चंपारण सत्याग्रह शताब्दी के मौके पर राजकुमार शुक्ल के परिजनों का छलका दर्द

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि पंडित राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गांधीजी चंपारण पहुंचकर नील किसानों की लड़ाई लड़ी थी लेकिन इस हस्ती को जिला प्रशासन ने पूरी तरह भुला दिया है.राजकुमार शुक्ल का परिवार इस बात से बेहद नाराज है.

ETV Bihar/Jharkhand
Updated: April 13, 2017, 8:01 AM IST
चंपारण सत्याग्रह शताब्दी के मौके पर राजकुमार शुक्ल के परिजनों का छलका दर्द
राजकुमार शुक्ल (file)
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Updated: April 13, 2017, 8:01 AM IST
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि पंडित राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गांधीजी ने चंपारण पहुंचकर नील किसानों की लड़ाई लड़ी थी लेकिन इस हस्ती को जिला प्रशासन ने पूरी तरह भुला दिया है.राजकुमार शुक्ल का परिवार इस बात से बेहद नाराज है.

पंडित राजकुमार शुक्ल के नाती अरुण शुक्ला का कहना है कि सरकारी स्तर पर कार्यक्रम में उनके परिवार को पूछा तक नहीं गया है. जिले के किसी भी प्रखंड में स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में राजकुमार शुक्ल का नाम तक नहीं है.



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उन्होंने कहा कि पूरे सूबे में चंपारण शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है लेकिन उनके परिवार को भुला दिया गया. राजकुमार शुक्ल का फोटो अखबारों और  बेवसाइटों पर होने के बावजूद बैनर पोस्टर पर राजकुमार शुक्ल की गलत तस्वीर लगाकर परिवार को अपमानित किया जा रहा है.

अरुणा शुक्ला के अनुसार 1917 में  चंपारण के इस वीर सपूत ने यहां के 19 लाख लोगों को आजादी दिलाने और उनके मानवाधिकार के लिए अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई थी लेकिन आज वो पूरी तरह से उपेक्षित हैं.

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रामकुमार शुक्ल के दामाद मणिभूषण राय ने बताया कि पंडित राजकुमार शुक्ल के नाम को बचाने के लिए परिवार के लोगों ने एक कॉलेज खोला जो आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण राजनीति का केन्द्र बन गया है. उन्होंने कहा कि  स्थानीय विधायक की दादागिरी के कारण कॉलेज में पंडित राजकुमार शुक्ल की जगह किसी और की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है.  साथ ही परिवार के सदस्यों को पिछले 40 सालों से कॉलेज संचालन समीति से दूर रखा गया है.
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बैनर पोस्टर में राजुकमार की जगह किसी और की तस्वीर ( news18)
बैनर पोस्टर में राजुकमार की जगह किसी और की तस्वीर ( news18)


शुक्लजी के घर की औरतों की माने तो जब इस घर से नाता जुड़ रहा था तो यह जानकर अच्छा लगा कि एक महान व्यक्ति के घर उनकी शादी हो रही है लेकिन घर के साथ साथ गांव की जो हालात है उसे देखकर तो ऐसा लगता है कि सिर्फ और सिर्फ अब उनका नाम हीं बचा है और कुछ नहीं.

राजकुमार शुक्ल की नाती आभा देवी बताती हैं कि गांव में बहुत सारे लोग आते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं करता है. इस गांव में सड़क और बिजली की स्थिति बेहद खराब है.

पंडित राजकुमार शुक्ल का पैतृक घर लौरिया प्रखंड के सतवरिया में है तथा गौनाहा प्रखंड के मुरली भरहवा गांव मे भी उनकी खेती थी जो बाद मे नदी के कटाव में खत्म हो चुका है.
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