ठेले पर स्वास्थ्य सिस्टम, सड़क हादसे में पैर तोड़वा चुके मरीज का ठेला पर ही कर दिया इलाज
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ठेले पर स्वास्थ्य सिस्टम, सड़क हादसे में पैर तोड़वा चुके मरीज का ठेला पर ही कर दिया इलाज
बिहार के रोहतास में मरीज का ठेले पर उपचार करता डॉक्टर

इस मामले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि चुकी मरीज को तुरंत रेफर करना था तथा उसके पैर में गंभीर चोट आई थी. इसीलिए जल्दी से ठेला पर ही उसका इलाज कर एंबुलेंस मंगवा कर भेज दिया गया.

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रोहतास. बिहार के स्वास्थ्य महकमे से बदहाली की तस्वीरों का आना लगातार जारी है. कोविड-19 (Covid 19) को लेकर जहां अस्पतालों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक सामने आ रही हैं तो वहीं रोहतास से भी एक ऐसी ही तस्वीर आई है जो ठेले (Patient On Handcart) पर स्वास्थ्य सिस्टम को दिखा रही है. रोहतास  जिला के करगहर में सड़क दुर्घटना में घायल शख्स को ठेले से अस्पताल तो लाया गया लेकिन सबसे बड़ी बात है कि ठेले पर ही घायल का इलाज भी कर दिया गया.

गार्ड भी करने लगा इलाज

ये तस्वीर करगहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हैं. बताया जाता है कि बाइक सवार तीन लोग एक कार की चपेट में आ गए थे. जिससे एक बच्चा सहित तीन लोगों को चोट आई जिसमें बाइक चला रहे बुटन बैठा के पैर की हड्डी टूट गई थी. उन्हें किसी तरह ठेला पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन ठेले पर ही स्वास्थ्य कर्मियों ने उनका इलाज शुरू कर दिया. अस्पताल के सुरक्षा गार्ड भी बेचारे घायल की मरहम पट्टी में मदद करने लगे. बाद में परिजनों तथा मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के बाद एंबुलेंस मंगवाया गया जिससे उन्हें सासाराम सदर अस्पताल रेफर किया गया.



क्या कहते हैं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी?
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि चुकी मरीज को तुरंत रेफर करना था तथा उसके पैर में गंभीर चोट आई थी. इसीलिए जल्दी से ठेला पर ही उसका इलाज कर एंबुलेंस मंगवा कर भेज दिया गया. अस्पताल में स्ट्रेचर से लेकर तमाम तरह की सुविधाएं हैं लेकिन कर्मियों की कमी के कारण इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता है. मुख्य समस्या है कि इस अस्पताल में मानव संसाधन की घोर कमी है.

पीएचसी करगहर में चिकित्सक की है कमी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करगहर में मात्र एक ही एमबीबीएस डॉक्टर हैं इसके अलावा एक आयुष चिकित्सक हैं जिस कारण नेहा मरीजों को आए दिन परेशानी होती है. जब यहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अनुमंडल तथा जिला मुख्यालय विभिन्न विभागीय कार्य से जाते हैं तो अस्पताल में मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है. स्थिति यह हो गई है कि अस्पताल के सुरक्षा गार्ड को भी कभी-कभी मरीजों की मरहम पट्टी करनी पड़ती हैं.
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