले में फेमस था, लेकिन आज यहां दहशत, गैंगवार और बदले की आग में सब कुछ जलकर स्वाहा हो गया. आम आदमी गांव से पलायन कर रहे हैं. ऐसे में पिता के प्यार से महरूम एक-एक बच्चा यही सवाल कर रहा कि आखिर सरसी में कब थमेंगी बंदूकें. कब रुकेगी हत्याओं का अंतहीन सिलसिला.

    Tags: Bihar latest news, Purnia news

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