मझुआ कांड: अनुसूचित जाति आयोग की टीम पहुंची पूर्णिया, महिलाओं ने दिखाए हैवानियत के जख्म

बिहार: महादलितों पर हुए हमले, आगजनी और दुष्कर्म की घटना के बाद पहुंचा एससी आयोग, महिलाओं ने दिखये हैवानों के जुल्म के निशान.

बिहार: महादलितों पर हुए हमले, आगजनी और दुष्कर्म की घटना के बाद पहुंचा एससी आयोग, महिलाओं ने दिखये हैवानों के जुल्म के निशान.

मझुआ गांव में 19 और 20 मई की रात एक समुदाय के सैकड़ों लोगों ने महादलितों की बस्ती को घेरकर आग के हवाले कर दिया था. भीड़ ने 13 महादलितों के घर जला दिए थे. एक रिटायर्ड चौकीदार की हत्या कर दी. उपद्रवियों ने महिलाओं और बच्चों पर जुल्म ढाए. दुष्कर्म किया. इसी मामले को लेकर अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने पीडि़तों से घटना की जानकारी ली.

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पूर्णिया. बायसी थाना के मझुआ गांव (Majhua Village) में 19 और 20 मई की रात एक समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों ने महादलितों ( Mahadalits ) की बस्ती को घेरकर आग के हवाले कर दिया था. इस घटना में भीड़ ने 13 महादलितों के घर जला दिया था, जबकि एक रिटायर्ड चौकीदार की पीटकर हत्या कर दी गयी थी. आरोप है कि उत्पातियों ने महिलाओं और बच्चों पर जुल्म ढाए और दुष्कर्म किया. इसी मामले को लेकर अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई नेता मौके पर पहुंचे. उन्होंने घटना के आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है.

पूर्णिया के मझुआ गांव में एक समुदाय विशेष के सौकड़ों लोगों की भीड़ ने महादलित बस्ती में जमकर बवाल किया. आरोप है कि गांव में आग लगाकर गांव की महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया. महिलाओं, बच्चों बुजुर्गों की जमकर पिटाई की गई. एक चौकीदार की पीटकर हत्या कर दी गई. उत्पीडऩ का शिकार बनी महिलाओं ने बताया है, "उपद्रवियों ने उनके गाल में दांत से काटा. उन्हें नग्न कर दिया. बेरहमी से कुकृत्य किया गया. तलवार से उनको काटना चाहा और उन्होंने छिपकर अपनी जान बचाई." एक महिला बताती है कि जमीन को लेकर पहले भी 2015 में इसी तरह की घटना हुई थी. तबसे वहां तीन साल तक पुलिस कैंप रहा. फिर कैम्प हटा दिया गया. बीते 24 अप्रैल को भी एक घर में आग लगाकर उन लोगों की पिटाई की गई थी. उन लोगों ने थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. अगर समय पर कार्रवाई होती तो आज ये घटना नहीं होती.

एससी आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व बनमनखी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि, भजपा एमएलसी दिलीप जायसवाल और एआईएमआईएम के बायसी के विधायक सैय्यद रुकनुद्दीन ने घटना स्थल पर पहुंचकर पीडि़तों की समस्याओं को सुना. आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार ऋषि ने कहा कि यह बहुत दुखद और अमानवीय घटना है. प्रशासन द्वारा अभी तक सिर्फ दो लोगों को ही गिरफ्तार कर खानापूर्ति की है.  जबकि इस मामले में दो अलग अलग प्राथमिकी दर्ज कर 60 नामजद और एक सौ अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.

उन्होंने कहा कि वह इसकी रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे और जल्द पीडि़त परिवारों को मुआवजा देने के लिये सरकार से कहेंगे.  वही एमएलसी दिलीप जायसवाल ने अपनी ही सरकार और उनकी पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुये कहा कि प्रशासन की नाकामी के कारण यह घटना हुई है. बायसी के एआईएमआईएम के विधायक सैय्यद रुकनुद्दीन ने कहा कि यहां शुरू से गंगा-जमुनी तहजीब के तहत हिन्दू-मुस्लिम एक साथ रहते हैं. यह कुछ अपराधियों के द्वारा की गई घृणित करतूत है. पूर्णिया में जिस तरह महादलित महिलाओं के साथ अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया यह शर्मसार करने वाली है. पुलिस की नाकामी भी इसमें साफ झलकती है.

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