भला सावन से भादो दुबर क्यों ? कहावत के उलट अल्पवृष्टि ने पैदा किए कई सवाल

सीमांचल में अल्पवृष्टि के हालात ने कृषि क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ और सावन महीने में भादो से अधिक वर्षापात हुआ है और भादो का महीना इस साल अल्पवृष्टि के बीच है. इस अल्पवृष्टि से धान की खेती पर असर पडता है.

Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: September 29, 2018, 6:46 AM IST
भला सावन से भादो दुबर क्यों ? कहावत के उलट अल्पवृष्टि ने पैदा किए कई सवाल
सीमांचल में अल्पवृष्टि के हालात ने कृषि क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ और सावन महीने में भादो से अधिक वर्षापात हुआ है और भादो का महीना इस साल अल्पवृष्टि के बीच है. इस अल्पवृष्टि से धान की खेती पर असर पडता है.
Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: September 29, 2018, 6:46 AM IST
एक कहावत है....भला सावन से भादो दुबर क्यों ? मतलब ये कि भादो महीने में वर्षा की धार सावन से दुबली नही बल्कि मोटी होती है. पर सूबे के मौजूदा हालात उलटे हुए हैं. भादो के महीने को सर्वाधिक वर्षापात का महीना माना जात है लेकिन इस साल अल्पवृष्टि के हालात बने हुए हैं जो खेतीबारी के लिए चिंताजनक विषय है.


सीमांचल में अल्पवृष्टि के हालात ने कृषि क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आषाढ और सावन महीने में भादो से अधिक वर्षापात हुआ है और भादो का महीना इस साल अल्पवृष्टि के बीच है. इस अल्पवृष्टि से धान की खेती पर असर पडता है.



पूर्णिया कृषि कालेज के वैज्ञानिक और प्राचार्य ड. पारसनाथ  की माने तो जारी महीने में वर्षा कम होने से धान में बाली निकलने की अवस्था प्रभावित होगी और दाने या तो कम निकलेंगे या अपुष्ट होंगे. साथ ही आने वाली रबी फसल के लिए  जमीन से नमी की मात्रा घट जायेगी और ऊपरी इलाकों के खेत रबी के लिए नमी नही रख पायेंगे.


कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर अक्टूबर- नवंबर में ओस की मात्रा अधिक होगी तो हालात में कुछ सुधार की संभावना रहेगी. वहीं पूर्णिया के जिला कृषि पदाधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद को कुदरत से अभी भी बारिश होने की उम्मीद मौजूद है.

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इधर जारी महीने में अल्पवृष्टि के हालात बने रहने के साफ संकेत मौसम विभाग ने दिये हैं. पूर्णिया में मौजूद क्षेत्रीय मौसम कार्यालय के पर्यवेक्षक सुमन कुमार की माने तो अभी पूरे बिहार के ऊपर वर्षा के बादल कहीं नहीं हैं और अगले दस दिनों तक वर्षा नही होगी और गर्मी के साथ ऊमस की मौजूदगी बनी रहेगी,


 मौसम विभाग के आंकडे के मुताबिक इस साल की बारिश पिछले साल की तुलना में एक सौ एमएम अधिक है पर पिछले साल के सितंबर में जहां 142.8 एमएम बारिश हुई थी वहीं इस साल महज 92.2 एमएम बारिश होना भादो महीने के हिसाब से काफी अचरज भरा है.


First published: September 29, 2018, 6:46 AM IST
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