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Lockdown: नक्सल प्रभावित इलाकों में ड्रोन कैमरे से निगरानी कर रही CRPF, सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन रखने की कवायद

सोशल डिस्टेंसिंग रखने के लिए ड्रोन से नजर रख रही है सीआरपीएफ
सोशल डिस्टेंसिंग रखने के लिए ड्रोन से नजर रख रही है सीआरपीएफ

कैमूर पहाड़ी पर बसे गांव दूर-दूर पर है तथा आबादी का भी घनत्व काफी कम है. फिर भी सीआरपीएफ के जवान गांव में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि वे लोग एक गांव से दूसरे गांव न जाएं.

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सासाराम. रोहतास जिला का दक्षिण इलाका नक्सल प्रभावित रहा है. जिस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक बटालियन को यहां पदस्थापित कर रखा है. जब से लॉकडाउन (Lockdown) हुआ है, तब से सीआरपीएफ ने इलाके में अपनी गतिविधि बढ़ा दी है. लोगों को घरों में रहने के लिए कहा जा रहा है और इसके लिए लगातार ड्रोन कैमरे से निगरानी रखी जा रही है. जिले के कैमूर पहाड़ी से लगे तिलौथू, रोहतास, चुटिया, नौहट्टा, बड्डी तथा चेनारी थाना क्षेत्र के इलाके में ड्रोन कैमरे (Drone cameras) से नजर रखी जा रही है. खासकर कैमूर पहाड़ी पर बसे गांवों में लोग किस तरह से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, इस पर सीआरपीएफ नजर बनाये हुए है.

सोशल डिस्टेंसिंग पालन करने के लिए जागरूकता
दरअसल कैमूर पहाड़ी पर बसे गांव दूर-दूर पर है तथा आबादी का भी घनत्व काफी कम है. फिर भी सीआरपीएफ के जवान गांव में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि वे लोग एक गांव से दूसरे गांव न जाएं तथा लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने ही घरों में रहे. सीआरपीएफ की कड़ाई का असर दिख रहा है और लोग ज्यादातर घरों में ही जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर ही कृषि कार्य के लिए निकलते हैं। लेकिन पहाड़ पर बसे गांवों में अत्यंत गरीबी है. जिससे इन लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है.

CRPF चला रही 'सिविक एक्शन प्लान'
वहीं, दूसरी और सीआरपीएफ का दूसरा पहलू यह भी है कि इन इलाके में लगातार सिविक एक्शन प्लान के तहत जरूरतमंदों को मदद पहुंचाई जा रही है. गरीब तथा असहयोग को राशन के अलावा अन्य जरूरत के सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लॉक डाउन के दौरान उन्हें खाने-पीने की दिक्कत ना हो सके. लोगों के बीच सूखा राशन , आलू,  नमक, मसालों के अलावा पका हुआ भोजन का पैकेट भी सप्लाई की जा रही है. जिसमें स्थानीय लोगों की मदद ली जा रही है यह कहें कि इस लॉकडाउन में पहाड़ पर जीवन यापन कर रहे लोगों के लिए सीआरपीएफ वरदान साबित हुई है.



विभिन्न ने गांव के मुखिया के माध्यम से पहुंचाई जा रही मदद 
लोगों के बीच पहुंचने के लिए सीआरपीएफ के जवान गांव के जनप्रतिनिधियों की मदद ले रहे हैं. खासकर विभिन्न पंचायतों के मुखिया जी से सीआरपीएफ के जवान सीधे संपर्क में हैं तथा गांव में गरीब और लाचार परिवारों की सूची मुखिया जी से लिया जा रहा हैं. उसी के आधार पर मदद पहुंचाई जा रही है ताकि जरूरतमंदों तक सीधी सेवा पहुंच सके. पंचायत के जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सीआरपीएफ के जवानों को मदद पहुंचाने में सहूलियत मिल रही है और सही लोगों तक सामान भी पहुंच रहा है.

क्या कहते हैं सीआरपीएफ के अधिकारी
सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट प्रभात पांडे ने बताया कि नक्सल प्रभावित एरिया में पहले से ही 'ऑपरेशन विश्वास' के तहत लोगों के बीच सीआरपीएफ पहुंच रही है. वहीं, लॉकडाउन के बाद 'सिविक एक्शन प्लान' बनाकर जरूरतमंदों को सहायता दी जा रही है. जिसमें स्थानीय थानों की पुलिस भी मददगार है. जब तक लॉकडाउन रहेगी, पहाड़ी क्षेत्रों के गांव के लोगों की मदद जारी रहेगी.

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