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राजगीर में 2,602 साल बाद आज फिर भगवान बुद्ध के पदचिन्हों पर चलेंगे श्रद्धालु

राजगीर में 2,602 साल बाद आज फिर भगवान बुद्ध के पदचिन्हों पर चलेंगे श्रद्धालु

2,602 साल बाद शनिवार को एक बार फिर तथागत मार्ग पर बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि के स्वर गूंजेंगे। जेठयिन से वेणुवन तक पदयात्रा का आयोजन होगा। इस यात्रा में दो लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। 13 किलोमीटर लंबे इस पथ पर गूंजने वाली ध्वनि के माध्यम से भगवान बुद्ध के विश्व भर में फैले 30 करोड़ से अधिक अनुयायियों को इसके पुनर्जागरण का अहसास कराना है।

2,602 साल बाद शनिवार को एक बार फिर तथागत मार्ग पर बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि के स्वर गूंजेंगे। जेठयिन से वेणुवन तक पदयात्रा का आयोजन होगा। इस यात्रा में दो लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। 13 किलोमीटर लंबे इस पथ पर गूंजने वाली ध्वनि के माध्यम से भगवान बुद्ध के विश्व भर में फैले 30 करोड़ से अधिक अनुयायियों को इसके पुनर्जागरण का अहसास कराना है।

2,602 साल बाद शनिवार को एक बार फिर तथागत मार्ग पर बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि के स्वर गूंजेंगे। जेठयिन से वेणुवन तक पदयात्रा का आयोजन होगा। इस यात्रा में दो लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। 13 किलोमीटर लंबे इस पथ पर गूंजने वाली ध्वनि के माध्यम से भगवान बुद्ध के विश्व भर में फैले 30 करोड़ से अधिक अनुयायियों को इसके पुनर्जागरण का अहसास कराना है।

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    2,602 साल बाद शनिवार को एक बार फिर तथागत मार्ग पर बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघं शरणं गच्छामि के स्वर गूंजेंगे। जेठयिन से वेणुवन तक पदयात्रा का आयोजन होगा। इस यात्रा में दो लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। 13 किलोमीटर लंबे इस पथ पर गूंजने वाली ध्वनि के माध्यम से भगवान बुद्ध के विश्व भर में फैले 30 करोड़ से अधिक अनुयायियों को इसके पुनर्जागरण का अहसास कराना है।

    बुद्ध के अध्यात्म की डोर से विश्व को एक सूत्र में पिरोने और शांति की स्थापना इसका उद्देश्य है। बुद्ध के अनुयायी मानते हैं कि आज भी इस वन में ज्ञान रूपी प्रकाश का प्रस्फुटन होता है, जो लोगों को पंचशील व आष्टांगिक मार्ग को अपनाने का पाठ पढ़ाता है। जेठियन-राजगीर पथ को विश्व का एकमात्र बुद्ध मार्ग माना जाता है। जिला वन पदाधिकारी रणवीर सिंह बताते हैं कि इस पथ की यात्र से बुद्ध के चरण रज को छू दिव्य ज्ञान की प्राप्ति और जीवन दर्शन के सुगम पथ की ओर जाने का अहसास पथिकों को होगा। ज्ञानप्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध को जेठियन से राजगीर लाने के लिए महाप्रतापी राजा बिम्बिसार अपने लाव-लश्कर के साथ इसी मार्ग से राजगीर लाए थे। उन्हें अपने शिष्यों के साथ रहने के लिए वेणुवन दान में दिया था। इसके बाद बुद्ध ने वेणुवन में ही पहले महाविहार की स्थापना की थी।

    विश्व में शांति स्थापना की पहल

    - 13 किमी की राजगीर बुद्धा हेरिटेज वॉक में शामिल होंगे कई देशों के श्रद्धालु
    - जेठियन से शुरू यात्रा का भगवान बुद्ध के पहले महाविहार वेणुवन में होगा समापन
    - विश्व का एकमात्र बुद्ध पथ है जेठियन-राजगीर मार्ग

    इन देशों के लोग इस पथ को मानते हैं पवित्र

    चीन, जापान, कोरिया, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कम्बोडिया, वियतनाम, लाओस, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया के साथ ही यूएसए व यूरोपीय संघ के देश।

     

    (हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से हिटी सिंडिकेशन द्वारा प्रकाशित)

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