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घोड़ाकटोरा की वादियों में मनाएं नए साल का जश्न

घोड़ाकटोरा की वादियों में मनाएं नए साल का जश्न

राजगीर रोपवे से साढ़े छह किलोमीटर दूर। तीन ओर से खूबसूरत वादियों से घिरा। एक किलोमीटर में फैला डैम। डैम में कलरव करते हंस व बत्‍तख। चारों ओर हरियाली ही हरियाली। न शोर, न कोई हुगदड़। नौका विहार में मशगूल सैलानी। कोई कर रहा हरियाली संग अठखेलियां। यही पहचान है घोड़ाकटोरा की। बिहार का पहला और इकलौता ईकोटूरिस्ट प्लेस।

राजगीर रोपवे से साढ़े छह किलोमीटर दूर। तीन ओर से खूबसूरत वादियों से घिरा। एक किलोमीटर में फैला डैम। डैम में कलरव करते हंस व बत्‍तख। चारों ओर हरियाली ही हरियाली। न शोर, न कोई हुगदड़। नौका विहार में मशगूल सैलानी। कोई कर रहा हरियाली संग अठखेलियां। यही पहचान है घोड़ाकटोरा की। बिहार का पहला और इकलौता ईकोटूरिस्ट प्लेस।

राजगीर रोपवे से साढ़े छह किलोमीटर दूर। तीन ओर से खूबसूरत वादियों से घिरा। एक किलोमीटर में फैला डैम। डैम में कलरव करते हंस व बत्‍तख। चारों ओर हरियाली ही हरियाली। न शोर, न कोई हुगदड़। नौका विहार में मशगूल सैलानी। कोई कर रहा हरियाली संग अठखेलियां। यही पहचान है घोड़ाकटोरा की। बिहार का पहला और इकलौता ईकोटूरिस्ट प्लेस।

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    राजगीर रोपवे से साढ़े छह किलोमीटर दूर। तीन ओर से खूबसूरत वादियों से घिरा। एक किलोमीटर में फैला डैम। डैम में कलरव करते हंस व बत्‍तख। चारों ओर हरियाली ही हरियाली। न शोर, न कोई हुगदड़। नौका विहार में मशगूल सैलानी। कोई कर रहा हरियाली संग अठखेलियां। यही पहचान है घोड़ाकटोरा की। बिहार का पहला और इकलौता ईकोटूरिस्ट प्लेस।

    नए साल का जश्‍न मनाना है तो आइए प्रकृति की गोद में। वादियों के बीच। राजगीर का घोड़ाकटोरा। यहां बिताएं सुकून भरे दो पल। हरियाली संग बिताएं कुछ लम्हें और मिटाएं सालभर की थकान। अगले साल के लिए आपको तोहफे में मिलेगी ऊर्जा। वन एवं पर्यावरण और पर्यटन विभागों ने यहां पहुंचने के लिए बने रास्ते को काफी सुगम बना दिया है। ठहरने के लिए कॉटेज बनाए गए है। शुद्ध पेयजल की भी यहां पूरी व्‍यवस्‍था है।

    सैर के साथ ही कई और मजे भी : सैर के साथ यहां आने वालों को कई और मजे भी मिलते हैं। रोपवे से घोड़ाकटोरा पथ पर पेट्रोलियम चालित वाहनों की आवाजाही पर रोक है। इस कारण यहां की सैर बैट्रीचालित वाहन, तांगा अथवा साइकिल से की जा सकती है। किराए पर ये तीनों सुविधाएं हर वक्त मौजूद रहती हैं।

    कैसे पहुंचें घोड़ाकटोरा

    पटना अथवा गया से राजगीर सीधा जुड़ा है। यहां ट्रेन अथवा बस से पहुंचा जा सकता है। राजगीर बस स्टैंड से सबसे पहले रोपवे के लिए तांगा मिलता है। रोपवे के बाद के साढ़े छह किलोमीटर की राह तय करने के लिए बैट्रीचालित वाहन किराए पर दिए जाते हैं। रोपवे के पास बने प्रवेश द्वार पर दिन के आठ से तीन बजे तक ही एंट्री दी जाती है।

    राजगीर के प्रमुख पर्यन स्थल

    ब्रह्मकुंड, गुरुनानक कुंड, मखदूम कुंड, सोन भंडार, वेणु वन, जयप्रकाश उद्यान, मणियार मठ, नौलखा मंदिर, बिम्बिसार की जेल, जरासंध का अखाड़ा, शांति स्तूप, रोपवे, जरा देवी मंदिर, जापानी मंदिर, वीरायतन, भगवान श्रीकृष्ण के रथ के पहिया का निशान, सप्तपणी गुहा, वैतरणी नदी घाट, वमीज टेम्पल, कम्बोडिया टेम्पल, झुनकिया बाबा मंदिर, कैलाश आश्रम, अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर, जैन मंदिर बाबा सिद्धनाथ मंदिर समेत अन्य।

    घोड़ाकटोरा को और आकर्षित बनाने के लिए डैम के बीच भगवान बुद्ध की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। घोड़ाकटोरा के विकास के लिए बनाए गए 50 करोड़ रुपए के मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया गया है।
    -संजीव कुमार अधिकारी पर्यटन विभाग, राजगीर

    (हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से हिटी सिंडिकेशन द्वारा प्रकाशित)

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