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पूर्णियाः अपनों की मौत के बाद सरकारी अनुदान के लिए भटक रहे परिजन, सरकार नहीं सुन रही इनकी गुहार

Rajendra Pathak | News18 Bihar
Updated: November 23, 2019, 9:51 PM IST
पूर्णियाः अपनों की मौत के बाद सरकारी अनुदान के लिए भटक रहे परिजन, सरकार नहीं सुन रही इनकी गुहार
पूर्णिया प्रमंडल में मृतक आश्रित अनुदान के वितरण में देरी से कई पीड़ित परिवार हैं परेशान.

पूर्णिया (Purnia) प्रमंडल में मृतक आश्रितों को मिलने वाले सरकारी सहायता राशि (Deceased dependent grant) के वितरण में देरी से परेशान हैं पीड़ित लोग. दफ्तरों को चक्कर काटने वाले पीड़ितों ने लगाई सरकार से गुहार.

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पूर्णिया. जिले के जल्लागढ़ के भीम चौहान, अररिया के शिवेश्वर शर्मा और पूर्णिया के वार्ड 36 के खेसारी राम..., ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनके अपनों की आकस्मिक मौत हो गई और अब वे सरकार द्वारा दिए जाने वाले मृतक आश्रित अनुदान (Deceased dependent grant) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. पूर्णिया (Purnia) के सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते इन लोगों के पैर घिस गए, पर अनुदान नहीं मिला. इन पीड़ितों का कहना है कि पंचायत से लेकर प्रमंडल स्तर तक के सरकारी कर्मचारियों को प्राकृतिक आपदाओं (Natural Calamity) में जान गंवाने वालों के आश्रितों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होती. दरअसल, पूर्णिया प्रमंडल (Purnia Division) के इलाकों में आकस्मिक मौत के बाद जरूरतमंदों और मृतक के आश्रितों को सरकारी सहायता का लाभ समय से नहीं मिल पा रहा है. इसलिए भीम, शिवेश्वर या खेसारी जैसे लोग अपनों को गंवाने के बाद भी परेशान हैं.

योजनाएं कई, मगर नहीं मिलता लाभ
परिजनों की आकस्मिक मौत से परिवारों के लोग सदमे में होते ही हैं, दूसरा सदमा उन्हें सरकारी कार्यालयों में तब मिलता है जब उनके नाम पर मिलने वाली सहायता समय पर नहीं मिल पाती है. कामगार और गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वालों के लिए आकस्मिक मौत के बाद 20 हजार से लेकर 4 लाख रुपए तक के अनुदान देने की योजनाएं हैं. लेकिन किसी भी योजना के तहत पीड़ितों को समय पर अनुदान नहीं मिल पाता है. बीपीएल परिवार के लोगों को मौत के बाद दाह संस्कार के लिए कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना है, इसका भी ऐसा ही हाल है. पीड़ितों को कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब जाकर सहायता मिल पाती है. बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों की मदद के नाम पर दावे तो किए जाते हैं, लेकिन इन पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं है.

दस्तावेज के नाम पर परेशानी

दरअसल, ऐसे पीड़ित अधिकतर गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों के लोग होते हैं, जिनके पास मृत लोगों के दस्तावेज भी ठीक से नहीं रहते. मृत्यु प्रमाण पत्र, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाना, आवेदन ठीक से जमा करना, उसमें भूल नहीं होना, ये कुछ ऐसे काम हैं जिनके नाम पर सरकारी कर्मचारी इन पीड़ितों को चक्कर लगवाते रहते हैं. कोई पंचायत के चक्कर लगाता है तो कोई प्रखंड कार्यालय का. किसी को टोला सेवक परेशान करता है तो कोई प्रखंड कार्यालय के कर्मचारी से परेशान होता है. कुल मिलाकर कागजी काम में अनाड़ी लोगों के लिए सरकार या प्रशासन से लगातार गुहार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता.

आकस्मिक मौत की स्थिति में लागू योजनाएं
कबीर अंत्येष्टि अनुदान - 3 हजार
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मुख्यमंत्री परिवारिक लाभ - 20 हजार
पारिवारिक लाभ योजना - 20 हजार
आपदा अनुदान - 4 लाख
बाढ़ से मृत्यु - 4 लाख
बाढ़ के पानी से मौत - 4 लाख

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First published: November 23, 2019, 9:51 PM IST
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