काराकाट विधानसभा क्षेत्र: कभी वामपंथ का गढ़ रहा यह इलाका अब है राजद के कब्जे में

बिहार की काराकाट सीट से विधायक संजय यादव और पूर्व विधायक राजेश्वर राज (फाइल फोटो)
बिहार की काराकाट सीट से विधायक संजय यादव और पूर्व विधायक राजेश्वर राज (फाइल फोटो)

Karakat Assembly Seat: बिहार की काराकाट सीट से राजद के संजय यादव विधायक हैं जो लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के काफी करीबी माने जाते हैं. उनका मुकाबला पिछली बार इस सीट पर बीजेपी के राजेश्वर राज से था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 2:02 PM IST
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रोहतास. काराकाट विधानसभा क्षेत्र रोहतास जिला का चर्चित विधानसभा क्षेत्र में अपने विविधता के लिए जाना जाता है. कभी सीपीआईएमएल लिबरेशन के गढ़ माने जाने वाला यह इलाका अब राजद (RJD) के कब्जे में है. अपने सामाजिक समीकरण तथा आंदोलन के लिए भी यह क्षेत्र चर्चा में रहा है. सोन का तटीय इलाका होने के कारण प्राकृतिक रूप से यह क्षेत्र समृद्ध है. भोजपुर (Bhojpur) तथा औरंगाबाद से सीधे सड़क संपर्क से जुड़े होने के कारण कारोबार व्यवसाय में भी यह इलाका सब से जुड़ा हुआ है. किसानों को उनके उपज का सही मूल्य, नहरों के अंतिम छोर तक पानी, उच्च शैक्षणिक संस्थाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव तथा विधि व्यवस्था यहां कि मूल समस्या है.

काराकाट विधानसभा क्षेत्र का मुख्य बाजार बिक्रमगंज का अनुमंडल मुख्यालय है और बिक्रमगंज के ही रहने वाले संजय यादव ने सन 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राजेश्वर राज को हराकर इस सीट पर कब्जा जमा लिया. संजय यादव ने बिक्रमगंज नगर पंचायत की राजनीति से अपनी कैरियर की शुरुआत की, बाद में वो सांसद रहे पप्पू यादव के संपर्क में आए लेकिन सन 2015 में लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव से उनकी घनिष्ठता काम आई और बड़े-बड़े दिग्गजों को पछाड़ते हुए संजय यादव ने काराकाट सीट हथिया लिया.

काराकाट का इलाका कम्युनिस्ट आंदोलन के लिए भी चर्चित रहा है. 90 के दशक में यहां वामपंथ ने खूब पांव पसारा. राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो कभी इस इलाके पर समाजवादी नेता तुलसी सिंह का कब्जा था. सन 1990 तथा 1995 में तुलसी सिंह जनता दल से विधायक चुने गए थे लेकिन सन 2000 तथा 2005 के फरवरी के चुनाव में उन्हें सीपीआई के अरुण सिंह से पराजय का मुंह देखना पड़ा. माले लिबरेशन के अरुण सिंह तीन बार काराकाट के विधायक रहे.



पिछले दो विधानसभा चुनावों की अगर बात करें तो सन 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद के मुन्ना राय को भाजपा के राजेश्वर राज ने 11415 मतों से पराजित किया था. राजद प्रत्याशी मुन्ना राय को 38336 मत मिले जबकि राजेश्वर राज को 49751 मत प्राप्त हुआ था. सन 2010 के विधानसभा चुनाव में माले के प्रत्याशी अरुण सिंह ने भी अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कराई. उन्हें 23179 मत मिले. जो कुल मतदान का 18% से अधिक था.
सन 2015 के विधानसभा के चुनाव में राजद ने अपना प्रत्याशी बदल दिया और मुन्ना राय की जगह संजय यादव को अपना प्रत्याशी बनाया. चुकी जदयू- राजद गठबंधन ने संजय यादव के जीत का रास्ता आसान कर दिया और भाजपा के राजेश्वर राज 12119 मतों से चुनाव हार गए. बड़ी बात यह है कि इस बार के चुनाव में भी माले के अरुण कुमार ने फिर से 30534 मत लाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा ही दी. वहीं पुराने दिग्गज नेता रहे अखलाक अहमद ने भी सन 2015 के विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई लेकिन उन्हें मात्र 3815 मत मिले थे.

आंकड़ों की बात करें तो काराकाट विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 587522 है. जिसमें पुरुषों की संख्या 296483 तथा महिलाओं की संख्या 291040 है. अब बात मतदाताओं की करते हैं. काराकाट विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 322737 है. जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 168519 तथा महिलाओं मतदाता की संख्या 154200 है. वही थर्ड जेंडर भी 18 की संख्या में यहां मतदाता है.

आगामी विधानसभा चुनाव में फिर से जहां राजद के संजय यादव दमखम दिखाने में लगे हैं वहीं पिछला चुनाव हार कर भी भाजपा के राजेश्वर राज लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं. आरएसएस से उनकी घनिष्ठता के कारण वे अपना टिकट मांग रहे हैं. सीपीआई एमएल भी इस बार अपना दांव मजबूती से खेलने के जुगाड़ में है.
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