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कौन सुनेगा कोसी की गोद में बसे लोगों की पीड़ा?

मधेपुरा जिले के कोसी नदी की गोद में बसे लोगों की पीड़ा नदी आए पानी के उफान की तरह है. राजनीति हुई, नेता भी मिले, लेकिन पीड़ा कमने का नाम नहीं ले रही है.

मधेपुरा जिले के कोसी नदी की गोद में बसे लोगों की पीड़ा नदी आए पानी के उफान की तरह है. राजनीति हुई, नेता भी मिले, लेकिन पीड़ा कमने का नाम नहीं ले रही है.

मधेपुरा जिले के कोसी नदी की गोद में बसे लोगों की पीड़ा नदी आए पानी के उफान की तरह है. राजनीति हुई, नेता भी मिले, लेकिन पीड़ा कमने का नाम नहीं ले रही है.

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मधेपुरा जिले के कोसी नदी की गोद में बसे लोगों की पीड़ा नदी आए पानी के उफान की तरह है. राजनीति हुई, नेता भी मिले, लेकिन पीड़ा कमने का नाम नहीं ले रही है.

मधेपुरा जिला का कोसी नदी से घिरे क्षेत्र में इन दिनों नदी में उफान है. यहां के लोग जीवन जीने को सशंकित हैं. लेकिन लोग इस तरह की जिंदगी जीने के आदी भी हो चुके हैं.

न सड़क, न बिजली, न विद्यालय और न स्वास्थ्य सुविधा. बच्चे जान हथेली पर रख नाव से नदी पार कर स्‍कूल जाते हैं. ग्रामीणों ने विद्यालय के लिए जमीन भी दी, लेकिन विभाग है कि 4 वर्षों में भवन निर्माण पूरा नहीं कर पाया.

10-11 वर्ष के सोनू की माने तो वो रोजाना नाव से पार कर पांच किलोमीटर की दूरी पार स्थित स्कुल जाता है. ग्रामीण संजय शर्मा बताते हैं कि विद्यालय निर्माण के लिए ग्रामीणों के सहयोग से 2 एकड़ जमीन दी गई, लेकिन अब तक भवन नहीं बना.

सुनीता देवी भी अपने बच्चों को नाव से स्कूल भेजने के बाद उसके लौटने तक हमेशा डर में दिन काटती है. कोसी नदी के गोद में बसा आलमनगर विधान सभा का मुरौत गांव सरकार और जनप्रतिनिधियों के उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां के विधायक नरेन्द्र नारायण यादव हैं जो वर्षों से बिहार सरकार में मंत्री हैं.

मुरौत गांव बीते कई वर्षों से कोसी के कटाव को झेल रहा है. हजारों परिवार विस्थापित की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. सरकार और मंत्री जी ने कई घोषणाएं की, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला.

ग्रामीण भूपेश यादव और राधेश्याम यादव बताते हैं कि मंत्री जी बोले थे, हरेक विस्थापित को 3 डिसमिल जमीन, इंदिरा आवास दिया जाएगा. नए बसे गांव में बिजली-सड़क होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

जिले के कोसी पीडि़तों की समस्या पर जब मंत्री जी कुछ नहीं कर पाए तो लोगों ने आस सांसद से लगाई. लंबे समय से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव संसद थे, इस बार लोगों ने युवा नेता पप्पू यादव को अपना सांसद चुना. अब सांसद सभी दोष मंत्री नरेन्द्र नारायण और बिहार सरकार पर मढ़ कर अपने कर्तव्य का इतिश्री मान लेते हैं और जनता से बिहार के लिए एक वर्ष का मौका मांगते हैं.

मधेपुरा जिले के आलमनगर, चौसा, प्रखंड के दर्जनों गांव इन दिनों कोसी की उफनती धारा की चपेट में है. राजनीति करने वाले राजनीति करने में व्यस्त हैं. पीडि़तों की समस्या से उन्हें क्या.

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